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मुरादाबाद पुलिस की दबंगई, अवैध वसूली का विरोध करने वाले को पीटा

मुरादाबाद पुलिस की दबंगई, अवैध वसूली का विरोध करने वाले को पीटा

प्रदेश सरकार और पुलिस महकमे से जुड़े अधिकारी भले ही पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को अनुशासन में रहने की नसीहत देते हों, लेकिन खाकी के नशे में चूर पुलिस अधिकारी हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे।

प्रदेश सरकार और पुलिस महकमे से जुड़े अधिकारी भले ही पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को अनुशासन में रहने की नसीहत देते हों, लेकिन खाकी के नशे में चूर पुलिस अधिकारी हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे।

प्रदेश सरकार और पुलिस महकमे से जुड़े अधिकारी भले ही पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को अनुशासन में रहने की नसीहत देते हों, लेकिन खाकी के नशे में चूर पुलिस अधिकारी हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे।

प्रदेश सरकार और पुलिस महकमे से जुड़े अधिकारी भले ही पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को अनुशासन में रहने की नसीहत देते हों, लेकिन खाकी के नशे में चूर पुलिस अधिकारी हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे।

ताजा मामला मुरादाबाद जनपद का है, जहां आला पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के चलते एक दरोगा ने खुलेआम अवैध वसूली कर रहा था और वसूली का विरोध करने वाले लोगों को जमकर भी पीट भी रहा था। एक सप्ताह पहले एक फेरी लगाने वाले युवक को पैसे मांगने पर पीटने वाले लाजपतनगर चौंकी इंचार्ज पर एक और आरोप लगा है।

क्षेत्र के प्रभात मार्केट के पास रहने वाले पंजाबी तड़का होटल के संचालक मोनू ठाकुर का आरोप है कि लाजपतनगर चौकी इंचार्ज पिछले कई महीनों से अवैध वसूली कर रह थे। होटल चलाने के नाम पर तीन हजार रुपए की वसूली की जा रही थी। एक सप्ताह पहले जब मोनू ने जब इसका विरोध किया तो दारोगा ने होटल जमकर तोड़-फोड़ की और संचालक मोनू को जमकर पीटा।

आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से आरोपी दरोगा ने पांच हजार रुपए की मांग शुरु कर दी थी। मोनू ने जब पैसे देने से इंकार किया तो दरोगा राजन शर्मा की इस करतूत की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी गई। इसके बाद पूरे मामले की जांच सीओ कटघर को सौंप दी गई है।

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लाजपतनगर चौकी इंचार्ज राजन शर्मा और सिपाही विवेक पर इससे पहले भी दुकानदारों से अवैध वसूली करने के आरोप लग चुके हैं। बावजूद इसके मुरादाबाद जनपद में तैनात आला पुलिस अधिकारियों के संरक्षण में आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी हैं की क्या पुलिस के आला अधिकारी आरोपी दरोगा और सिपाही की खुलेआम वसूसी की जांच रिपोर्ट महज पूरे मामले में पर्दा डालने की कवायद तो नहीं?

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