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Jewar Airport:- विस्थापित सभी किसानों के टूटे फूटे घर के बाहर रखे जेनेरेटर का क्या है राज

Jewar Airport:- विस्थापित सभी किसानों के टूटे फूटे घर के बाहर रखे जेनेरेटर का क्या है राज

आमिर

आमिर खान (फोटो -आदित्य कुमार)

बीते 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने एशिया का सबसे बड़ा और भारत का चौथा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भूमिपूजन किया.इस प्रोजेक्ट में आठ गांव के लगभग 10 हजार लोगों विस्थापित कर इन्हें अन्य स्थान पर बसाया गया है.देखिए क्या है वहां की स्थिति? किस हालात में रह रहे हैं लोग? 

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    नोएडा: बीते 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने एशिया का सबसे बड़ा और भारत का चौथा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भूमिपूजन किया.इस प्रोजेक्ट में आठ गांव के लगभग 10 हजार लोगों विस्थापित कर इन्हें अन्य स्थान पर बसाया गया है.क्या है वहां की स्थिति? किस हालात में रह रहे हैं लोग? जानने के लिए लोकल 18 की पहुंची जेवर एयरपोर्ट से 15 किलोमीटर दूर दयानतखेड़ा में. यहां एक पंक्ति से सभी घरों को बनाया जा रहा है कोई भी घर पूरा नहीं बना है.लोग तंबू लगाकर रहने को मजबूर है.

    एक दिन में तीन हजार रुपए का डीजल जल जाता है
    दयानतखेड़ा गांव के रहने वाले आमिर खान का घर अभी बना नहीं है,उनका ठेकेदार आगरा का रहने वाला है वह अभी वापस आगरा चला गया है.जब तक वो वापस नहीं आता तब तक घर आमिर का नहीं बन पाएगा.उनके घर के बाहर दो जेनेरेटर रखें हुए है. वो बताते हैं कि बिजली का कनेक्शन अभी तक हम लोगों को नहीं मिल पाया है. जिस कारण घर में रोशनी के लिए जेनेरेटर चलाना पड़ता है. घर बन रहा है तो उसके लिए मसाला बनाना पड़ता है उसके लिए भी जेनेरेटर चलाना पड़ता है. ऐसे में 20-20 घंटे तक जेनेरेटर चलता है और डीजल इतना महंगा है कि 3 हजार रुपये तक के डीजल रोज चलाना पड़ता है, यानी 90 हजार प्रतिमाह.

    पुराने बिजली कनेक्शन पर अभी भी आता है बिल
    आमिर खान बताते हैं कि छः महीने पहले ही मैंने पुराने घर का बिजली कनेक्शन कटवा लिया था.लेकिन बिजली बिल अभी भी आ रहे हैं. जब जमीन लेनी थी तो उन्होंने ने बोला था कि जो बिजली कनेक्शन पूराने घर पर थी वही आपको नए घर पर मिलेगा लेकिन महीनों बीत चुके है हमें कनेक्शन नहीं मिला.हम अंधेरे में रहने को मजबूर है लेकिन कोई हमारी सूध लेने नहीं आता. हमारे साथ गांव के स्कूल भी तो विस्थापित हुए थे,वो स्कूल अभी तक नहीं बन पाया है जिस कारण बच्चे पढ़ नहीं पा रहे है. यहां न तो सीवर है और न ही कोई अन्य सुविधाएं.

    (रिपोर्ट-आदित्य कुमार)

    Tags: Jewar airport

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