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यमुना एक्सप्रेसवे पर कहां-कहां हैं एक्सीडेंट-प्रोन एरिया? हादसों में कमी आई मगर कई काम बाकी

यमुना एक्सप्रेसवे पर कहां-कहां हैं एक्सीडेंट-प्रोन एरिया? हादसों में कमी आई मगर कई काम बाकी

यमुना एक्सप्रेसवे पर इस साल कम हादसे हुए हैं. File Photo

यमुना एक्सप्रेसवे पर इस साल कम हादसे हुए हैं. File Photo

Yamuna Expressway News: एक रिपोर्ट के मुताबिक यमुना एक्सप्रेसवे पर 50 प्रतिशत हादसे जेवर टोल प्लाजा (Jewar Toll Plaza) के तहत आने वाले जीरो पाइंट से लेकर 57 किमी के क्षेत्र में होते हैं. यहां दनकौर, दयानतपुर और फलैदा में सबसे ज्यादा वाहन आपस में टकराते हैं. मथुरा की बात करें तो यहां 58 किमी से लेकर 110 किमी के क्षेत्र में 35 प्रतिशत हादसे होते हैं. नौहझील, मांट और सुरीर में ज्यादातर हादसे होते हैं. आखिर में आगरा में आने वाले 111 से लेकर 165 किमी के खंदौली थाना इलाके में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं.

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    नोएडा. यमुना एक्सप्रेसवे पर इस साल कम हादसे हुए हैं. मौतों का आंकड़ा भी कम हो गया है. बीते 5 साल की बात करें तो उसके मुकाबले 50 फीसद से भी कम हादसे हुए हैं. हादसे कम होने के पीछे सुप्रीम कोर्ट की पहल पर दी गई आईआईटी दिल्ली और सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) की एक रिपोर्ट है. पहले की बात करें तो एक साल में 1000 से ज्यादा एक्सीडेंट हो रहे थे. मौत का आंकड़ा 140 के पार था.

    2021 में नवंबर तक यमुना एक्सप्रेसवे पर कुल 389 हादसे हो चुके थे.. जबकि इन हादसों में मरने वालों का आंकड़ा 123 है. कहा गया है कि सीआरआरआई और आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों और मौतों का यह सबसे कम आंकड़ा है. जबकि 2015 में एक्सप्रेसवे पर हुए 919 हादसों में 143 लोगों की जान गई थी.

    2016 में हुए 1193 हादसों में 128 लोगों ने रोड एक्सीडेंट में अपनी जान गवांई थी. जबकि एक आरटीआई के मुताबिक यमुना एक्सप्रेसवे पर अगस्त 2012 से लेकर जनवरी 2018 तक 5000 एक्सीडेंट हुए और उसमे 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. इन्हीं हादसों में करीब 2000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

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    यह सुझाव दिए थे IIT दिल्ली और CRRI ने

    आईआईटी दिल्ली और सीआरआरआई ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर एकसीडेंट रोकने के लिए कुछ सुझाव दिए थे. इसमे से एक अहम सुझाव यह भी था कि सेंट्रल वर्ज पर क्रैश बैरियर लगाए जाएं. जिससे की एक्सीडेंट होने पर एक साइड का वाहन दूसरी साइड पर जाकर जानलेवा न बन जाए. इसके साथ ही यह भी कहा था कि दो टोल बूथ के बीच में औसत स्पीड तय की जाए और जो इसका उल्लंघन करे उस पर फाइन लगाया जाए.

    एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह पर स्पीड कैमरे के बारे में लिखा जाए जिससे वाहन चालक को फाइन और कार्रवाई का डर बना रहे. हर रोज एक्सप्रेसवे के अलग-अलग स्थानों पर स्पीडिंग और जिगजैगिंग की चैकिंग के लिए गश्ती वाहन तैनात किए जाएं. ऐसे वाहन जो एक्सप्रेसवे के किनारे रुक जाते हैं, उन पर रोक लगनी चाहिए. टोल बूथ पर वाहन चालकों की मदिरापान की औचक जांच होनी चाहिए. यातायात नियमों को लागू करवाने का काम यूपी पुलिस को करना है.

    Tags: IIT, Road Accidents, Supreme court of india, Yamuna Expressway

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