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यमुना एक्सप्रेसवे पर ओवर स्पीड दौड़ रहे कार-बाइक पर ऐसे रखी जाएगी निगाह, जानें प्लान

आईआईटी दिल्ली के सर्वे में सामने आया है कि एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा एक्सीडेंट रांग साइड चलने, गलत तरीके से ओवर टेक करने, ओवर स्पीड और चालक को झपकी आने के चलते हो रहे हैं. Demo Pic

आईआईटी दिल्ली के सर्वे में सामने आया है कि एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा एक्सीडेंट रांग साइड चलने, गलत तरीके से ओवर टेक करने, ओवर स्पीड और चालक को झपकी आने के चलते हो रहे हैं. Demo Pic

यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर होने वाले एक्सीडेंट के संबंध में आईआईटी, दिल्ली (IIT Delhi) ने एक रिपोर्ट जारी की थी. अप्रैल 2019 में जारी हुई यमुना एक्सप्रेसवे की रोड सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक 2012 से लेकर 2018 तक के एक्सप्रेसवे पर हादसों (Accident) के समय का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि शाम 6 बजे से लेकर रात 12 बजे तक 21 फीसद और रात 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक 43 फीसद हादसे होते हैं.

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    नोएडा. मई के 15 दिनों की ही बात करें तो यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर लगातार एक्सीडेंट हो रहे हैं. कभी तीन तो कभी पांच व्यक्तियों की जान एक साथ जा रही है. आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के सर्वे में सामने आया है कि एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा एक्सीडेंट (Accident) रांग साइड चलने, गलत तरीके से ओवर टेक करने, ओवर स्पीड और चालक को झपकी आने के चलते हो रहे हैं. एक्सप्रेसवे पर कई जगह कैमरे इस तरह लगे हैं कि रांग साइड चलने वाले पकड़ में नहीं आ पाते हैं. इसी को देखते हुए कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है. वहीं ओवर स्पीड (Over Speed) वाहनों को दौड़ाने वालों को पकड़ने के लिए भी पेट्रोलिंग वाहनों पर स्पीड गन लगाई जा रही हैं.

    यमुना एक्सप्रेसवे पर होने जा रहा है यह बदलाव

    जानकारों की मानें तो अभी यमुना एक्सप्रेसवे पर तीन स्पीड गन लगी हुई हैं. वाहनों की संख्या को देखते हुए यह नाकाफी साबित हो रही हैं. स्पीड गन की कम संख्या का फायदा उठाकर कार समेत कई बड़े वाहन चालक एक्सप्रेसवे पर अपने वाहनों को ओवर स्पीड दौड़ाते हैं. और जैसे ही स्पीड गन की रेंज में आने वाले होते हैं तो वाहन की रफ्तार को कम कर लेते हैं.

    इसी को देखते हुए एक्सप्रेसवे पर अब स्पीड गन की संख्या तीन से 15 की जा रही है. अब ज्यादातर स्पीड गन एक्सप्रेसवे पर पेट्रोलिंग करने वाले वाहनों पर लगाई जाएंगी. वहीं रांग साइड चलने वाले वाहनों पर भी नजर रखने के लिए कैमरों की संख्या 36 से 48 की जा रही है.

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    सुबह से शाम तक 36 तो रात को होते हैं 64 फीसदी हादसे

    सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक 36 फीसद हादसे होते हैं. इस प्रकार शाम 6 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक 64 फीसद हादसे एक्सप्रेसवे पर हो जाते हैं और इसमें भी मुख्य रूप से यह हादसे रात 12 बजे से 6 बजे तक होते हैं. केसी जैन का कहना है कि आईआईटी, दिल्ली की इसी रिपोर्ट के आधार पर यह मांग की गई है कि रात में 1 बजे से लेकर 4 बजे तक एक्सप्रेसवे पर किसी भी वाहन का आवागमन पूरे वर्ष नहीं होना चाहिए.

    ऐसे समय पर वाहन चालक भी थका होता है और झपकी लग जाने से हादसा हो जाता है. 100 किलोमीटर की गति से यदि वाहन चल रहा हो तो एक सैकेण्ड के समय में वाहन 28 मीटर आगे बढ़ जाता है. पल भर का झौंका तेज चल रहे वाहन को कहीं का कहीं पहुंचा देता है और नतीजा हादसा होता है.

    Tags: CCTV, IIT, Road accident, Yamuna Expressway

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