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मुरादाबाद: प्राइवेट स्कूलों ने गेट पर लगाए बैनर- नो फीस, नो एग्जाम, शुरू हुआ बवाल

मुरादाबाद के प्राइवेट स्कूलों ने गेट पर लगाए बैनर, नो फीस नो एग्जाम.
मुरादाबाद के प्राइवेट स्कूलों ने गेट पर लगाए बैनर, नो फीस नो एग्जाम.

मुरादाबाद (Moradabad):अभिभावकों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान बंद समय की भी फीस स्कूल वाले मांग रहे हैं. अभी उनके पास फीस है नहीं. वह स्कूल प्रशासन से यह कह रहे हैं कि उनको फ़ीस में छूट दी जाए और थोड़ा-थोड़ा करके फीस जमा कराई जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 6:47 PM IST
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फरीद शम्सी

मुरादाबाद. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (Moradabad) में बुधवार को प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों ने विरोध जताया. अभिभावकों का कहना है कि निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल एसोसिएशन (Private English Medium School Association ) ने स्कूलों के गेट पर यह बैनर लगा दिए हैं कि नो फ़ीस, नो एग्जाम. अभिभावकों का आरोप है कि लॉकडाउन के दौरान बंद समय की भी फीस स्कूल वाले मांग रहे हैं. अभी उनके पास फीस है नहीं. वह स्कूल प्रशासन से यह कह रहे हैं कि उनको फ़ीस में छूट दी जाए और थोड़ा-थोड़ा करके फीस जमा कराई जाए.

अभिभावक लगातार कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन



अभिभावकों का कहना है कि लेकिन मुरादाबाद के निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल एसोसिएशन की अध्यक्ष संतराम का साफ कहना है कि अगर स्कूल की पूरी फीस जमा नहीं की गई तो एग्जाम में बैठने नहीं दिया जाएगा और ना ही आगे प्रमोशन हो पाएगा. इसलिए सभी को फीस जमा करनी होगी. बता दें इससे पहले भी अभिभावक मशाल जुलूस निकालकर और थाली ताली बजाकर भी स्कूल फीस में छूट देने की मांग कर चुके हैं, आरोप है कि लॉकडाउन के दौरान की फीस स्कूल वाले उनसे मांग रहे हैं.
प्राइवेट स्कूलों ने ये लिया है निर्णय

दरअसल मुरादाबाद के प्राइवेट इंग्लिश स्कूल एसोसिएशन ने बैठक कर यह निर्णय लिया है कि लॉक डाउन के दौरान जिन बच्चों की फीस स्कूल में जमा नहीं हुई थी, अब वह अगर स्कूल वापस आएंगे तो उनको पहले एग्जामिनेशन देना पड़ेगा और एग्जामिनेशन देने के लिए उनको फीस जमा करनी पड़ेगी. अगर वह फीस नहीं देंगे तो उनका प्रमोशन नहीं होगा.



50 प्रतिशत बच्चों की फीस न आने से पड़ा काफी असर: स्कूल एसोसिएशन

स्कूल एसोसिएशन की अध्यक्ष संतराम ने साफ शब्दों में कहा है कि स्कूल चलाने में काफी खर्च होता है. पिछले वर्ष कोई फीस जमा नहीं हुई है. लगभग 50% बच्चों की फीस ना आने से काफी असर पड़ा है. कोरोना वायरस के चलते केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था. लॉकडाउन के दौरान सब कुछ बंद होने से लोगों की आमदनी पर भी असर पड़ा था. इस दौरान लोगों ने स्कूल बंद होने की वजह से फीस भी जमा नहीं की थी लेकिन फिर भी बाद में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई थी.

अब मुरादाबाद के निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल एसोसिएशन ने आज एक बैठक कर ये निर्णय लिया है कि अब जो बच्चे वापस स्कूल आ रहे हैं, उन्हें लॉक डाउन के समय की फीस जमा करनी पड़ेगी, तभी उनको वापस एडमिशन लिया जाएगा और उनका प्रमोशन होगा. अगर वह फीस जमा नहीं करते हैं तो उनका प्रमोशन हरगिज़ नही होगा, निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल के निर्णय के बाद अब उन लोगों के सामने समस्या खड़ी हो जाएगी जो यह सोच रहे थे कि लॉकडाउन के दौरान बंद स्कूलों के समय की फीस उन्हें जमा नहीं करनी होगी.

अभिभावकों की समस्या पर अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है

मुरादाबाद के लगभग सभी निजी इंग्लिश मीडियम स्कूलों ने अपने गेट पर यह लिखकर लगा दिया है कि नो फीस, नो एग्जाम, नो प्रमोशन. इसकी जानकारी जब अभिभावकों को मिली तो आज उन्होंने स्कूल के गेट पर खड़े होकर स्कूल प्रशासन से मिलना चाहा लेकिन आज गुरु गोविंद जयंती होने की वजह से स्कूल प्रशासन की तरफ से किसी की स्कूल प्रशासन से वार्ता नहीं हो पाई. अभिभावकों का कहना है कि वह इस मामले में कई बार आला अधिकारियों को भी अवगत करा चुके हैं लेकिन कोई भी अधिकारी अभिभावकों की समस्या को गंभीरता से लेकर समाधान नहीं किया है. अब वो इस मामले न्यायालय से मदद की अपील करेंगे.

अभिभावक कोऑपरेट करें

चेयरमैन, विलसोनिया एजुकेशन ट्रस्ट की चेयरमैन मैडम संतराम का कहना है कि यह हमारे प्राइवेट इंग्लिश स्कूल की मीटिंग थी. तय हुआ है कि अगर बच्चे स्कूल वापस आएंगे तो उनको एग्जामिनेशन देना पड़ेगा. एग्जामिनेशन देने के लिए उनको फीस देनी पड़ेगी. अगर वह फीस नहीं देंगे तो उनका प्रमोशन हरगिज़ नहीं होगा. आल इंग्लिश मीडियम प्राइवेट स्कूल ने यही स्लोगन डिसाइड करा है, नो फीस, नो एग्जामिनेशन, नो प्रोमोशन. उन्होंने कहा कि लास्ट ईयर बहुत प्रॉब्लम आई हैं. फीस जमा नहीं हुई है. अभी भी मेरे ख्याल से 50% बच्चों की फीस स्कूल फीस नहीं आई है. अब यही उम्मीद है कि पैरेंट्स को कोऑपरेट करके फीस प्रॉपर्ली जमा कर दें और स्कूल नॉर्मल चलें. यह अकेले तो हम चला नहीं सकते हैं.

उन्होंने कहा कि पेरेंट्स और बच्चों के कोऑपरेशन के साथ स्कूल चल सकता है, यह तो प्राइवेट स्कूल का मुद्दा रहा है और प्राइवेट स्कूल के प्रिसिंपल ने अभी डिसाइड किया है. इससे प्रशासन का कोई मतलब ही नहीं है. यह तो हम लोगों की अपनी पॉलिसी है. अपने डिसीजन हैं. हां, हम प्रशासन को अंधेरे में नहीं रखते हैं. सब उनको बता ही देते हैं. यही कहना चाहते हैं कि बच्चों को आगे बढ़ने के लिए एजुकेशन की बहुत जरूरत है इसलिए सब मिलकर के बच्चों को स्कूल वापस भेजें और स्कूल की जो रिक्वायरमेंट हैं, बुक लेकर आओ फीस पे करो यह बहुत जरूरी है.
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