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यूपी के इस गांव में 'शबनम' नाम का खौफ, जानिए क्या है मामला

सत्तार अली और ग्राम प्रधान मोहम्मद नवी

सत्तार अली और ग्राम प्रधान मोहम्मद नवी

14-15 अप्रैल 2008 की रात शबनम ने सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार की हत्या कर दी. इस घटना को दस साल बीत गए हैं लेकिन गांव के लोग उस घटना को आजतक नहीं भूले.

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उत्तर प्रदेश के अमरोहा से महज 20 किलोमीटर दूर बावन खेड़ी गांव. जहां 'शबनम' आठ महीने के बच्चे सहित दस लोगों की हत्या करने के मामले में दस साल से जेल में है. शबनम और सलीम के बीच प्रेम संबंध था. शबनम सूफी परिवार की थी. उनके परिवार के पास काफी जमीन थी. वहीं सलीम पांचवीं फेल था और पेशे से एक मजदूर था. इसलिए दोनों के संबंधों को लेकर परिजन विरोधकर रहे थे. 14-15 अप्रैल 2008 की रात शबनम ने सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार की हत्या कर दी. इस घटना को दस साल बीत गए हैं लेकिन गांव के लोग उस घटना को आजतक नहीं भूले. गांव का कोई भी व्यक्ति अपनी बेटी का नाम शबनम नहीं रखता है.

शबनम के चाचा सत्तार अली बताते हैं कि शबनम और उसके प्रेमी सलीम को अभी तक सजा नहीं हो पाई है. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें सजा सुना दी थी और राष्ट्रपति महोदय ने भी उनकी दया याचिका खारिज कर दी थी. लेकिन उसके बावजूद आज तक इनको सजा नहीं मिल पाई है. इसलिए हम चाहते हैं कि इन्हें जल्दी से जल्दी सजा हो उन्होंने यह भी बताया कि अगर यह मामला सऊदी अरब का होता तो वहां पर कब की सजा मिल गई होती. वहां हर जुम्मे के दिन जुर्म करने वालों को उनके जुर्म के हिसाब से सजा दी जाती है.

शबनम के घर के सामने रहने वाले फुरकान अहमद ने बताया, 'शबनम के घर के कमरों में आज भी खून के दाग हैं. उस घटना के बाद से किसी के भी घर में शबनम ने जन्म नहीं लिया.' फुरकान बताते हैं कि गलत तो हुआ ही है इसलिए फर्क भी पड़ा और इसी वजह से अभी तक किसी ने शबनम नाम नहीं रखा.

बावन खेड़ी गांव के प्रधान मोहम्मद नवी ने न्यूज18 से बातचीत में बताया कि गांव में किसी ने शबनम नाम नहीं रखा क्योंकि लोग डरते हैं. उन्होंने बताया कि कही शबनम जैसा कांड दोबारा इस गांव ना हो. इसलिए अभी तक किसी ने शबनम नाम नहीं रखा है.

कैसे खुला मामला

पुलिस को शबनम पर शक हुआ क्योंकि परिवार में सिर्फ वही एक सदस्य जिंदा बची थी. पुलिस ने उसकी कॉल डीटेल खंगाली तो पता चला कि उसने 50 से 60 बार एक ही नंबर पर बात की थी. हत्या के कुछ मिनट पहले भी उसने एक नंबर पर बात की थी. इसके बाद पुलिस ने शबनम को पकड़ा और बाद में सलीम को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

फांसी पर अंतिम फैसला

दोनों को कोर्ट ने मौत की सजा दी. सुप्रीम कोर्ट से भी उनकी सजा माफ नहीं हुई. उन्होंने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की लेकिन वह भी निरस्त कर दी गई. एक बार फिर से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार दायर की है जिसकी सुनवाई इसी महीने होनी है, जिसके बाद फैसला होगा कि दोनों को फांसी दी जाएगी या नहीं.

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