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thousands of crores rupees stuck between the authority and builder of 2 lakh flat buyers in noida and greater noida dlnh

AB के बीच 2 लाख फ्लैट खरीदारों के फंसे हजारों करोड़, जानें पूरा मामला

अफसोस की कोई 8 साल से तो कोई 15 साल से घर मिलने की आस लगाए बैठा है. demo pic

अफसोस की कोई 8 साल से तो कोई 15 साल से घर मिलने की आस लगाए बैठा है. demo pic

आम्रपाली के कुछ अधूरे फ्लैट को नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) पूरा करा रही है. सुपरटेक (Supertech) के दिवालिया होने का मामला एनसीएलटी (NCLT) में पहुंच चुका है. लॉजिस्टिक सिटी भी इसी तरह के मामले में एनसीएलटी में पहुंच चुकी है. 40 के करीब बिल्डर्स की लगभग 600 करोड़ रुपये की प्रापर्टी सीज हो चुकी है. कुछ अधूरे प्रोजेक्ट यूपी रेरा (UP Rera) के आदेश पर पूरे हो रहे हैं. लेकिन 2 लाख फ्लैट खरीदारों  (Flat Buyers) को कहीं से भी राहत नहीं मिल रही है.

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    नोएडा. सोचा था नए बस रहे शहर (City) में अपना भी एक नया घरौंदा होगा. एक खूबसूरत घर का ख्वाब देखते हुए पाई-पाई कर जो भी जमा किया था वो बिल्डर (Builder) को दे दिया. यह वो 2 लाख फ्लैट खरीदार (Flat Buyers) हैं जिन्होंने फ्लैट कीमत का 70 फीसद से लेकर 100 फीसद तक रकम जमा करा दी. लेकिन अफसोस की कोई 8 साल से तो कोई 15 साल से घर मिलने की आस लगाए बैठा है. लेकिन एबी यानि अथॉरिटी और बिल्डर के बीच ऐसा फंसा कि अपने ही फ्लैट के सामने किराए के मकान में रहते हुए बैंक की किस्त और फ्लैट का किराया देने को मजबूर है. मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में भी पहुंच गया है. नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी (Greater Noida Authority) बिल्डर से बकाया मिलने पर ही रजिस्ट्री करने की कह रही हैं. लेकिन खरीदारों की आस अब एक के बाद एक बिल्डर्स के दिवालिया होने से टूटने लगी है.

    एनसीएलटी में मामले जाते ही मायूस हुए फ्लैट खरीदार

    नोएडा एस्टेट फ्लैट ओनर्स मेन एसोसिएशन (नेफोमा) अध्यक्ष अन्नू खान की मानें तो यूपी रेरा और सुप्रीम कोर्ट में लड़ी गई एक लम्बी लड़ाई के बाद उम्मीद जागी थी कि दागी बिल्डर्स की प्रापर्टी सीज कर उसकी नीलामी से आने वाली रकम पीड़ित फ्लैट बायर्स में बांट दी जाएगी. लेकिन जब यह मौका आया तो उस लिस्ट के बिल्डर दिवालिया होने लगे.

    वो अपना मामला एनसीएलटी में ले गए. जेपी बिल्डर के 25 हजार फ्लैट खरीदारों का मामला पहले से ही एनसीएलटी में चल रहा है. लेकिन 5 साल बीतने के बाद भी सभी फ्लैट खरीदार खाली हाथ हैं. लॉजिस्टिक सिटी, सुपरटेक और यूनीटेक एनसीएलटी में पहले ही जा चुके हैं.

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    ओसी-सीसी का पैसा नहीं तो रजिस्ट्री भी नहीं हो रही

    फ्लैट खरीदार मनीष शर्मा का कहना है कि फ्लैट का कब्जा देने के दौरान बिल्डर ने पूरा पैसा ले लिया. रजिस्ट्री के लिए पूछा तो जवाब मिला कि कुछ दिन में हो जाएगी. लेकिन 7 साल बीतने के बाद भी आज तक रजिस्ट्री नहीं हो सकी है. अथॉरिटी जाने पर जवाब मिलता है कि आपके बिल्डर ने ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) का पैसा जमा नहीं किया है. इस तरह के कई मामले सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं. कोर्ट ने फैसला सुनाकर उसे सुराक्षित रख लिया है.

    नीलामी से हट गए सुपरटेक-लॉजिस्टिक सिटी

    नीलामी में शामिल दोनों कंपनियों सुपरटेक और लॉजिक्स सिटी को अब बाहर कर दिया गया है. एनसीएलटी की कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया गया है. एनसीएलटी के इस कदम से दोनों कंपनी के बकायदारों को भी बड़ा झटका लगा है. नीलामी से आने वाली रकम बकायदारों को दी जानी थी. लेकिन एक बार फिर बकायदारों का करोड़ों रुपया अटक गया है. अब जब तक एनसीएलटी में यह मामला सुलझ नहीं जाता संबंधित फ्लैट खरीदारों की रकम अटकी रहेगी.

    Tags: Noida Authority, Supertech twin tower, Supreme court of india, UP RERA

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