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यूपी की इस सीट पर मोदी की चाहत, चौधरी की जरूरत: ऐसा है मुजफ्फरनगर का सियासी गणित

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Updated: March 22, 2019, 3:16 PM IST
यूपी की इस सीट पर मोदी की चाहत, चौधरी की जरूरत: ऐसा है मुजफ्फरनगर का सियासी गणित
चौधरी अजित सिंह (PTI)

आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह इस बार मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे और आरएलडी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी बागपत से चुनाव मैदान में हैं. यह पहली बार है जब अजित सिंह बागपत के अलावा किसी दूसरी सीट से मैदान में उतरे हैं.

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(उदय सिंह राणा)

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 28 प्रत्याशी के नामों की घोषणा बीजेपी ने कर दी है. बीजेपी एक बार फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश में सियासी जंग जीतने के लिए पुराने और प्रतिष्ठित चेहरों को उतारा है. जाति का कार्ड खेलते हुए बीजेपी ने जाट के सामने जाट, राजपूत के सामने राजपूत और वैश्य के सामने वैश्य समुदाय के लोगों को खड़ा किया है. यूपी का जाट लैंड माने जाने वाले मुजफ्फरनगर में मुकाबला इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बनाम राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) हो गया है. आइए जानते हैं क्या है मुजफ्फरनगर का सियासी समीकरण:-

मुजफ्फरनगर के दक्षिण-पश्चिम में करीब 20 किलोमीटर दूर कुटबी-कुटबा नाम के दो गांव हैं. बहुसंख्यक जाट वाले इन गांवों में कुटबी और कुटबा अविभाज्य हैं. ये बताना मुश्किल है कि पहले गांव कि सीमा कहां खत्म होती है और दूसरे गांव की सीमा कहां से शुरू होती है.

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कुटबा गांव के निवासी और जाट एक्टिविस्ट विपिन सिंह बाल्यान बताते हैं, 'कुटबा-कुटबी एक ही गांव हैं, इनके बीच कोई सीमा नहीं है. आप एक गांव को दूसरे से अलग करके नहीं देख सकते.' गांववाले ये भी मानते हैं कि जाट बहुल कुटबा-कुटबी वाले गांव से एक ही जाट राष्ट्रीय राजनीति में हैं. इसके अलावा बीजेपी में मुजफ्फरनगर से कोई जाट नहीं है. कुटबा गांव के रहने वाले सतीश बाल्यान के मुताबिक, 'बीजेपी में मुजफ्फनगर से कोई जाट नहीं है. चौधरी साहिब (चौधरी अजित सिंह) ही इकलौते जाट हैं. राजनीति में उनके अलावा और कोई जाट है ही नहीं. अगर अजित सिंह चुनाव हार जाते हैं, तो राजनीति से जाटों का सफाया हो जाएगा.'

चौधरी अजित सिंह की तारीफ करते हुए गन्ना किसान सतीश बाल्यान आगे कहते हैं, 'देश में दो ही जाट हैं. बॉलीवुड में धर्मेंद्र और राजनीति में चौधरी अजित सिंह.'

राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को राजनीति विरासत में मिली है. उन्होंने जाटों के मसीहा के रूप में अपनी पहचान बनाई है. उनके पिता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह इस बार मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे और आरएलडी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी बागपत से चुनाव मैदान में हैं. यह पहली बार है जब अजित सिंह बागपत के अलावा किसी दूसरी सीट से मैदान में उतरे हैं.
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कुटबी गांव के रवि बाल्यान कहते हैं, 'मोदी ने मुजफ्फरनगर को लेकर वादें तो कई सारे किए, लेकिन एक भी वादा नहीं निभाया. खातें में 15 लाख रुपये से लेकर पेट्रोल के दाम घटाने तक और आर्टिकल 370 हटाने से लेकर गांवों के बिजलीकरण तक चुनाव के दौरान किया गया एक भी वादा धरातल पर नहीं दिखा. एयर स्ट्राइक तो इसके पहले भी हुए थे, लेकिन तब की सरकार ने इसका शो ऑफ नहीं किया. जैसे की एनडीए सरकार कर रही है.'

हालांकि, रवि बाल्यान के दोस्त मोहित की राय कुछ अलग है. वो कहते हैं, 'मैं तो बीजेपी के लिए वोट करूंगा. यहां तक कि मेरा पूरा गांव बीजेपी के लिए वोट करेंगे. पार्टी ने हमारे यहां काम किया है. हमारे सांसद संजीव बाल्यान दंगे के दिनों में हमारे साथ खड़े थे. हर संभव मदद की. हमारे क्षेत्र में अपराध खत्म हो चुका है.' बता दें कि दंगे के दिनों में पीड़ितों की मदद कर संजीव बाल्यान लोकल हिंदुत्व चेहरा बन गए थे और 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने मुजफ्फरनगर से जीत हासिल की.

कुटबा के रहने वाले विपिन बाल्यान ने कभी संजीव बाल्यान की वजह से बीजेपी के लिए प्रचार किया था, लेकिन अब इस चुनाव में आरएलडी का समर्थन कर रहे हैं. विपिन बताते हैं, 'वो मेरे भाई जैसे थे. लेकिन बाद में उनमें घमंड आ गया. खुद को वह कम्युनिटी से बढ़कर समझने लगे.' विपिन बाल्यान आगे बताते हैं, 'संजीव बाल्यान सांसद हैं लेकिन जाट नहीं. हम लोगों में दूरी की यही वजह बनी.'

मुजफ्फरनगर सीट का जातीय समीकरण
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर करीब 16 लाख वोटर्स हैं. इनमें पुरुष वोटर 875186 और 713297 महिला वोटर हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 69.7 फीसदी वोट जले थे. 2014 में इस सीट पर NOTA को 4739 वोट गए थे. इस सीट पर 27 फीसदी मुस्लिम वोटर मौजूद हैं.

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत कुल पांच विधानसभाएं आती हैं. इनमें बुढ़ाना, चरथावल, मुजफ्फरनगर, खतौली, सरधना सीट आती हैं. ये पांचों ही सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में हैं. इनमें सरधना सीट से ठाकुर संगीत सोम विधायक हैं, जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं.

2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे
2014 में उत्तर प्रदेश में चली भारतीय जनता पार्टी की लहर का असर मुजफ्फरनगर में भी देखने को मिला था. संजीव बालियान ने इस सीट पर करीब 60 फीसदी वोट हासिल किए थे, जबकि उनके प्रतिद्वंदी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार कादिर राणा को सिर्फ 22 फीसदी वोट ही हासिल हुए थे. संजीव बालियान ने कादिर राणा को करीब 4 लाख वोटों से हराया था. (अंग्रेजी में पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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First published: March 22, 2019, 1:07 PM IST
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