OPINION: यूपी में महागठबंधन के बीच बढ़ रहा अविश्वास!

पिछले साल बेंगलुरु में एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण में विपक्षी एकता की तस्वीर 12 महीने से भी कम समय में खासकर यूपी में, बिखर गई है जहां से लोकसभा में 80 सांसद जाते हैं.

News18Hindi
Updated: March 15, 2019, 2:22 PM IST
OPINION: यूपी में महागठबंधन के बीच बढ़ रहा अविश्वास!
मायावती, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की फाइल फोटो
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Updated: March 15, 2019, 2:22 PM IST
सुमित पांडे आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के प्रत्याशियों की दो सूचियां जारी की है. हालांकि इससे बसपा और कांग्रेस के बीच अविश्वास बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. कांग्रेस की सीटों और प्रत्याशियों की पसंद दो चीजें साफ करती है. पहला, ये कि इस बार पार्टी अपनी ताकत और कमजोरी के दम पर यूपी में चुनाव लड़ेगी और न कि सिर्फ सपा-बसपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए. दूसरा, कांग्रेस को यह भी लगता है कि बीजेपी को टक्कर देने के लिए उसे सपा-बसपा के समान ही वोट शेयर हासिल करना होगा. राजनीतिक हलकों में, दो व्यापक विचार या सिद्धांत घूम रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए सबसे अच्छी रणनीति क्या हो सकती है. कुछ लोगों का मानना है कि  बीजेपी के वोट हासिल करने के लिए , कांग्रेस और महागठबंधन ने अलग-अलग प्रत्याशियों को उतारा है.

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उदाहरण के लिए, यदि सपा-बसपा कानपुर में एक गैर-मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारे, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल जीते थे तो यह कांग्रेस के लिए फायदेमंद होगा.  कांग्रेस फूलपुर या फर्रुखाबाद में एक मजबूत उच्च जाति का उम्मीदवार उतारती है तो यह गठबंधन की मदद करेगा. इस सिद्धांत के मतदाता 2017 के विधानसभा चुनावों का हवाला देते हैं, जब कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन में केवल 100 सीटों पर चुनाव लड़ा था. यह भी पढ़ें: 2019 में फिर से सत्ता पर काबिज होगी NDA: न्यूज़ 18 सर्वे कहा जाता है कि बाकी 300 सीटों पर कांग्रेस के वोट भाजपा में चले गए. विपक्षी खेमे में एक राजनीतिक सोच यह भी है कि भाजपा ने राज्य की राजनीति में उन दोषों को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, जो सपा और बसपा द्वारा अपनाई गई पहचान की राजनीति के माध्यम से बनीं थीं. इस समय मतदाता को मोटे तौर पर मोदी विरोधी बनाम मोदी समर्थक वोटों के एक सरल रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है. ऐसे में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विरोधी वोटों की बड़ी संख्या जुटानी होगी. यह तभी हो सकता है जब सभी तीनों दल गठबंधन करें.
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यह भी पढ़ें:  न्यू जीलैंड आतंकी हमला: ऑकलैंड में पुलिस ने नष्ट किए दो बम कांग्रेस से टिकट मिलने की उम्मीद लगाए एक नेता ने कहा, 'हमें यूपी में भाजपा और उसके मतदाताओं को दिखाना होगा कि वे भारी भीड़ के खिलाफ हैं और इस गठबंधन को हराना नामुमकिन है. यह एक मनोवैज्ञानिक संदेश जाना चाहिए था.' यह भी पढ़ें: भारत को मिली बड़ी सफलता, मसूद अजहर की सारी प्रॉपर्टी जब्त करेगा फ्रांस महागठबंधन में शामिल होने में कांग्रेस की दिलचस्पी पिछले सप्ताह तक पार्टी के नेताओं के बयानों से स्पष्ट थी. अपनी पहली सूची में, कांग्रेस ने सीटों की अपनी पहली पसंद बताई जिसे वह गठबंधन के हिस्से के रूप में लड़ना चाहेगी. यह भी पढ़ें:  कांग्रेस ने की चुनाव आयोग से की शिकायत कहा पेट्रोल पंप से हटाई जाएं पीएम मोदी की होर्डिंग्स एक कांग्रेस नेता ने कहा, 'जब अन्य लोग बोलने से डरते थे, तब हमने इस सरकार पर भ्रष्टाचार, उसके आर्थिक प्रदर्शन और अन्य सामाजिक संकेतकों पर हमला किया. हमने राफेल का मुद्दा उठाया, हमने जीएसटी और नोटबंदी पर सवाल किया.' यह भी पढ़ें:  कई दिनों तक भारत में घूमता रहा, दिल्ली के होटल अशोक और जनपथ में रुका था अज़हर मसूद.. कुछ नेताओं का दावा है कि सपा-बसपा के गठबंधन से पहले की शर्त के चलते कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखा गया है. बीएसपी के बयान ने मंगलवार को यूपी में कांग्रेस के साथ किसी भी तरह का गठबंधन न करने का फैसला किया और अन्य राज्यों में गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने की संभावना को खारिज कर दिया. यह भी पढ़ें:  पाक रेल मंत्री के आतंकी बोल , कहा- करतारपुर का नाम खालिस्तान स्टेशन होना चाहिए बीएसपी के अंदरूनी सूत्रों ने हाल के घटनाक्रमों के लिए एक अलग व्याख्या की है. उन्हें लगता है कि उनकी पार्टी कांग्रेस को कुछ ब्याज के साथ उसे उसका ही किया वापस कर रही है. यह भी पढ़ें:  21 विपक्षी दलों की याचिका पर VVPAT को लेकर SC ने EC को दी नोटिस बसपा नेता ने कहा, 'एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में, हमें बताया गया कि कांग्रेस के वोट को बसपा में ट्रांसफर  नहीं होंगे. फिर यूपी में ऐसा होने की क्या संभावना है? कांग्रेस ने 2014 में दो सीटें जीतीं और विधानसभा में उसके सात विधायक थे. उस गणित से, बसपा ने अमेठी और रायबरेली को पार्टी के लिए छोड़ दिया है.' यह भी पढ़ें: स्पॉट फिक्सिंग: क्रिकेटर श्रीसंत को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हटाया लाइफ बैन गुरुवार को प्रियंका गांधी वाड्रा का भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद से मिलना, यूपी में कांग्रेस की मंशा और प्रयासों का एक स्पष्ट संकेत थी. मायावती ने पिछले साल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आजाद और उनके समूह को बसपा और दलित आंदोलन को चुनावी तौर पर नुकसान पहुंचाने के लिए विरोधियों की कारगुजारी बताया था. यह भी पढ़ें: न्यूजीलैंड हमला: हमलावर फेसबुक पर 17 मिनट तक दिखाता रहा दहशत का मंज़र यूपी के लिए उम्मीदवारों की अपनी पहली दो सूचियों में कांग्रेस ने पूर्व सांसदों और प्रमुख अल्पसंख्यक नामों को मैदान में उतारा है जो सीधे सपा-बसपा के उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनमें से कुछ उम्मीदवारों ने पिछले लोकसभा चुनावों में दो लाख से अधिक वोट हासिल थे. यह भी पढ़ें: अमृतसर में रात को हुए धमाकों के पीछे ये थी वजह, पाक को मुंहतोड़ जवाब देने की हो रही थी तैयारी पिछले साल बेंगलुरु में एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण में विपक्षी एकता की तस्वीर 12 महीने से भी कम समय में खासकर यूपी में, बिखर गई है  जहां से लोकसभा में 80 सांसद जाते हैं. यह भी पढ़ें:  PHOTOS: हेलमेट लगाकर मस्जिद में घुसा शख्स, नमाज़ियों पर ताबड़तोड़ बरसाईं गोलियां एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
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