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हजारों करोड़ रुपये का हुआ तेजी से बढ़ता बकरी पालन, जानें वजह  

कोरोना से पहले 2018-19 में 18425 मीट्रिक टन मीट एक्सपोर्ट हुआ था. इसकी कीमत 790.65 करोड़ रुपये थी.

कोरोना से पहले 2018-19 में 18425 मीट्रिक टन मीट एक्सपोर्ट हुआ था. इसकी कीमत 790.65 करोड़ रुपये थी.

बकरी के दूध और मीट से जुड़े कारोबार को जानने और समझने के लिए दुनियाभर से 15 सौ डेयरी एक्सपर्ट भारत आ रहे हैं. वो यहां 1 ...अधिक पढ़ें

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नोएडा. बकरी पालन (Goat Farming) अब छोटे किसानों का गरीबी दूर करने वाला कामकाज नहीं रहा है. यह अब तिजोरियों को भरने वाला बड़ा कारोबार बन चुका है. बकरी के दूध (Goat Milk) से लेकर मीट और जिंदा बकरे की सप्लाई का मुनाफा हजारों करोड़ रुपये में पहुंच चुका है. ज्यादातर बकरे का मीट (Goat Meat) अरब देशों को एक्सपोर्ट किया जा रहा है. साल 2021-22 में 75 फीसद मीट सप्लाई तो अकेले यूएई (UAE) को किया गया था. वहीं कतर और कुवैत दूसरे-तीसरे नंबर पर थे. कोरोना के दौरान सबसे बड़ा खरीदार चीन बना था. जिंदा बकरों के मामले में पहले नंबर पर सऊदी अरब (Saudi Arabia) है.

देश में करोड़ों का है मीट कारोबार

केन्द्र सरकार के देशभर में केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान संचालित हो रहे हैं. खासतौर से अंडमान निकोबार समेत असम, पश्चिम बंगाल, केरल, पटना, महाराष्ट्र, यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, लेह-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिए कश्मीर में सेंटर चल रहा है. सेंटर्स में बकरी के दूध के साथ ही उसके मीट कारोबार से संबंधित जानकारियां भी दी जाती हैं. एपीडा केन्द्र सरकार की ही एक अथॉरिटी है. यह खाने के सामान से जुड़े एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट के आंकड़े रखती है.

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एपीडा के मुताबिक साल 2021-22 में भारत से भेड़ और बकरी का 8696 मीट्रिक टन मीट एक्सपोर्ट हुआ था. इसकी कीमत 447.58 करोड़ रुपये थी. यह वित्त वर्ष कोरोना से प्रभावित था. जबकि कोरोना से पहले 2018-19 में 18425 मीट्रिक टन मीट एक्सपोर्ट हुआ था. इसकी कीमत 790.65 करोड़ रुपये थी. यह आंकड़े एक्सपोर्ट के हैं. अगर घरेलू डिमांड की बात करें तो बकरीद के मौके पर बकरी फार्म में 25 फीसद रकम के साथ 5 महीने पहले से ही बकरों की बुकिंग शुरू हो जाती है. रोजाना की डिमांड हर रोज लगने वालीं हाट में पूरी की जाती हैं.

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हर साल लाखों बकरों की डिमांड आती है अरब देशों से

सऊदी अरब में हर साल हज का आयोजन किया जाता है. इस दौरान हज पर जाने वाले हर एक हज यात्री को एक बकरे की कुर्बानी करनी होती है. साल 2019 में 25 लाख लोगों ने हज किया था. कोरोना की पाबंदियों के चलते 2022 में 10 लाख लोगों ने हज किया था. सऊदी अरब की सरकार का दावा है कि साल 2030 तक वो 63 लाख लोगों को एक साथ हज कराने के इंतजाम कर लेगा.

हज यात्री 25 से 30 दिन तक हज करने के लिए रुकता है. इस दौरान उसे दोनों वक्त खाने में भी बकरा और मुर्गा दिया जाता है. खास बात यह है कि मुर्गे और बकरे की इस डिमांड को पूरा करने के लिए भारतीय कारोबारियों को भी बड़े आर्डर मिलते हैं. इसके अलावा अरब देश सालभर की अपनी डिमांड भी भारत, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से पूरी करते हैं.

दूध के साथ मीट की जानकारी भी देते हैं बकरी संस्थान

देशभर में 20 केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान चल रहे हैं. यह आंकड़ा सरकारी संस्थानों का है. बहुत सारे प्राइवेट इंस्टीट्यूट, कॉलेज और यूनिवर्सिटी 7 दिन के बेसिक कोर्स से लेकर पीएचडी तक करा रहे हैं. बेसिक कोर्स करने वालों में बड़े-बड़े रिटायर्ड अफसर भी शामिल होते हैं. खास बात यह है कि सभी सरकारी और प्राइवेट संस्थान दूध से संबंधित बकरी पालन के साथ ही मीट से संबंधित बकरियों के बारे में भी जानकारी देते हैं. गौरतलब रहे देश में भैंस के मीट एक्सपोर्ट समेत बकरे के मीट की भी खासी डिमांड रहती है.

Tags: Goat market, Mathura news, Meat Ban, Noida news

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