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Noida अथॉरिटी ने सुपरटेक टॉवर मामले में कोर्ट और लखनऊ विजिलेंस में 30 के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

Noida अथॉरिटी ने सुपरटेक टॉवर मामले में कोर्ट और लखनऊ विजिलेंस में 30 के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

विजिलेंस की जांच में नोएडा अथॅारिटी के अधिकारियों की करोड़ों की बेनामी संपत्ति पता चला है.

विजिलेंस की जांच में नोएडा अथॅारिटी के अधिकारियों की करोड़ों की बेनामी संपत्ति पता चला है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने दोनों टावर को अवैध घोषित करते हुए तोड़ने का आदेश दिया है. इसी के चलते नोएडा अथॉरिटी के भी कई पूर्व और वर्तमान अफसरों पर गाज गिरी है. सुपरटेक (Supertech) रियल स्टेट सेक्टर में देश की बड़ी कंपनियों में शुमार है. रिव्यू पिटीशन भी खारिज होने से सुपरटेक को बड़ा झटका लगा है. जांच में तेजी लाने के लिए एसआईटी (SIT) की जांच को मेरठ (Meerut) या नोएडा में ट्रांसफर कराया जा सकता है. नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) के 4 नियमों के उल्लंघन को आधार बनाकर यह मामला दर्ज कराया गया है.

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    नोएडा. सुपरटेक (Supertech) एमराल्ड कोर्ट ट्विन टॉवर्स (Twin Towers) मामले की गाज अब अफसरों और कर्मचारियों पर गिरना शुरू हो गई है. नोएडा अथॉरिटी ने खुद अपने वर्तमान और रिटायर्ड अफसर-कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराना शुरू कर दिया है. अथॉरिटी ने ट्विन टॉवर्स मामले में अभी तक 30 लोगों के खिलाफ कोर्ट और लखनऊ (Lucknow) विजिलेंस में मामला दर्ज कराया है. इसमे से 26 नोएडा अथॉरिटी के पूर्व और वर्तमान अफसर-कर्मचारी हैं. चार सुपरटेक बिल्डर्स में बोर्ड से जुड़े लोग हैं. इतना ही नहीं जांच में तेजी लाने के लिए एसआईटी (SIT) की जांच को मेरठ (Meerut) या नोएडा में ट्रांसफर कराया जा सकता है. नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) के 4 नियमों के उल्लंघन को आधार बनाकर यह मामला दर्ज कराया गया है.

    अफसर-कर्मचारियों ने ऐसे पहुंचाया था सुपरटेक को फायदा

    नोएडा अथॉरिटी ने कोर्ट और लखनऊ विजिलेंस में जो मामला दर्ज कराया है उसमे भवन नियमावली 2006, भवन नियमावली 2010, अर्बन प्लानिंग एक्ट और आइपीसी की धाराओं के उल्लंघन का आरोप लगाया है. सूत्रों की मानें तो इन्हीं कानून को लचीला कर और उनका उल्लंघन कर सुपरटेक बिल्डर को एमराल्ड कोर्ट ट्विन टॉवर्स मामले में फायदा पहुंचाया गया था. इसी को आधार बनाते हुए नोएडा अथॉरिटी ने अपने वर्तमान और रिटायर्ड अफसर-कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.

    ये थे नोएडा अथॉरिटी के नियम-

    किसी भी बिल्डर्स को ग्रुप हाऊसिंग का प्लॉट लेने के लिए जमीन की कीमत का 10 फीसद पैसा रजिस्ट्रेशन के वक्त और 20 फीसद आवंटन के वक्त देना होता था. बाकी 70 फीसद पैसा 5 साल के दौरान 10 बराबर किस्तों में चुकाना होता था.

    लेकिन जब बदल दिए गए नियम-

    नियम बदलने के बाद ग्रुप हाऊसिंग का प्लॉट लेने के लिए जमीन की लागत का 5 फीसद रजिस्ट्रेशन शुल्क और 5 फीसद आवंटन शुल्क कर दिया गया. आवंटन के बाद तीन साल तक बकाया पैसे पर केवल ब्याज लेने का नियम बना दिया गया. वहीं तीन साल बाद 7 सालों में 14 बराबर किस्तों में बाकी 90 फ़ीसदी पैसा देने की रियायत बिल्डर्स को दे दी गई.

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    ये है नोएडा अथॉरिटी के आरोपी अफसर-कर्मचारियों की लिस्ट

    जो रिटायर्ड हो गए-

    मोहिदर सिंह                 मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा

    कैप्टन एसके द्विवेदी         मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा

    आरपी अरोड़ा                 अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा

    पीएन बाथम                   अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा

    यशपाल सिंह                 विशेष कार्याधिकारी

    एके मिश्रा                      नगर नियोजक

    राजपाल कौशिक           वरिष्ठ नगर नियोजक

    त्रिभुवन सिंह                 मुख्य वास्तुविद नियोजक

    शैलेंद्र कैरे                   उप महाप्रबंधधक (ग्रुप हाउसिग)

    बाबूराम                      तत्कालीन परियोजना अभियंता

    टीएन पटेल                 प्लानिंग असिस्टेंट

    वीए देवपुजारी              मुख्य वास्तुविद नियोजक

    एनके कपूर                 एसोसिएट आर्किटेक्ट

    प्रवीण श्रीवास्तव            सहायक वास्तुविद

    ज्ञान चंद                      विधि अधिकारी

    राजेश कुमार                विधि सलाहकार

    विपिन गौड़                 महाप्रबंधक

    एमसी त्यागी                परियोजना अभियंता

    केके पांडेय                 मुख्य परियोजना अभियंता

    एसी सिंह            वित्त नियंत्रक

    यह अभी भी नौकरी कर रहे हैं-

    मुकेश गोयल             नियोजन सहायक

    ऋतुराज व्यास           सहयुक्त नगर नियोजक

    अनीता                    नियोजन सहायक

    विमला सिंह              सहयुक्त नगर नियोजक

    Tags: Noida Authority, SIT, Supertech Twin Tower case

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