डीएम ने कहा- मुजफ्फरनगर दंगों के सभी मुकदमे वापस लेना संभव नहीं

बता दें इन मुकदमों में सांसद संजीव बालियान, विधायक संगीत सोम, विधायक उमेश मलिक आदि से जुड़े मुकदमे शामिल नहीं हैं.

BINESH PANWAR | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 13, 2018, 12:46 PM IST
डीएम ने कहा- मुजफ्फरनगर दंगों के सभी मुकदमे वापस लेना संभव नहीं
मुजफ्फरनगर डीएम राजीव शर्मा
BINESH PANWAR | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 13, 2018, 12:46 PM IST
साल 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगे के 131 मुकदमे वापस लेने से जिलाधिकारी ने इनकार कर दिया है. ये वो मुकदमे हैं जिनमें कई बीजेपी नेता पर आरोप लगे हैं. इस संबंध में शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में डीएम राजीव शर्मा ने कहा है कि प्रशासनिक स्तर पर कोर्ट में विचाराधीन सभी मुकदमों को वापस लेना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि उनसे इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसे उन्होंने शासन को भेज दिया है. अब इस पर फैसला शासन को लेना है.

बता दें इन मुकदमों में सांसद संजीव बालियान, विधायक संगीत सोम, विधायक उमेश मलिक आदि से जुड़े मुकदमे शामिल नहीं हैं. 5 फ़रवरी 2018 को खाप चौधरियों और बीजेपी नेताओं ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात कर 131 मुकदमों की सूची सौंपी थी. जिनमें कहा गया था कि ये मुक़दमे रंजीशन और पुलिस द्वारा दर्ज कराए गए हैं. जिसके बाद सरकार ने मार्च 2018 को डीएम से मुकदमों की वापसी को लेकर 13 बिन्दुओं पर रिपोर्ट मांगी थी.

न्यूज18 से बातचीत में डीएम राजीब शर्मा ने कहा, "भारतीय दंड संहिता में यह प्रावधान है कि आरोपी अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों की वापसी के लिए आवेदन कर सकता है. मुजफ्फरनगर दंगों के जिन मुकदमों की 13 बिन्दुओं पर शासन ने रिपोर्ट मांगी थी, वह प्रेषित कर दी गई है. एसएसपी, संयुक्त निदेशक अभियोजन और जिला शासकीय अधिवक्ता की आख्या ली गई थी. वादों को प्रशासनिक स्तर पर वापस लिया जाना संभव नहीं है."

बीजेपी विधायक संगीत सोम ने मामले में कहा कि सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे में दर्ज हुए फर्जी मुकदमे वापस लेने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में डीएम उन्हें वापस लेने से नहीं रोक सकते. सरकार का आदेश है. उस समय सपा सरकार थी और बीजेपी नेताओं समेत अन्य लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज हुए थे. जिन्हें वापस कराया जाएगा.

वहीं मामले में बीजेपी सांसद संजीव बालियान ने कहा कि डीआई डीएम ने जो रिपोर्ट भेजी है उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अंतिम निर्णय सीएम को लेना है. न्याय विभाग की कमिटी डीएम की अख्य पर बिंदुवार विचार विमर्श के बाद सीएम को रिपोर्ट सौंपेगी. सीएम से मुलाक़ात कर फिर अपनी बात रखी जाएगी.
गौरतलब है कि 7 सितम्बर 2013 को कवाल कांड के बाद मुजफ्फरनगर और शामली में दंगा भड़का था. इन दंगों में 65 लोगों की मौत हुई थी. हिंसा के बाद 50 हजार लोगों ने गांव छोड़ दिया था और उन्हें शरणार्थी कैंप में शरण लेनी पड़ी थी.
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