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promoters and builders can give the information of their pending project cases on up rera portal flat registry in noida and greater noida dlnh

बिल्डर्स को बतानी होगी प्रोजेक्ट में देरी की वजह, यहां देंगे जानकारी

फ्लैट खरीदार ही नहीं अब बिल्डर्स और प्रोमोटर भी अपनी परेशानी यूपी रेरा को बता सकेंगे

फ्लैट खरीदार ही नहीं अब बिल्डर्स और प्रोमोटर भी अपनी परेशानी यूपी रेरा को बता सकेंगे

नोएडा एस्टेट फ्लैट ओनर्स मेन एसोसिएशन (Nefoma) अध्यक्ष अन्नू खान का कहना है, “नोएडा-ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) में किसी भी बिल्डर को प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद संबंधित अथॉरिटी कम्पलीशन सर्टिफिकेट देती है. यह सर्टिफिकेट तब मिलता है जब बिल्डर अथॉरिटी का सभी तरह का बकाया जमा करा देता है. इसके बाद ही बिल्डर खरीदार को फ्लैट की रजिस्ट्री (Flat Registry) कर सकता है. लेकिन एनसीआर (NCR) के इन शहरों में बहुत सारे ऐसे प्रोजेक्ट हैं जहां 10-12 साल बीत जाने के बाद अभी तक रजिस्ट्री नहीं हुई है.

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    नोएडा. बिल्डर्स का प्रोजेक्ट लेट क्यों हो रहा है, काम चलते-चलते आखिर बंद क्यों हो गया? फ्लैट की रजिस्ट्री (Flat Registry) क्यों नहीं हो रही हैं? यह वो सवाल हैं जिनके जवाब हर एक उस फ्लैट खरीदार (Flat Buyers) को चाहिए होते हैं जिन्होंने 90 फीसद तक या पूरा पैसा दे दिया है और अभी तक फ्लैट नहीं मिला है. लेकिन अब ऐसे सवालों के जवाब देना हर बिल्डर्स के लिए अनिवार्य होगा. यूपी रेरा (UP RERA) ने यह आदेश जारी किया है. लेकिन बिल्डर्स तभी ऐसे सवालों के जवाब देगा जब उसके प्रोजेक्ट से जुड़ा काम राज्य सरकार की किसी अथॉरिटी में अटका होगा. गौरतलब रहे नोएडा (Noida)-ग्रेटर नोएडा में 1.25 लाख से ज्यादा ऐसे फ्लैट खरीदार हैं जिन्होंने पैसा दे दिया है लेकिन अभी तक फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हुई है.

    बिल्डर्स यूपी रेरा को बताएंगे अपनी परेशानी

    फ्लैट खरीदार ही नहीं अब बिल्डर्स और प्रोमोटर भी अपनी परेशानी यूपी रेरा को बता सकेंगे. इतना ही नहीं उनकी परेशानी पर यूपी रेरा संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई भी करेगा. यूपी रेरा के अध्यक्ष राजीव कुमार का कहना है, “यूपी रेरा के सामने समय-समय पर इस तरह के मामले आते रहते हैं जिसमे प्रोमोटर यह बताते हैं कि उनकी परियोजना से संबन्धित मामले विकास प्राधिकरण में लम्बित हैं, जिसके चलते परियोजना के पूरा होने में रुकावट आ रही है. यह भी देखा गया है कि ज्यादातर मामले सड़क का निर्माण नहीं होने, नक्शा पास होने में देरी,  फिर संबन्धित प्राधिकरण द्वारा अवस्थापनाओं का विकास न करने से जुड़े होते हैं.”

    इस तरह के मामलों के दूर न होने का असर प्रोजेक्ट पर पड़ता है. प्रोजेक्ट वक्त से पूरे नहीं होते हैं. साथ ही प्रोमोटर और घर खरीदारों पर भी असर पड़ता है. वक्त से परियोजना पूरी न होने पर होम बायर्स कब्जा पाने के लिए परेशान रहते हैं.

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    प्रोमोटर और बिल्डर को भी समय से परियोजना पूर्ण करने में परेशानी उठानी पड़ती है. इन सभी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए ही यह तय किया गया है कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जाए जहां प्रोमोटर उत्तर प्रदेश के किसी भी विकास प्राधिकरण में लम्बित मामलों की जानकारी यूपी रेरा को दे सकें.

    इसी को देखते हुए यूपी रेरा एक माइक्रो वेबसाइट का लिंक यूपी रेरा के पोर्टल के होमपेज पर देगी. इस लिंक पर जाकर प्रोमोटर और बिल्डर्स विकास प्राधिकरण से जुड़ी अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे. साथ ही यह सुविधा उन प्रमोटर्स के लिए भी उपलब्ध होगी जो रेरा में अपनी परियोजना का पंजीकरण करवाने के लिए विकास प्राधिकरणों से अनापत्तियाँ तथा स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए कोशिश कर रहे हैं. इस सिस्टम के तहत यूपी रेरा के पोर्टल पर दर्ज होने वाला केस सम्बंधित विकास प्राधिकरण के डैशबोर्ड पर भी दिखेगा.

    Tags: Greater Noida Authority, Noida Authority, Own flat, UP RERA

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