COVID-19 से बैंड बाजा कारोबारी भी परेशान, बग्घी के घोड़ों को बेचने का किया फैसला
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COVID-19 से बैंड बाजा कारोबारी भी परेशान, बग्घी के घोड़ों को बेचने का किया फैसला
शादियों के सीजन में नहीं रह गई है घोड़ों की डिमांड . (फाइल फोटो)

बैंड-बाजा कारोबारी मास्टर रज्जन का कहना है कि Lockdown से हालत इतनी खराब हो गई है कि चाय पीने से पहले भी बार-बार सोचना पड़ता है. रज्जन बताते हैं कि बग्गी में लगने वाले घोड़ों की कीमत लाखों में होती है लेकिन लाखों रुपए की कीमत के इन घोड़ों को पालना ही अब मुश्किल हो गया है.

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मुरादाबाद. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Pandemic coronavirus) और उसके बाद लॉकडाउन (Lockdown) ने सबसे बड़ी समस्या छोटे कारोबारियों के सामने पैदा कर दी है. ऐसा ही कुछ हाल बैंड बाजा कारोबार का है. अकेले मुरादाबाद में ही इस कारोबार से लगभग 2 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं. आम दिनों में शादियों के सीजन (Weddings season) में लोग बैंड बाजा, लाइट, घोड़ा बग्घी, जनरेटर वगैरह खूब बुक करते हैं लेकिन कोरोना वायरस से बचाव के लिये सामाजिक दूरी (social distancing) की गाइडलाइंस की वजह से अब शादियां सादगी से हो रही हैं. जिसकी वजह से यह लोग बेरोजगार हो गए हैं. हालात ऐसे हैं कि लाखों रुपये की कीमत के पालतू घोड़े का भी ठीक से पेट भर पाना मुश्किल हो गया है. अब इन कारोबारियों ने घोड़ा बेचने के लिए कोशिश शुरु कर दी है लेकिन अब घोड़ों के खरीदार भी नहीं मिल रहे हैं.

लगभग ढ़ाई हजार लोग बेरोजगार
बैंड बाजा कारोबारियों के लिए साल में 4 महीने सबसे ज्यादा फायदेमंद होते हैं लेकिन इन्हीं चार महीनों में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लागू हो गया. लाॅकडाउन के कारण मुरादाबाद में बैंड बाजा कारोबार से जुड़े लगभग ढ़ाई हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं. कारोबारियों के पास काम न होने की वजह से अधीनस्थ काम करने वालों को तनख्वाह देने में भी दिक्कत आ रही है.

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भुखमरी जैसे हैं हालात


बैंड-बाजा कारोबारी मास्टर रज्जन का कहना है कि हालत इतनी खराब हो गई है कि चाय पीने से पहले भी बार-बार सोचना पड़ता है. रज्जन बताते हैं कि बग्गी में लगने वाले घोड़ों की कीमत लाखों में होती है लेकिन लाखों रुपए की कीमत के इन घोड़ों को पालना ही अब मुश्किल हो गया है. एक घोड़े को पौष्टिक खाना खिलाने में प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 300 से 600 रुपये खर्च होते हैं लेकिन काम न होने की वजह से इन्हें सिर्फ घास खिलाई जा रही है, जिसकी वजह से घोड़े दुबले होते जा रहे हैं. घोड़ा मालिक का कहना है कि अपने घर वालों का पेट पालें या फिर जानवरों का ये एक बड़ा कठिन सवाल सामने है, इसलिए मजबूरी में उन्होंने घोड़े बेचने का मुश्किल फैसला किया है लेकिन दिक्कत तो ये है कि बग्गी में लगने वाले इन घोड़ों को कोई खरीद भी नहीं रहा है. घोड़ों के साथ लगने वाली बग्गियों में भी महीनों से खड़े होने के कारण धूल जम रही है. खुशी के पलों में बाजा बजाने वाले आर्टिस्ट बीएफ बाजों को सैनिटाइजर से चमका कर रख रहे हैं लेकिन इनकी भी बाजार में कोई पूछ नहीं है. अगर आने वाले महीनों में भी कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लागू रहा तो बैंड बाजा कारोबार से जुड़े ढ़ाई हजार लोगों के आगे भुखमरी के हालात और ज्यादा गंभीर हो जाएंगे. (रिपोर्टर-फरीद शम्शी)
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