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Noida:-मिलिए मीनाक्षी और वनिता से जिन्होंने महिला सशक्तिकरण के नाम कर दी अपनी जिंदगी

Noida:-मिलिए मीनाक्षी और वनिता से जिन्होंने महिला सशक्तिकरण के नाम कर दी अपनी जिंदगी

Minakshi

Minakshi tyagi (right) Vanitha bhatt (left)

भारत में महिलाओं को आगे बढ़ाया जा सके इसके लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई.लेकिन कई बार समाज की भागीदारी न होने के कारण कई योजनाएं जरूरतमंद लोगों तक पहुंच ही नहीं पाए. इसका उदाहरण नोएडा में देखने को मिला,जो महानगर उत्तर प्रदेश का शो विंडो कहा जाता है वहां पर आज भी कई ऐसी महिलाएं है जिनका बैंक में कोई खाता नहीं है.

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    <b>नोएडा</b>: किसी ने महिला शक्ति के बारे में लिखा है ‘तुम हो शक्ति तुम हो नारी, तुमसे है ये दुनियां सारी. तुम जीयोगे हम जिएंगे जी, तुमसे है ये दुनियां सारी’.भारत में महिलाओं को आगे बढ़ाया जा सके इसके लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई.लेकिन कई बार समाज की भागीदारी न होने के कारण कई योजनाएं जरूरतमंद लोगों तक पहुंच ही नहीं पाए. इसका उदाहरण नोएडा में देखने को मिला,जो महानगर उत्तर प्रदेश का शो विंडो कहा जाता है वहां पर आज भी कई ऐसी महिलाएं है जिनका बैंक में कोई खाता नहीं है. ऐसे में वो सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ कैसे ले? तो इसका जवाब नोएडा की मीनाक्षी त्यागी और विनीता भट्ट देती हैं. वो कहती हैं कि समाज में हमारा भी योगदान होना चाहिए. तभी हम सब आगे बढ़ सकते हैं.

    <b>महिलाओं को बैंक खाता खुलवाने में करती है मदद</b>
    मीनाक्षी नोएडा में रहती हैं और महिला केंद्रित एक एनजीओ नारी प्रगति सोशल फाउंडेशन की अध्यक्ष भी हैं, वो बताती हैंकि किसी एक घर की महिला को सशक्त बनाने से पूरा परिवार सशक्त होता है.इसलिए हम महिलाओं को सशक्त बनाने का काम करते हैं. हमारा मानना है कि महिलाएं तभी आगे आ पाएंगी जब वो आर्थिक रूप से आगे बढ़ेगी. ऐसे में हमने उनके आर्थिक विकास के लिए काम करने की जब कोशिश की लेकिन पता चला कि उनका खाता ही नहीं है. इसलिए हमने सबसे पहले यही सोचा कि पहले महिलाओं के खाते खोले जाए. शुरुआत में हमने सोंचा था कि सौ या दो सौ महिलाओं से ज्यादा की क्या जरूरत पड़ेगी? लेकिन मुझे देख कर आश्चर्य हुआ कि हजारों की संख्या में महिलाओं के बैंक में खाते ही नहीं है. हमने सैंकड़ो महिलाओं के खाते खुलवाए और सिलसिला अभी भी जारी है.
    <b>अज्ञानता और सामाजिक न्याय की कमी के कारण होता है ये</b>
    नारी प्रगति सोशल फाउंडेशन के महासचिव वनिता भट्ट है, वो मूलतः कश्मीर से है लेकिन वहां से 1990 के दशक में जो स्थिति पैदा हुई उसके कारण उन्हें वहां से आना पड़ा था. उस दौरान वो नौवी क्लास में पढ़ती थी.लेकिन अगर हम पढ़े लिखे नहीं होते तो हम क्या करते? इस पीड़ा को मैं समझती हूं, जब भी किसी से पूछती हूं कि खाता क्यों नहीं खुला तो वो बताती है मुझे लिखना पढ़ना नहीं आता. फॉर्म कोई भर के नहीं देता इसलिए खाता नहीं खुला. अब आप सोचिए आज के जमाने में भी शिक्षा के अभाव की वजह से हजारों महिलाओं का खाता नहीं खुला.
    <b>कैंप एक बेहतर विकल्प है लोगों तक पहुंचने का</b>
    अमरनाथ प्रसाद भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी है और वो नोएडा में पोस्टेड है. वो बताते हैं कि कई कारण ऐसे है जिस कारण खाता खुलवाने में समस्या होती है. लेकिन खाता नहीं खुलना देश के विकास के लिए सही निशानी नहीं है. जैसे ही मुझे पता चला कि कई महिलाओं के खाते नहीं है. हमने तुरंत नोएडा में जगह जगह कैंप लगाने का कार्य शुरू किया.साथ ही हम महिलाओं को खाता के महत्व के बारे में भी बताते हैं.

    <b>(रिपोर्ट -आदित्य कुमार)</b>

    Tags: State Bank of India

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