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Moradabad News: इस संस्था ने महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, बच्चें भी हो रहे जागरूक

UP News: मुरादाबाद में ऑल इंडिया वूमेन कॉन्फ्रेंस न्यू दिल्ली की एक संस्था चल रही है. जो लगभग 6000 महिलाओं को प्रशिक्षण ...अधिक पढ़ें

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    रिपोर्ट:-पीयूष शर्मा

    मुरादाबाद में ऑल इंडिया वूमेंस कॉन्फ्रेंस न्यू दिल्ली की संस्था चल रही है. यह संस्था मुरादाबाद में करीब 20 वर्ष पहले शुरू की गई थी. संस्था में रीता सिंह को अध्यक्ष नामित किया गया था. रीता सिंह की टीम में करीब 700 लोग शामिल हैं.जिसमें 40 लोग पूरी तरह से एक्टिव हैं. यह संस्था गरीब महिलाओं लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तरह-तरह के 20 प्रशिक्षण चला रही है. जिसकी मदद से महिलाएं व बेटियां आत्मनिर्भर बन रही हैं.

    इस संस्था ने मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों गलियों में घूमने वाले बच्चों अनपढ़ बच्चों को शिक्षित करने का काम किया है. संस्था द्वारा करीब 6000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है. जो जगह-जगह कार्य कर अपना पालन पोषण कर रही हैं. इसके साथ ही 75 अनपढ़ बच्चों को शिक्षा देकर रोजगार उपलब्ध कराया है. जो जगह-जगह अपना कार्य कर पालन पोषण कर रहे हैं. संस्था में गरीब और मलिन बस्तियों में रहने वाली महिलाओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है. मुफ्त में प्रशिक्षण दिया जाता है. इसके साथ ही गरीब बच्चों पढ़ने लिखने खाने-पीने ड्रेस का सारा खर्चा संस्था ही करती है.

    जागरूक करने का प्रयास
    ऑल इंडिया वूमेन कॉन्फ्रेंस न्यू दिल्ली मुरादाबाद की संस्थापिका एवं अध्यक्ष ने न्यूज 18 लोकल से खास बातचीत करते हुए बताया. मैंने 2002 में इस संस्था को प्रारंभ किया था. इसमे हम गरीब मलिन बस्तियों में व गांव में ऐसे लोगों का विकास करने का प्रयास करते है. उन्हें जागरूक करने का प्रयास करते है. जो बच्चे गलियों में घूमते है, गालियां देते है, चोरी करना सीखते है, इधर उधर घूमते रहते है. पढ़ने नहीं जाते है, उनका हम सुधार करते है. हमने अब तक करीब 75 ऐसे बच्चो को सुधारकर स्कूल में एडमिशन दिलाया है. स्कूल में वो बच्चे पढ़ने लगे थे. और अब वह कामयाब हो गए हैं.

    कोई मकैनिक बन गया है, कोई दुकानों पर लग गया है, तो कोई स्कूटर मोटर मैकेनिक का कार्य कर रहा है. उन्होंने बताया की इन्हें कामयाब करके बड़ी खुशी होती है. यह वही बच्चे हैं जो ना पढ़ते थे, ना लिखते थे, गलियों में घूमते फिरते रहते थे और गालियां देते रहते थे. इसी तरह गरीब लड़कियों को स्वावलंबी बनाने के लिए 20 प्रशिक्षण अब तक दिए है. जिसमे करीब 5 से 6 हजार लड़कियां और महिलाएं हमारे इन प्रशिक्षणों को प्राप्त करके स्वरोजगार से जुड़ गई हैं. अपने-अपने काम कर रही हैं.

    अब तक दिए गए ये 20 प्रशिक्षण
    संस्था में 2002 से अब तक महिलाओं को 20 प्रशिक्षण सिलाई, ब्यूटी प्रशिक्षण, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, फैशन डिजाइनिंग, टेडी बियर मेकिंग, कपड़े के थैले, मॉम के दिए, मिट्टी के दीए की सजावट, वैक्स कैंडल, ऑल इंडिया वूमेन कांफ्रेंस के थैले, दिवाली पर दिए करवा की सजावट, अखबार से थैलियां बनाना, रुई की बत्ती का प्रशिक्षण, मेकरम प्रशिक्षण, क्विप्ड वर्क, माक्स प्रशिक्षण, गाय के गोबर के दिए सांबरानी कप, सर्फ साबुन बनाना, क्राफ्ट वर्क, कंप्यूटर प्रशिक्षण सहित आदि प्रशिक्षण दिए जा चुके हैं.

    प्रशिक्षण लेकर बनी शिक्षिका, अब दे रही प्रशिक्षण
    ऑल इंडिया वूमेन कॉन्फ्रेंस से जुड़ी भावना सक्सेना ने बताया. मुझे इस संस्था के बारे में जैसे ही पता लगा था इससे जुड़ गई थी. मैं करीब 20 साल से इस संस्था से जुड़ी हूं. संस्था में जुड़ते ही मैंने पहले तो ब्यूटीशियन का कोर्स सीखा. उसके बाद मैंने करीब दो से तीन हजार लड़कियों को प्रशिक्षण दिया. जिनमे किसी ने पार्लर खोले किसी ने सेंटर खोले. आज भी मेरा प्रशिक्षण का सेंटर चल रहा है. मैं प्रशिक्षण लेकर आज इतनी सक्षम हुई हूं कि खुद प्रशिक्षण दे रही हूं. अभी संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हूं. यह बहुत ही अच्छी महिलाओं की संस्था है.

    संस्था से जुड़ी सुधा त्रिपाठी ने बताया कि मैं 2005 से इसमे विद्यार्थी के रूप में जुड़ी थी. उसके बाद आज मैं खुद टीचर बन गई हूं. बच्चो को पढ़ाया इसके साथ ही महिलाओं को भी पढ़ाया और आज उसी संस्था में मैं जॉइन सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत हूं. करीब 200 बच्चों एवं 50 प्रौढ़ शिक्षा की महिलाओं को प्रशिक्षित कर चुकी हूं. प्रौढ़ महिलाओं को मैंने ऐसा रोजगार दिया. जो स्वयं अपना रोजगार खोल सके. जैसे साबुन बनाना, सर्फ बनाना, मोमबत्ती बनाना इस तरह का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है. आज वह यह सब सीखकर अपना अपना कार्य कर रही हैं.

    Tags: Moradabad News, UP news

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