ऐसे हो रही थी बिजली चोरी, पकड़े जाने से पहले ही लग गया करोड़ों रुपये का चूना

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Updated: September 5, 2019, 12:16 PM IST
ऐसे हो रही थी बिजली चोरी, पकड़े जाने से पहले ही लग गया करोड़ों रुपये का चूना
प्रतीकात्मक फोटो- बिजली मीटर की सही रीडिंग को कम लिखकर मिलीभगत से इस बिजली चोरी को अंजाम दिया जा रहा था.

कांट्रेक्ट पर काम कर रही प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों संग मिलकर अंजाम दिया जा रहा था. बिजली चोरी का खुलासा हो चुका है. लेकिन पकड़े जाने से पहले ही बिजली चोर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा चुके हैं.

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गाज़ियाबाद.  बिजली चोरी रोकने के अधिकारी लाख दावा करें. चोरी (Theft) रोकने के लिए नई-नई योजनाओं पर अमल किया जाए. लेकिन बिजली (Elecricity) चोर अधिकारियों से चार कदम आगे हैं. बिजली चोरी का ताजा मामला भी ऐसा ही है. बिजली चोरी के इस नए तरीके को कांट्रेक्ट पर काम कर रही प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों संग मिलकर अंजाम दिया जा रहा था. हालांकि बिजली चोरी (Power Theft) का खुलासा हो चुका है. लेकिन पकड़े जाने से पहले ही बिजली चोर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा चुके हैं.

ऐसे हो रही थी बिजली की चोरी

यूपी के कई ज़िलों में खुलासके बाद कुछ दिन पहले गाज़ियाबाद में बिजली चोरी के इस तरीके का पता चला है. जानकारों के अनुसार बिजली उपभोक्ता मीटर की रीडिंग लेने के लिए आने वाले मीटर रीडर से सेटिंग करता था. यह मीटर रीडर एक प्राइवेट कंपनी के हैं. किसी भी इलाके में इनकी डयूटी 3 से 6 महीने के लिए लगाई जाती है. सेटिंग के चलते रीडर मीटर की रीडिंग को कम नोट करते थे. जैसे मीटर में एक महीने की रीडिंग 850 आ रही है तो यह उसे कम लिखकर ले जाते थे और बिल बनाने वाले विभाग में नोट करा देते थे.

लेकिन मीटर पर दिखाई दे रही रीडिंग एक न एक दिन तो पकड़ी जाएगी ही, इसके लिए रीडर उस इलाके से अपनी डयूटी बदलने से पहले उपभोक्ता के साथ मिलकर मीटर को खराब बताकर बिजली विभाग में जमा कराने की सलाह देता था. या फिर किसी कारण से मीटर को जला हुआ दिखा दिया जाता था. इस तरह से मीटर की असली रीडिंग खराब मीटर के साथ ही दफन हो जाती थी.

प्रतीकात्मक फोटो- बिजली चोरी के इस खेल का खुलासा होने से पहले ही करोड़ों रुपये की हेराफेरी का अंदाजा लगाया जा रहा है.


ऐसे पकड़ा गया बिजली चोरी का यह खेल

मीटर खराब होने के बाद विभाग में जमा कराए जाते हैं. उसके साथ एक रिपोर्ट भी लगती है. अचानक कुछ समय से खराब मीटर आने की संख्या बढ़ गई. खास 16 डिवीजन में 5 महीने में ही 5 हजार से ज्यादा खराब मीटर आ गए. जब विभाग को कुछ शक हुआ और प्रदेशस्तर पर जगह-जगह इस तरह का खेल पकड़ा गया तो मीटरों की जांच करर्इा गई. जांच में करीब 500 मीटर ऐसे मिले जिनकी रीडिंग में हेरफेर किया गया था. जब और गहराई से जांच की गई तो सामने आया कि करीब 14 लाख रीडिंग का हेरफेर हुआ है.
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क्या कहते हैं बिजली अधिकारी

बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर आरके राणा का कहना है कि मीटर को खराब बताकर बदलवाने वालों पर अब पैनी नज़र रखी जा रही है. हालांकि शरुआती जांच में कुछ मीटरों में यह गड़बड़ी सामने आई है. लेकिन जांच अभी चल रही है. मीटर रीडरों के खिलाफ भी उनकी कंपनी को लिखा गया है. सख्त कार्रवाई करने के साथ ही आरोपी उपभोक्ताओं से इसकी वसूली की जाएगी.

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First published: September 5, 2019, 12:01 PM IST
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