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Moradabad: ये ट्रस्ट नेत्रहीनों को बना रहा आत्मनिर्भर, मिल रही बेहतर शिक्षा

मुरादाबाद में सीएल गुप्ता चैरिटेबल ट्रस्ट एंड इंस्टिट्यूट नेत्रहीन व दृष्टिहीन बच्चो को शिक्षा दे रहा है. उसके साथ ही आ ...अधिक पढ़ें

    पीयूष शर्मा/मुरादाबाद. कुछ लोग अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए समर्पित कर देते हैं. खुद से ज्यादा दूसरे के लिए काम करके उनका ध्यान रखना कुछ लोगों के जीवन का हिस्सा होता है. मुरादाबाद की शिखा गुप्ता पिछले 22 साल से नेत्र रोशनी, नेत्र ट्रांसप्लांट, नेत्र ज्योति जागरण के लिए काम कर रही हैं. नेत्र दान को लेकर उनकी मुहिम की वजह से अब तक करीब 3 हजार से अधिक लोगों को नेत्र मिले. तो वहीं 3 लाख से ज्यादा लोगों को आंखों के ऑपरेशन भी उनके द्वारा कराए गए है.

    कई बार नेत्रहीन लोग अपने आप को कमजोर महसूस करते हैं. लेकिन शिखा गुप्ता की मुहिम से ऐसे कई नेत्रहीन लोगों को सहारा मिला है. शिखा दो तरह से इन लोगों की मदद करती हैं. पहले उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करती हैं. इनकी ट्रेनिंग करवाती है. ताकि इन लोगों को रोजगार मिल सके. दूसरा नेत्र दान के जरिए इन लोगों की आंखों की रोशनी लौटा कर. ताकि इन लोगों को वापस से एक नई जिंदगी मिल सके. शिखा गुप्ता का सीएल गुप्ता चैरिटेबल ट्रस्ट एंड आई इंस्टिट्यूट है. जिसमें वह नेत्रहीन और दृष्टिहीन बच्चों को शिक्षा ग्रहण करा रही हैं और इसके साथ ही बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर रोजगार का अवसर प्रदान करा रही हैं.

    13 साल से कर रही हैं ये नेक काम
    सीएल गुप्ता चैरिटेबल ट्रस्ट एंड इंस्टिट्यूट की मालिक शिखा गुप्ता ने न्यूज-18 लोकल से खास बातचीत करते हुए बताया कि 2009 में उन्होंने स्नेह नेत्र संस्थान की नींव रखी थी. इस प्रोजेक्ट के तहत नेत्रहीन और दृष्टिहीन बच्चों को शिक्षा देने का और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही हैं. शिखा गुप्ता का कहना है कि हमारे ट्रस्ट के माध्यम से 7 लोगों को दृष्टि हीनता के उपकरण दिए गए. उनकी ट्रेनिंग उन्हें दी गई. जिसे लेने के बाद उन्होंने पढ़ाई की और वह पढ़ाई करने के बाद आज आत्मनिर्भर हो गए हैं.

    आत्मनिर्भर बन कर रहे सरकारी नौकरी
    शिखा गुप्ता ने बताया कि दृष्टिहीन बच्चों को उपकरण का प्रयोग कर सिखाया गया. जिनमें तीन लोग अध्यापक की जॉब कर रहे हैं. तीन लोग क्लर्क हैं और एक व्यक्ति बैंक में कार्यरत है. वर्तमान में ट्रस्ट के माध्यम से टोटल 11 लोग हैं. जिसमें से 7 लोग ब्रेल से शिक्षा ले रहे हैं और 4 बच्चे वोकेशनल ट्रेनिंग में है. बहुत से बच्चे ऐसे हैं जो काम को सीख कर अपने घर पर ही कार्य कर रहे हैं. अब तक संस्था द्वारा करीब 20 बच्चे आत्मनिर्भर बनाए जा चुके हैं. जो अपने पैरों पर खड़े हैं.

    बच्चों को आगे लाने की अपील
    शिखा गुप्ता ने कहा कि बहुत हिम्मत करके इस पहल को शुरू किया है. मैं उम्मीद करती हूं कि इसको इसी तरह ऊंचाइयों तक ले जाया जाएगा. शिखा गुप्ता ने सभी से अपील की है कि इस तरह के लोग हिम्मत ना हारे ऐसे लोग आगे आए. इसके साथ ही माता-पिता को भी ऐसे बच्चों को आगे लाना चाहिए. जिससे बच्चों का भी मोटिवेशन बड़े और बच्चों के अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा आ सके.

    नेत्रहीन बच्चों को दे रहे शिक्षा
    नेत्रहीन बच्चों को शिक्षा ग्रहण करा रही शिक्षिका विनी कुमारी ने न्यूज 18 लोकल को बताया कि वह पैदाइशी नेत्रहीन है और ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है. उन्होंने बताया की मैंने ब्रेल लिपि के माध्यम से दिल्ली में शिक्षा ग्रहण की थी. वहां से शिक्षा ग्रहण कर आज मैं इन बच्चों को उसी शिक्षा के माध्यम से पढ़ा रही हूं और सिखा रही हूं. इसके साथ ही स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से वह कंप्यूटर और मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर लेती हैं. बच्चों को भी इसका इस्तेमाल सिखाती हैं.

    जानिए क्या कहते हैं शिक्षा ग्रहण कर रहे नेत्रहीन बच्चे
    शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों में आमिर ने बताया कि 15 साल पहले से उन्हें दिखना बंद हो गया था. अब वह पिछले 3 महीने से यहां पर पढ़ाई कर रहा है.अर्पित कुमार ने बताया कि वह पिछले 6 महीने से यहां पड़ रहा है.

    ट्रस्ट के माध्यम से बने आत्मनिर्भर
    सीएल गुप्ता चैरिटेबल ट्रस्ट एंड आई इंस्टिट्यूट से सीखकर आत्मनिर्भर बनकर कार्य कर पैसा कमा रहे विक्रम ने बताया कि वह पिछले 6 महीने से यहां आते हैं. यहां आकर वह वोकेशनल का काम सीख चुके हैं. उनका कहना है कि यहां पर शिक्षा बहुत अच्छी मिलती है. इसके अलावा वह यहीं से काम सीख कर आत्मनिर्भर बने हैं. अब यहीं पर कार्य कर 6 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रहा है.

    Tags: Moradabad News, Uttar pradesh news

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