नोएडा-ग्रेटर नोएडा नगर निगम बने तो हर घर को देना होगा इतना टैक्स

प्राधिकरण को निगम न बनाकर उसी में सुधार कर लिया जाए यह रिपोर्ट अब ठंडे बस्ते में जाते हुए दिख रही है. अगर ऐसा होता है तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा में रहने वालों को अब लीज रेंट की जगह हर साल नगर निगम को हाउस टैक्स चुकाना होगा.

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 11:06 AM IST
नोएडा-ग्रेटर नोएडा नगर निगम बने तो हर घर को देना होगा इतना टैक्स
प्रतीकात्मक फोटो- नोएडा सहित तीनों प्रधिकरण को निगम बनाने की कार्रवाई शुरु हो गई है.
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Updated: August 9, 2019, 11:06 AM IST
नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (यीडा) को नगर निगम बनाने की कार्रवाई तेज हो गई है. यूपी सरकार ने तीनों प्राधिकरण को लेटर लिखकर रिपोर्ट मांगी है. दूसरी ओर प्राधिकरण को निगम न बनाकर उसी में सुधार कर लिया जाए यह रिपोर्ट अब ठंडे बस्ते में जाते हुए दिख रही है. अगर ऐसा होता है तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा में रहने वालों को अब लीज रेंट की जगह हर साल नगर निगम को हाउस टैक्स चुकाना होगा.

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अभी ऐसे मिलते हैं ज़मीन-मकान

जानकार बताते हैं कि मौजूदा वक्त में नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यीडा तीनों प्राधिकरण 90 साल की लीज पर ज़मीन या मकान आवंटित करते हैं. इसके साथ ही खरीदार से 12 से लेकर 18 प्रतिशत तक लीज रेंट वसूल करते हैं. लेकिन अगर नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यीडा नगर निगम बनाए जाते हैं तो यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी और दूसरे निगमों की तरह से यहां हाउस टैक्स लगना शुरू हो जाएगा.

नगर निगम बने तो वसूले जा सकते हैं 3 हजार रुपये साल

प्राधिकरण से जुड़े जानकारों की मानें तो अभी प्राधिकरण को नगर निगम बनाने की बात चल रही है. किस चीज पर कितना टैक्स लिया जाएगा यह अभी तक तय नहीं हुआ है. लेकिन पड़ोस के ज़िले गाज़ियाबाद में हर 100 वर्गगज के मकान पर 3 हजार रुपये सालाना हाउस टैक्स लिया जाता है. उम्मीद जताई जा रही है कि प्राधिकरण के निगम बनने पर इसी तरह की व्यवस्था यहां भी की जा सकती है.

प्रतीकात्मक फोटो- नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पहचान इंडिया ही नहीं विदेशों में भी है.


प्राधिकरण को निगम न बनाने की गई थी रिपोर्ट
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सूत्रों की मानें तो रेरा बनाने के बाद भी प्राधिकरणों की हालत में कोई खास सुधार नहीं आया. इसके बाद पूर्व चेयरमैन प्रभात कुमार को सरकार की ओर से एक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए कि क्यों न इसे निगम बना दिया जाए. इसके बाद अधिकारियों, कर्मचारियों और दूसरे लोगों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई. रिपोर्ट सरकार को भी भेज दी गई.

रिपोर्ट में कहा गया था कि प्राधिकरण का अपना एक सिस्टम है और उसकी देश ही नहीं विदेशों में भी पहचान है. इसलिए इसे निगम न बनाकर इसी सिस्टम में और सुधार कर दिए जाएं. लेकिन अब यह रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली गई है.

20 हजार करोड़ रुपये था सालाना बजट

जानकार बताते हैं कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यीडा का मिलाकर एक साल का बजट 20 हजार करोड़ रुपये हुआ करता था. किसानों से ज़मीन खरीदकर उसे बेचना ही प्रधिकरण की मोटी कमाई थी. लेकिन बीते 10-12 साल से प्राधिकरण की हालत बिगड़ती चली गई. कई बड़े स्मारक, पार्क और स्कूल निर्माण के चलते प्राधिकरण को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़े. यह वो खर्च था जिससे बाद में भी कोई आमदनी नहीं हुई.

उस पर तुर्रा यह कि बहुत सारी ऐसी ज़मीन थी जहां फैक्ट्री-ऑफिस शुरू होने थे, लेकिन ज़मीन दे दी गई बिल्डरों को. कोढ़ में खाज यह हुआ कि बहुत सारे बिल्डर प्राधिकरण का पैसा दबाकर बैठ गए.

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First published: August 9, 2019, 10:34 AM IST
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