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मिर्जापुर लोकसभा सीट: अनुप्रिया पटेल के लिए 2014 की तरह आसान नहीं है ये चुनाव

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इस बार के चुनाव में एसपी-बीएसपी गठबंधन ने इस सीट पर बीजेपी के 2014 में मछलीशहर से सांसद रहे राम चरित्र निषाद को उतारा है.

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2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी में 71 सीटें जीती थीं, और उसकी सहयोगी अपना दल ने 2 सीटों पर कामयाबी पाई थी. 2016 में अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में जगह दी गई. उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया. अब उनके मंत्री होने जाने की वजह से इस सीट का महत्व इस बार और ज्यादा बढ़ गया है. एसपी-बीएसपी गठबंधन की तरफ से इस सीट पर राम चरित्र निषाद को खड़ा गया है. वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर ललितेश पति त्रिपाठी को खड़ा किया है.

अपना दल की राजनीति

अनुप्रिया पटेल के पिता सोनेलाल पटेल ने लंबे समय तक यूपी में अपना दल के बैनर तले कुर्मी बिरादरी को एक करने की राजनीति की. हालांकि यूपी की राजनीति में कई दशक खर्च करने के बाद भी सोने लाल पटेल सीटों के लेवल पर कोई बड़ा परिवर्तन अपनी पार्टी के लिए नहीं ला सके. लेकिन 2014 में जब देशभर में मोदी लहर चली तो अनुप्रिया पटेल ने बीजेपी से गठबंधन कर दो सीटों पर विजय हासिल की थी. अनुप्रिया पटेल की यह जीत पार्टी के संजीवनी की तरह थी. यूपी की राजनीति के जानकारों का मानना है कि 2014 के बाद अपना दल के प्रभाव में काफी इजाफा हुआ है. फिर मोदी सरकार में मंत्रिपद मिलने से राज्य की राजनीति में अनुप्रिया पटेल का भी कद बढ़ा है.



हालांकि बीच में पारिवारिक विवाद की खबरें आई थीं जिसके बाद अनुप्रिया की मां ने दूसरी पार्टी बना ली. लेकिन पटेल वोटरों में अब भी अनुप्रिया का दखल ज्यादा माना जाता है. सांसद बनने से पहले अनुप्रिया ने 2012 में रोहनिया से विधायक का चुनाव जीता था.
एसपी-बीएसपी गठबंधन की स्थिति

गठबंधन के उम्मीदवार राम चरित्र निषाद


इस सीट पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ने ही समय-समय पर जीत दर्ज की है. एसपी ने चार बार तो बीएसपी दो बार यहां से अपना सांसद लोकसभा में भेजा है. 2009 से 2014 की लोकसभा में यहां से यूपी के कुख्यात दस्यू ददुआ के भतीजे बाल कुमार पटेल सांसद थे. इस सीट को 1996 में फूलन देवी ने भी चुना था. फूलन देवी को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया था. बाद में फूलन देवी की हत्या हो गई थी.

इस बार के चुनाव में एसपी-बीएसपी गठबंधन ने इस सीट पर बीजेपी के 2014 में मछलीशहर से सांसद रहे राम चरित्र निषाद को उतारा है. राम चरित्र निषाद ने टिकट काटे जाने के कारण बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी ज्वाइन की है और उनके ज्वाइन करने के साथ मिर्जापुर से टिकट दे दिया गया.

कांग्रेस की स्थिति

चुनाव प्रचार के दौरान ललितेश पति त्रिपाठी


वहीं कांग्रेस की बात करें तो मिर्जापुर सीट पर शुरुआती चुनावों में कई बार जीती. लेकिन 1984 के चुनावों में उमाकांत मिश्रा की जीत के बाद से फिर कभी वापसी नहीं हो सकी. इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी पूर्वांचल के कद्दावर कांग्रेसी नेता कमला पति त्रिपाठी के परिवार से हैं. इस परिवार के बारे में कहा जाता है कि इसने कभी भी कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा और शायद यही वजह कि इस परिवार की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व में अच्छी पकड़ रही है. अब ललितेश त्रिपाठी के सामने यह चुनौती है कि वो यह सीट जीतकर पार्टी के लिए सालों से पड़े सूखे को समाप्त करें.

चुनावी समीकरण

इस लोकसभा क्षेत्र में छानबे, मिर्जापुर, मंझावन, चुनार और मड़िहान विधानसभाएं हैं. 2001 की जनगणना के मुताबिक मिर्जापुर की आबादी 24,96,970 लाख रही, जिसमें पुरुषों 13.1 लाख महिला 11.8 लाख थीं. इस लोकसभा क्षेत्र में निषाद और पटेल जातियों का प्रभाव माना जाता है. इससे सवर्ण वोटरों की भी यहां निर्णायक भूमिक है.

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