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अयोध्या मामलाः अजित डोभाल ने योगी सरकार को लिखा लैटर, UP में हो रही चर्चा

अजित ने कहा कि अयोध्या फैसले के बाद केंद्र और राज्य के सुरक्षाबलों में शानदार तालमेल देखने को मिला. (फाइल फोटो)

अजित ने कहा कि अयोध्या फैसले के बाद केंद्र और राज्य के सुरक्षाबलों में शानदार तालमेल देखने को मिला. (फाइल फोटो)

देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने की योगी सरकार की तारीफ, कहा- इतने बड़े फैसले के बाद एक पत्ता भी नहीं खड़का.

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    नई दिल्ली. अयोध्या (Ayodhya) मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आए एक महीने से ज्यादा बीत चुका है. अब सबकी निगाहें राममंदिर (Ram Mandir) निर्माण और उससे जुड़े ट्रस्ट के गठन पर टिकी हुई हैं. लेकिन उससे पहले देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल (Ajit Doval) का उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखा गया एक पत्र सूबे में चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि लैटर 12 दिन पुराना है, लेकिन चर्चाओं में अभी आया है.

    यूपी और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों के संबंध में लिखा है पत्र
    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने लैटर लिखते हुए कहा है, ये काबिले तारीफ है कि अयोध्या मामले पर फैसले के बाद पूरे प्रदेश में कहीं कोई तनाव या हिंसा की घटना नहीं हुई. केन्द्र और यूपी की सुरक्षा एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल दिखाई दिया.

    वहीं इस मामले को अच्छी तरह से हैंडल करने के लिए मैं योगी सरकार की भी तारीफ करता हूं. साथ ही यूपी के वो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने दिन-रात अलर्ट रहकर अयोध्या ही नहीं पूरे यूपी में एक पत्ता भी नहीं खड़कने दिया.

    सीएम योगी आदित्यनाथ. (फाइल फोटो)


    बनाए गए थे इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर्स
    सीएम योगी के निर्देश पर पहली बार इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर्स का निर्माण किया गया था. इसके तहत जोनवार डेस्क बनाए गए थे, जहां पर फोन कॉल्स, सोशल मीडिया और मीडिया से मिल रही सूचनाओं पर नजर रखी जा रही थी. वहीं PRV, QRT, PAC, जैसे सुरक्षाबलों को अलर्ट पर रखा गया था. फायर, अभिसूचना, CRPF, GRP, RPF, BSF, SSB, ITBP, CISF के प्रतिनिधियों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया था. मोबाइल डाटा टर्मिनल (PRV में लगे), रेडियो, इंटरनेट, satellite फोन, हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो भी तैयार रखे गए थे.

    सीएम योगी के निर्देश पर उठाए गए थे ये कदम
    जानकारों के अनुसार सूबे के कई क्षेत्रों में पैरामिलिट्री फोर्स की 60 कंपनियां, आरपीएफ, पीएसी और पुलिस 1200 के कॉन्स्टेबल, 250 सब-इंस्पेक्टर्स, 20 डिप्टी सुप्रिटेंडेंट और 20 एसपी तैनात किए गए थे. जगह-जगह डबल लेयर बैरिकेडिंग, पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाया गया था. इस दौरान ड्रोन कैमरों के जरिए भी निगरानी रखी गई थी. बड़ी बात ये थी कि इस दौरान रामलला के दर्शनों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी.

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