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UP Flood: पहली बार नहीं डूब रहा Lucknow, 1960 की बाढ़ ने बढ़ा दी थी सबकी धड़कन

लखनऊ में दो दिन से हो रही लगातार बारिश से सड़कें लबालब हो गई हैं.

लखनऊ में दो दिन से हो रही लगातार बारिश से सड़कें लबालब हो गई हैं.

flood in Lucknow : 1960 की बाढ़ में पुराना लखनऊ, हजरतगंज, कैसरबाग, इमामबाड़ा, विश्वविद्यालय, हुसैनाबाद, नक्खास सब डूब चुके थे. बाढ़ के पानी से बचने के लिए छत पर चढ़े लोगों की मदद में रात करीब 2 बजे सरकारी नाव चलती दिखाई पड़ी थी.

  • News18Hindi
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नोएडा. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में बुधवार से हो रही लगातार बारिश ने लखनऊ में तबाही ला दी है. गुरुवार सुबह 8:30 बजे से लेकर शाम को 5:30 बजे तक 115 मिलीमीटर बारिश लखनऊ में दर्ज की गई है. लखनऊ की सड़कों पर पानी बुरी तरह भर चुका है. लबालब भरे गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई है. ये बच्चे सुबह 11 बजे से घर से गायब थे. काफी देर तक घर न लौटने पर परिजनों ने बच्चों की तलाश शुरू की. पुलिस की मदद से मिले बच्चों के शव. यह हादसा मड़ियांव थाना क्षेत्र के मोहिबुल्लापुर स्टेशन के पास का है. लखनऊ में हो रही झमाझम बरसात और सड़कों पर बाढ़ की स्थिति ने यहां के लोगों को 1960 की याद दिला दी. लखनऊ में रहने वाले बूढ़े-बुजुर्ग 1960 की बाढ़ को याद कर रहे हैं.

वेबसाइट पर चल रही इस चर्चा में काले बाबा के नाम से मशहूर योगेश प्रवीण बताते हैं कि 1960 वे तकरीबन 15 साल के थे. वे बताते हैं कि लखनऊ में सबसे पहली बाढ़ 1923 में आई थी, लेकिन 1960 की बाढ़ ज्यादा भयानक थी. वे बताते हैं कि तब वे जामा मस्जि‍द के पास की गली में रहते थे. जुलाई के आखिरी हफ्ते में बारिश जो शुरू हुई तो अगले कई दिनों तक होती रही. उस दिन शाम के 7 बजे होंगे तभी देखा कि बहुत तेजी से पानी सड़कों से होता हुआ घरों में घुसने लगा. जब तक मैं भागकर घर के अंदर आता, घर में घुटने तक पानी भर गया. हमसब भागकर छत पर चले गए. अगले 30 मिनट में पूरा घर डूब गया.

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वेबसाइट के मुताबिक, योगेश प्रवीण बताते हैं कि पुराना लखनऊ, हजरतगंज, कैसरबाग, इमामबाड़ा, विश्वविद्यालय, हुसैनाबाद, नक्खास सब डूब चुके थे. रात करीब 2 बजे सरकारी नाव चलती दिखाई पड़ी, वो हमारे छत के पास आई और हम उसपर बैठकर बड़े इमामबाड़े की छत पर चले गए. बाद में स्थि‍ति इतनी खराब हो गई कि पुराने लखनऊ में सभी के घर डूब चुके थे.

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