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Noida: पिता नहीं चाहते थे बेटी खेलकूद में आगे बढ़े, नोएडा की यह अफसर अब बच्चों को दे रही खेलकूद की ट्रेनिंग.

Noida: पिता नहीं चाहते थे बेटी खेलकूद में आगे बढ़े, नोएडा की यह अफसर अब बच्चों को दे रही खेलकूद की ट्रेनिंग.

अनिता

अनिता नागर जिला गौतमबुद्घ नगर में उप जिला क्रीड़ा अधिकारी खेलते हुए

जिला गौतमबुद्ध नगर में ही उप जिला क्रीड़ा अधिकारी के पद पर तैनात है. अनिता नागर (Anita nagar) पीसीएस अधिकारी बनने के बाद दर्जनों बच्चों को खेल के लिये प्रोत्साहित कर रही हैं

    नोएडा: कहा जाता है \’मुश्किलों में भाग जाना आसान होता है, हर पहलू जिंदगी का इम्तिहान होता है, डरने वाले को मिलता नहीं कुछ जिंदगी में लड़ने वालों के कदमों में जहान होता है.\’ इस बात को चरितार्थ किया है ग्रेटर नोएडा के छोटे से गांव की बिटिया अफसर अनिता नागर ने. अनिता नागर जब छोटी थी तो उन्हे खेलने का बड़ा शौक था.लेकिन गांव के माहौल में रहने के कारण उनके पापा नहीं चाहते थे कि अनिता खेलकूद में भाग ले. लेकिन अनिता की मां उनको सपोर्ट करती थी और आज अनिता पीसीएस अधिकारी है और अपने जिला गौतमबुद्ध नगर में ही उप जिला क्रीड़ा अधिकारी के पद पर तैनात है. अनिता नागर (Anita nagar) पीसीएस अधिकारी बनने के बाद दर्जनों बच्चों को खेलकूद प्रतियोगिता जैसे ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम की तैयारी करा रही है, वो कहती है कि जिन परेशानियों से मैं गुजरी हूं वो मैं किसी और को नहीं झेलने दूंगी. 2010 बैच की पीसीएस अधिकारी अनिता नागर ने लोकल 18 से ख़ास बात की.

    मां और भाई ने किया सपोर्ट
    अनिता नागर का दिल्ली में होने वाले सिविल सर्विस गेम्स 2021 के लिए भी चयन हुआ है. वो 24 से 30 सितंबर तक पीसीएस और आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के बीच राष्ट्रीय स्तर के खेल में बैडमिंटन खेलेंगी. जब हम उनके पास पहुंचे तो वो प्रैक्टिस कर रही थी, अनिता नागर कुर्सी पर बैठ जाती है और पसीना पोछते हुए कहती है कि बचपन में मैं सभी खेल खेलती थी, लडको वाले गेम्स तो खास तौर से खेलती थी. मेरा घर यही ग्रेटर नोएडा के एक गांव में है. मेरे गांव में लड़कियों का खेलना पाप जैसा था. इसलिए पापा मना करते थे कहते थे नहीं खेलना है लेकिन मां ने काफी सपोर्ट किया. भाई ने भी काफी सपोर्ट किया. अनिता बताती है कि जब मैं पांचवी क्लास में थी तो सबसे पहले मुझे ब्रोंज मेडल मिला था, मैं एक सौ मीटर रेस को चार सौ मीटर समझ के दौड़ी थी जिसके बाद मुझे मेडल मिला. उसके बाद मुझे हिम्मत हुई थी उसके बाद कई नेशनल और स्टेट लेवल के गेम्स मैने जीते. वो कहती है मैने यूपीपीसीएस की परीक्षा में भी गेम्स के वजह से ही आ पाई. अनिता मुस्कुराते हुए कहती है कि पापा तो मेरे नौकरी करने पर भी गुस्सा थे लेकिन मां ने कई बार समझाया तो उन्होंने इजाजत दी, एक तरह से अच्छा ही हुआ नहीं तो मैं पीसीएस नहीं रेलवे में होती क्योंकि मेरी पहली नौकरी रेल में ही लगी थी. उसके बाद पति ने मुझे बहुत सपोर्ट किया.

    मेरे सिखाई एक बच्ची अभी नेशनल जीती है, मैं खुद की तरह उसे सफर करने नहीं दूंगी.
    अनिता नागर अपने हाथ में रखे रैकेट को नीचे रखती है और कहती है, मैने जिस तरह से गेम में अपना कैरियर बनाया उस तरह से कई लोग आ सकते हैं.लेकिन सही मार्ग दर्शन के वजह से वो आ नहीं पाते इसलिए मैने आठ बच्चों को गेम्स सिखाना शुरू किया है, जिसको मैं सबकुछ उपलब्ध करवा रही हूं. इसके अलावा और कई बच्चे है जिनको मैं मुफ्त में कोचिंग और गाइडेंस देती हूं, ताकि वो खेल में आगे जा सके. मैने जो झेला वो मैं किसी और को नहीं झेलने दे सकती. अनिता नागर कहती है एक लड़की जिसको मैंने सिखाया है, वो अभी पैरा आर्चरी में नेशनल जीता है, उसके लिए खुश हूं वो बस एक बार ओलंपिक और कॉमनवेल्थ की तैयारी में लग जाएगी वहां जीत जाए तो मेरी मेहनत सफल हो जाएगी.

    बेटियों के लिए खेल में अपार संभावनाएं हैं, पैरेंट्स को ने बेझिझक बेटियों को आगे आने देना चाहिए.
    अनिता नागर की पोस्टिंग दो माह पहले ही जिला गौतमबुद्ध नगर में हुई है.वो कहती हैं कि गांव में लोग जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं. 2010 के बाद जब से कॉमनवेल्थ गेम्स हुए है तब से देश में खेल का चलन बढ़ा है, सरकार भी कई योजनाएं चला रही है. मैने कोच के बिना ट्रेनिंग ली थी वो अब समस्या नहीं है.सरकार तो कोच दे रही है साथ ही निजी कोच भी ले सकते हैं. सरकार ने तो अब 15 साल की छात्राओं के लिए हॉस्टल भी खोल दिया है. लेकिन हम लोगों के समय कुछ नहीं था. फिर भी पीएचडी और नेट जेआरएफ गेम्स से ही पूरा किया था.
    (रिपोर्ट – आदित्य कुमार)

    Tags: Noida news

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