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नवरात्र चौथा दिन: मां कूष्माण्डा के दर्शनों के लिए उमड़ी भीड़

भोर में मंगला आरती के बाद भक्त मां कूष्माण्डा के दर्शन करके निहाल हो उठे.

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मिर्जापुर में जगत जननी मां विन्ध्य वासिनी के धाम में रविवार को नवरात्र के चौथे दिन देवी स्वरुप मां कूष्माण्डा की विधिवत पूजा की गई.  भोर में मंगला आरती के बाद भक्त मां कूष्माण्डा के दर्शन करके निहाल हो उठे. घंटा घड़ियाल से गगन मंडल गुंजायमान हो गया.

नवरात्रों में चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरुप की उपासना की जाती है. मां कूष्माण्डा की उपासना से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है. अपनी मंद हंसी द्वारा अण्ड अर्थात्  ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है.

जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था. चारों ओर अंधकार ही अंधकार व्याप्त था. तब इन्हीं देवी ने अपने ईषत् हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी. अत: यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा आदि शक्ति हैं.



मां कुष्माण्डा की आठ भुजाएं हैं. इनके सात हाथों में क्रमश: कमण्डल, धनुष बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं. आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है. इनका वाहन सिंह है.
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