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पश्चिमी यूपी के किसानों का छलका दर्द, बोले- गन्ने की स्थिर कीमत, डीजल के बढ़ते दाम और आवारा मवेशियों से हैं परेशान

यूपी में  पिछले कई मौसमों से गन्ने के दाम बढ़े नहीं हैं.

यूपी में पिछले कई मौसमों से गन्ने के दाम बढ़े नहीं हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western Uttar Pradesh) का किसान (Farmers) इन दिनों तीन बातों को लेकर खासा परेशान है. वह आजकल गन्ने की स्थिर कीमत, डीजल के बढ़ते दाम और आवार मवेशियों से परेशान है. जबकि वह केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर भी डर रहा है.

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मुजफ्फरगनर. किसान नेता नरेश और राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) की वजह से जहां एक ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश दिल्ली से लगी सीमाओं पर जारी किसान के विरोध प्रदर्शनों का केन्द्र बन गया है, तो वहीं दूसरी ओर ‘भारत का चीनी का कटोरा’कहे जाने वाले इस राज्य के किसान गन्ने की कीमतें नहीं बढ़ने, डीजल के बढ़ते दाम (Diesel Price)और आवारा पशुओं समेत इससे भी बड़ी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं.

मुजफ्फरनगर जिले के सथेरी गांव में रावा राजपूत समुदाय के राज कुमार ने बताया कि पिछले कई मौसमों से गन्ने के दाम बढ़े नहीं हैं. वहीं कम्पनियों ने यूरिया और डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) ‘बैग’ का आकार छोटा कर दिया है, जिससे खाद महंगी हो गई है और कृषि अस्थिर हो गई है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में, हमारे बड़े-बुजुर्ग पहले कहा करते थे कि उत्तम खेती, बीच व्यापार और नीच नौकरी, लेकिन अब इसका विपरीत हो गया है.

तीन बातों से बढ़ी किसानों की टेंशन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जिला मुजफ्फरनगर, दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं है. दिल्ली की सीमाओं पर किसान केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 100 से अधिक दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं. इन विवादस्पद कानूनों के बारे में सवाल करने पर कुमार ने कहा कि उन्हें इनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता, लेकिन वह किसानों के प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि खेती अस्थिर हो गई है.
इसके अलावा सैनी समुदाय के रोशल लाल ने कहा कि नए तीन कृषि कानूनों से भी अधिक वे गन्ने के भुगतान में देरी, डीजल के बढ़ते दाम और आवारा पशुओं से परेशान हैं. लाल ने कहा, ‘कृषि कानूनों से अधिक इन स्थानीय समस्याओं ने हमारी परेशानियां बढ़ा दी हैं. इनकी वजह से हम किसानों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने को मजबूर हो गए हैं.'



गणशामपुरा गांव की कश्यप जाति के सोहन ने कहा कि जब तक गन्ने के दाम नहीं बढ़ेंगे, तब तक गुड़ का भाव भी स्थिर रहेगा. उन्होंने कहा कि यहां तो गन्ना ही सब कुछ है. उसका दाम बढ़ेगा, तो गुड़ का दाम भी बढ़ेगा, वरना मजदूरी भी बचानी मुश्किल है. सोहन ने कहा कि उन्होंने कृषि कानूनों के बारे में सुना है, लेकिन उसके बारे में उन्हें ज्यादा कुछ नहीं पता. उन्होंने भी आवारा पशुओं का मामला उठाया है.

बहरहाल, क्षेत्र के कई अन्य किसानों और व्यापारियों ने गन्ने की कीमतों और किसानों को समय पर भुगतान ना मिलने की बात को रेखांकित किया. उन्होंने तीन नए कृषि कानूनों के बारे में कहा कि उनकी अधिकतर जानकारी किसान नेताओं द्वारा उन्हें बताई गई बातों पर ही आधारित है. इन कानूनों का विरोध पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में अधिक दिखा.

जाट समुदाय के खापों के मुख्यालय के रूप में देखे जाने वाले सोरम गांव में कृषि कानूनों का नाम सुनते ही लोग उत्तेजित हो गए. भूपेन्द्र चौधरी ने कहा, ‘ये कानून केवल किसानों के नहीं, बल्कि देश के भी खिलाफ है. सीमाओं पर जो तैनात हैं, वे हमारे बेटे हैं और उनके पीछे से आप उनके उन भाइयों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं, जो खेती करते हैं.’

एक अन्य किसान विपिन बाल्यान ने कहा कि सरकार के कृषि कानून वापस लेने तक प्रदर्शन जारी रहेगा. जबकि भूपेन्द्र और विपिन ने भी गन्ने की स्थिर कीमतों, भुगतान में देरी और आवारा पशुओं के उत्पात का मामला उठाया है. क्षेत्र के कई किसानों ने बताया कि उन्हें केन्द्र की प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि योजना के तहत हर साल सरकार से छह हजार रुपये मिल रहे हैं. पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि कानूनों के खिलाफ खाप या किसान नेताओं या राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित कई महापंचायतों का आयोजन किया जा रहा है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की आजीविका है खेती
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक कृषि योग्य भूमि पर गन्ने की खेती की जाती है, जो किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत है. वहीं,ऑल इंडिया शुगर ट्रेडर्स एसोसिएशन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 255 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 2020-21 में 285 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य सलाहकार कीमत (एसएपी) 2017-18 से 315 रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि क्षेत्र में गुड़ की बड़ी संख्या में फैक्टरी होने के अलावा लगभग 50 चीनी मिले हैं.
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