मिर्जापुरः स्पोर्ट्स स्टेडियम निर्माण में हुई व्यापक धांधली, जांच में हुआ खुलासा

आरटीआई कार्यकर्ता ने शिकायत में आरोप लगाया गया कि कार्यदायी संस्था ने निर्माण लागत के अलावा 1.97 करोड़ रुपए और आहरित करवाकर उसे स्टेडियम निर्माण के नाम पर दिखा दिया. यानी प्रस्तावित स्पोर्ट्स स्टेडियम निर्माण में अब तक दोगुना रकम खर्च हो चुका है, लेकिन अभी तक स्टेडियम का निर्माण पूरा नहीं हो सका है

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 31, 2018, 11:36 PM IST
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Updated: July 31, 2018, 11:36 PM IST
मिर्ज़ापुर जिले में मंगलवार को टीएसी जांच में 396.65 करोड़ की लागत से बन रहे स्पोर्ट्स स्टेडियम में बड़ी धांधली का खुलासा हुआ है. एक आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीएसी को जांच का आदेश दिया था. जांच में पता चला है कि स्टेडियम निर्माण में व्यापक रूप से धांधली हुई है. जांच में खुलासा हुआ है कि कि स्पोर्ट्स स्टेडियम के निर्माण में कुल 16, 732, 248 रुपए की धांधली की गई है.

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रिपोर्ट के मुताबिक टीएसी जांच में दोषी पाए गए अवर अभियंता सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता को सीधे तौर पर दोषी माना गया है और दोनों अधिकारियों के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही करते हुए धनराशि की वसूली का आदेश दिया गया है. साथ ही, कार्यदायी संस्था पैक्सफेड को जो धनराशि मुहैया कराई गई है उक्त धनराशि से स्टेडियम के निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिया गया है. मामले में उच्च स्तर के अधिकारियों पर भी पर्यवेक्षण व नियंत्रण नहीं करने का दोषी पाया गया है.

गौरतलब है नक्सल प्रभावित क्षेत्र मिर्ज़ापुर के जसौहर पहाड़ी में बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए वर्ष 2012 में स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरु किया गया था. स्पोर्ट्स स्टेडियम की निर्माण लागत कुल 2 करोड़ 12 लाख रुपए थी. खेल निदेशालय ने स्टेडियम निर्माण का जिम्मा पैक्सफेड नामक कार्यदाई संस्था को सौंपा गया था. निर्देश के मुताबिक वर्ष 2013 में स्टेडियम का निर्माण पूरा होना था, लेकिन शुरू से ही कार्यदायी संस्था ने निर्माण में धांधली शुरू कर दी थी.

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मामले का खुलासा तब हुआ जब इरसाद अली नामक एक आरटीआई कार्यकर्ता ने वर्ष 2012 में स्टेडियम निर्माण में चल रही धांधली का खुलासा करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मामले की शिकायत की, लेकिन तब कोई कार्यवाही नहीं हुई, लेकिन योगी आदित्यनाथ के सूबे के मुख्यमंत्री बनने के बाद आरटीआई कार्यकर्त्ता ने दोबारा स्टेडियम निर्माण में हो रही धांधली की शिकायत की.

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आरटीआई कार्यकर्ता ने शिकायत में आरोप लगाया गया कि कार्यदायी संस्था ने निर्माण लागत के अलावा 1.97 करोड़ रुपए और आहरित करवाकर उसे स्टेडियम निर्माण के नाम पर दिखा दिया. यानी प्रस्तावित स्पोर्ट्स स्टेडियम निर्माण में अब तक दोगुना रकम खर्च हो चुका है, लेकिन अभी तक स्टेडियम का निर्माण पूरा नहीं हो सका है और अधिकारियों कर्मचारियों की मिली भगत से पैसे का बन्दर बांट कर लिया गया.

(रिपोर्ट-सुमित गर्ग, मिर्जापुर)
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