COVID-19: कांवड़ियों को रोकने के लिए मुजफ्फरनगर और शामली की सीमाएं सील
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COVID-19: कांवड़ियों को रोकने के लिए मुजफ्फरनगर और शामली की सीमाएं सील
कावड़ियों को हरिद्वार जाने नहीं दिया जाएगा. (Demo PIc)

शामली जिला प्रशासन ने उत्तराखंड और हरियाणा के साथ लगती प्रदेश की सीमाएं बंद कर दी. अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरनगर और शामली क्रमश: उत्तराखंड और हरियाणा से लगते हैं. कांवड़ियों को इन जिलों में प्रवेश करने से रोकने के लिए ऐसा किया गया है.

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मुजफ्फरनगर. कोरोना वायरस महामारी (COVID-19) की वजह से सालाना कांवड़ यात्रा (Kanwad Yatra) इस साल रद्द कर दी गई है. इसके मद्देनजर उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार ने जहां बीते दिनों हरिद्वार सीमा पर कांवड़ियों को रोकने की व्यवस्था कर ली थी. वहीं यूपी के मुजफ्फरनगर और शामली जिले के प्रशासन ने भी उत्तराखंड और हरियाणा के साथ लगती प्रदेश की सीमाएं बंद कर दी. अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) और शामली क्रमश: उत्तराखंड और हरियाणा से लगते हैं. कांवड़ियों को इन जिलों में प्रवेश करने से रोकने के लिए ऐसा किया गया है.

मुजफ्फरगनर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग और उत्तराखंड की सीमा से लगते क्षेत्रों में 58 नाके लगाए गए हैं. हरिद्वार की ओर जाने वाले कांवड़ियों को रोकने के लिए यह इंतजाम किया गया है. उन्होंने कहा कि इन कावड़ियों को हरिद्वार जाने नहीं दिया जाएगा.

बैठक के बाद लिया गया फैसला



अधिकारियों ने बताया कि शामली जिले में पुलिस ने पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर यमुना पुल को बंद कर दिया है. उन्होंने बताया कि शामली और पानीपत के जिला अधिकारियों के बीच सोमवार को बैठक हुई और यह निर्णय लिया गया कि हरियाणा और राजस्थान से आ रहे कांवड़ियों को शामली में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा. इस बाबत हुई बैठक में दो जिलों के पुलिस अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया था.
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पिछले महीने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने सालाना कांवड़ यात्रा को रद्द करने के लिए अपनी सहमति जताई थी. अधिकारियों के लगातार लोगों से हरिद्वार नहीं जाने की अपील के बाद भी ऐसी खबरें हैं कि कांवड़िये हरिद्वार पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. इसके मद्देनजर उत्तराखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों की सरकारें भी सीमाओं पर इन्हें रोकने की व्यवस्था कर रही हैं. आपको बता दें कि भगवान शिव के भक्त श्रावण मास में हर साल कांवड़ यात्रा करते हैं. श्रद्धालु इस महीने में उत्तराखंड के हरिद्वार, गोमुख और बिहार के सुल्तानगंज से गंगा का पवित्र जल लाने के लिए जुटते हैं. इन श्रद्धालुओं को कांवड़िया कहा जाता है.
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