बारामुला मुठभेड़ में शहीद हुआ मिर्जापुर का लाल, पिता बोले- एक और बेटा होता तो उसे भी सेना में भेजते
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बारामुला मुठभेड़ में शहीद हुआ मिर्जापुर का लाल, पिता बोले- एक और बेटा होता तो उसे भी सेना में भेजते
कश्मीर के बारामुला एनकाउंटर में मिर्जापुर के रवि सिंह शहीद हो गए हैं.

मिर्जापुर (Mirzapur) के रवि सिंह कश्मीर के बारामुला में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शामिल थे. वह 2 आतंकवादियों को मारने के बाद शहीद हो गए. एनकाउंटर से ऐन पहले उनकी परिवार से बात हुई थी.

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मिर्ज़ापुर. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर (Mirzapur) जिले के जिगना थाना क्षेत्र के गौरा गांव के रवि सिंह श्रीनगर के बारामुला में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में सोमवार को शहीद हो गए थे. रवि सिंह की शहादत की खबर मिलते ही गांव में मातम का माहौल पसर गया. गम में डूबे गौरा गांव में शहीद रवि के घर पर आंखों में आंसू लेकर पहुंचने वालों की सुबह कतार लग गई. इस हादसे की पुष्टि जिला प्रशासन ने देर शाम को की तो वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है और परिजनों को 50 लाख की आर्थिक सहायता और परिवार में एक शख्स की सरकारी नौकरी की घोषणा की है.

बारामुला में आतंकवादियों से मुठभेड़ में 2 आतंकवादियों को मौत की नींद सुला कर मातृभूमि के लिए शहादत देने वाले लाडले बेटे रवि की वीरता को याद कर लोगों का सीना फख्र से चौड़ा हो गया. गौरा गांव के किसान संजय सिंह अपनी दो बेटियों के बीच इकलौते बेटे को वे सेना के जवान के रूप में देखना चाहते थे. देश की रक्षा के लिए सीने में जोश, जज्बा और जुनून के साथ सेना में भर्ती के लिए जुटे रवि ने मात्र 18 साल की उम्र में ही पिता के सपने को साकार कर दिखाया.

2013 में मध्य प्रदेश के जबलपुर में ग्रेनेडियर रेजीमेंट में रवि सिंह गांव के ही तीन अन्य साथियों के साथ भर्ती हुए थे. फिलहाल 29 आरआर 13 ग्रेनेडियर रेजीमेंट पटन श्रीनगर में ड्यूटी पर तैनात थे.



दो साल पहले हुई थी शादी
रवि की दो वर्ष पूर्व ही प्रयागराज के कोरांव में प्रियंका के साथ धूमधाम से उनकी शादी हुई थी. माता रेखा देवी की दिली इच्छा थी कि घर में किलकारियां गूंजे. मां की इच्छा पूरी होने से पहले ही इकलौता बेटा देश के लिए कुर्बान हो गया. सोमवार को डेढ़ बजे दिन में रवि सिंह ने पहले अपनी पत्नी फिर मां और पिता से एक-एक कर वीडियो कॉलिंग से बात की थी. पिता ने रोते हुए कि बेटा शीघ्र घर आने की बात कह रहा था, अचानक उसने कहा कि पापा आतंकवादियों से मुठभेड़ हो गई है. अब मैं ऑपरेशन में जा रहा हूं. उधर से कॉल कट गई.

फोन पर शहीद होने की खबर

श्रीनगर में ही सेना में तैनात एक रिश्तेदार ने पड़ोसी को फोन पर शहीद होने की खबर दी. कानो-कान खबर परिजनों तक पहुंची तो घर में कोहराम मच गया. मां-पत्नी सहित सभी बिलख पड़े. बीती रात 11 बजे बटालियन के मेंजर ने पिता से बात कर बेटे के शहीद होने की सूचना दी. रवि सिंह की प्रारंभिक शिक्षा सिंगरौली में हुई थी. यहां उनके बड़े पिताजी एक फैक्टरी में कार्यरत थे. बाद में गांव में रहकर मौनी स्वामी इंटर कॉलेज श्रीनिवास धाम से हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा पास की थी.

गांव के युवाओं में सेना में जाने का है जुनून

गौरा गांव के नवयुवकों में सेना और पैरा मिलिट्री फोर्स में भर्ती होने का एक जज्बा और जुनून है. तभी तो वर्तमान में कमोबेश पांच दर्जन युवक सेना व फोर्स में भर्ती होकर देश सेवा में जुटे हुए हैं. शहीद के चाचा बृजेश सिंह आईटीबीपी जवान हैं. वे चीन की सीमा से सटे लेह-लद्दाख में देश की सरहद पर निगहबानी कर रहे हैं, जबकि इसी परिवार के आदर्श सिंह जो एक माह की छुट्टी पर घर आएं हैं, 23 आर आर 15 राजपूत बटालियन के सैनिक हैं. पटन श्रीनगर के पास ही नचलान में तैनात हैं. मुट्ठियां भींचते हुए उन्होंने बताया कि आतंकियों का सफाया होने तक चैन से नहीं बैठेंगे. शहीद के पिता को मलाल इस बात का है कि काश उनका एक और बेटा होता तो आतंकियों की कमर तोड़ने के लिए उसे भी फौज में भेज देते.
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