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यूपी में यहां लगता है 'भूतों का मेला', उमड़ती है लोगों की भीड़

मिर्जापुर में लगता है भूतों का मेला

मिर्जापुर में लगता है भूतों का मेला

Mirzapur news: मिर्जापुर में प्रतिवर्ष कार्तिक मास में लगने वाले इस मेले में मत्था टेकने से भक्त की हर मुराद पूरी होती ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट- मंगला तिवारी

    मिर्जापुर: भूत-प्रेत और चुड़ैल जैसी चीजों के अस्तित्व को विज्ञान स्वीकार नहीं करता. लेकिन वर्तमान समय में भी दुनिया की कई संस्कृतियों में लोग आत्माओं और भूतों में यकीन करते हैं. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से 70 किमी दूर बरही गांव में हर साल भूतों का मेला लगता है. इस मेले में शामिल होने के लिए प्रदेश और जनपद ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों जैसे-बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश समेत कई अन्य प्रान्तों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं. आइए जानते हैं भूतों के इस मेले में क्या होता है…

    नक्सल प्रभावित क्षेत्र अहरौरा के बेचू बीर बाबा के धाम पर लगने वाले मेले की मान्यता है कि यहां दर्शन से रोग व्याधि से छुटकारा मिलता है. प्रतिवर्ष कार्तिक मास में लगने वाले इस मेले में मत्था टेकने से निःसंतान दंपति को संतान प्राप्ति के साथ ही भक्त की हर मुराद पूरी होती है. जिन भक्तों की मनोकामना पूरी नहीं होती है, वे लगातार पांच वर्ष तक बाबा के दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं. अंधविश्वास के इस मेले में भूतों की भीड़ लगती है, जहां लोगों की मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भूत, डायन और चुड़ैल से मुक्ति मिलती है.

    350 सालों से लग रहा यह मेला
    बेचू बीर बाबा के दरबार में पहली बार आने वाले भक्त को पास में ही स्थित भक्सी नदी में स्नान कर पहने हुए कपड़ों को वहीं छोड़ कर नए कपड़े धारण कर चौखट में प्रवेश करना पड़ता है. यह मेला लगभग साढ़े 300 सालों से चला आ रहा है. यहां भूत-प्रेत जैसी बाधाओं से परेशान लोगों की भीड़ जुटती है. मनौती पूरी हो जाने पर भक्त बाबा के धाम में श्रद्धा और भक्ति के बीच गाजा-बाजा के साथ मेले में पहुंचते हैं. भक्तों का मानना है कि यहां आने वाले लोगों को सुख-समृद्धि मिलती है. दर्शनार्थी अनिता गुप्ता ने बताया कि मुझे यहां के बारे में अपने माता पिता से जानकारी मिली थी. यहां आने से सभी कष्टों का निवारण होता है.

    जानिए क्या है कहानी
    बेचू वीर धाम के पुजारी बृज भूषण यादव ने बताया कि एक बार भगवान शिव के भक्त बेचूबीर पर एक शेर ने हमला कर दिया. बेचूबीर बाबा घायल हो गए. जब वो अपने इष्ट देव को याद किए तो आकाशवाणी हुई कि जिस शेर से लड़ाई हुई कोई साधारण शेर नहीं था. स्वयं भगवान शिवशंकर थे. इसके बाद वह घायल अवस्था में ही बरही गांव पहुंचे और लोगों से आपबीती सुनाई, कहा हमारे मरने के बाद हमारी समाधी स्थल बनाकर जो पूजा करेगा सबका कल्याण होगा. उसके बाद से ही यहां मेला लगता है.

    बेचूबीर बाबा की पत्नी की भी होती है पूजा
    बरही गांव में ही बेचूबीर बाबा की पत्नी बरहिया माता का भी समाधी स्थल बनाया गया है. जहां लोग दर्शन पूजन करते हैं. मान्यता है कि जब बेचूबीर बाबा की शेर से लड़ाई हुई, वह मरणासन्न स्थिति में थे. जब यह खबर सुनी, वह बरही में थीं. उसके बाद उन्होंने भी गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर सती हो गई. जहां उनका समाधी स्थल बनाया गया. उसके बाद से उनका भी दर्शन-पूजन के लिए लाखों की संख्या में भक्त आते हैं.

    मंत्री ने भी टेका मत्था
    सोनभद्र से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण मंत्री संजीव गौड़ ने भी बेचूबीर बाबा के मंदिर में दर्शन पूजन की और कहा कि बेचूबीर बाबा एक देव पुरुष थे. वो तीन दिन-रात शेर से लड़े थे, उसके बाद एकादशी को उनकी मृत्यु हो गई थी. तब से यहां लाखों की संख्या में लोग अपनी मान्यताएं लेकर आते हैं, जिसको बाबा पूरा करते हैं.

    Tags: Mirzapur news, UP news

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