ट्रांसपोटर्स की देशव्यापी हड़ताल से लाखों प्रभावित, करोड़ों का नुकसान!

अब तक हड़ताल का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है. क्योंकि ट्रांसपोर्टरों को इस मामले में जल्द ही कुछ समाधान निकलने की उम्मीद है. अगर हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो सामान्य वस्तुओं की आपूर्ति और उपलब्धता बाधित होगी. इससे देश को करोड़ों का नुकसान हो सकता है.

News18Hindi
Updated: July 20, 2018, 4:57 PM IST
ट्रांसपोटर्स की देशव्यापी हड़ताल से लाखों प्रभावित, करोड़ों का नुकसान!
प्रतीकात्मक तस्वीर.
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Updated: July 20, 2018, 4:57 PM IST
देशभर में शुक्रवार से ट्रक ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है. डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने, विभिन्‍न राज्‍यों में इसके अलग-अलग दाम खत्‍म करने और टोल टैक्स में कमी करने जैसी मांगें रखते हुए ट्रक ऑपरेटर्स ने 17 मई को इस हड़ताल का ऐलान किया था. हालांकि, अब तक हड़ताल का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है. क्योंकि ट्रांसपोर्टरों को इस मामले में जल्द ही कुछ समाधान निकलने की उम्मीद है. अगर हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो सामान्य वस्तुओं की आपूर्ति और उपलब्धता बाधित होगी. इससे देश को करोड़ों का नुकसान हो सकता है.

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस कोर कमिटी (एआईएमटीसी) के चेयरमैन बल मलकीत सिंह ने बताया कि इस मसले पर गुरुवार को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और वित्त मंत्री पीयूष गोयल से अलग-अलग हुई बातचीत बेनतीजा रही. हालांकि गडकरी ने इस बात के संकेत दिए हैं कि दो ड्राइवर्स रखने की अनिवार्यता से राहत दी जा सकती है. जहां तक फिटनेस की बात है तो हर साल छोड़कर इसे हर दूसरे साल कराने की रियायत दी जा सकती है. फिलहाल सरकार ने बातचीत के रास्ते खुले रखने की बात कही जा रही है.

एआईएमटीसी के महासचिव नवीन गुप्ता ने कहा कि वित्त मंत्री पीयूष गोयल के साथ गुरुवार रात एक बजकर 30 मिनट तक चर्चा जारी रही, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने के कारण आज सुबह हड़ताल पर जाने का फैसला किया गया. उन्होंने कहा कि संगठन को शुक्रवार को भी संबंधित मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की उम्मीद है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तीन महीने का समय मांगा था. आज कुछ ठोस समाधान निकलने की उम्मीद कर रहे हैं.

साल 1936 में बने इस संगठन के मुताबिक विभिन्न राज्यों में करीब 93 लाख ट्रक और करीब 50 लाख बसों, टूरिस्ट टैक्सी और कैब ऑपरेटर्स उनसे जुड़े हैं और इनके पहिए थम गए हैं. सुबह छह बजे से शुरू हड़ताल की वजह से रोजाना करीब चार हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है.

मुंबई में आठ हजार बस और महाराष्ट्र में 40 हजार और मुंबई के आठ हजार बसों के जुड़ाव वाले संगठन स्कूल बस एंड कंपनी बस ऑनर्स एसोशिएसन ऑफ महाराष्ट्र ने भी हड़ताल का समर्थन किया है. इस संगठन का कहना है कि शुक्रवार को सारी बसें हड़ताल पर हैं.

ऑल इंडिया कंफेडरेशन ऑफ गुड्स ऑपरेटर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर यूपी के भी 50 हजार ट्रांसपोर्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इनकी मांग है कि सरकार डीजल को जीएसटी के अंतर्गत लाए और तीन महीने के भीतर दामों को तय करे. इसमें अवैध खनन में ट्रांसपोर्टरों को निशाना बनाए जाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं. यूपी के ट्रांसपोर्टरों के इस हड़ताल में शामिल होने से प्रदेश में रोजाना 10 से 15 करोड़ का नुकसान होगा. यूपी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से मिलकर अपनी बात रखेंगे.

ट्रक ऑपरेटर्स के देशव्यापी चक्का जाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल को उत्तर भारत की बड़ी यूनियनों ने समर्थन दिया है. हिमाचल प्रदेश में ट्रक ऑपरेटर यूनियन नालागढ़ ने गुरुवार की शाम पांच बचे यह भी घोषणा कर दी कि शुक्रवार को ट्रकों की लोडिंग और अनलोडिंग भी नहीं होगी. इस चक्का जाम में बीबीएन के तहत ट्रक यूनियन नालागढ़ के अधीन आने वाले साढ़े 10 हजार ट्रक-ट्रॉला शामिल रहेंगे. हालांकि आवश्यक वस्तुओं सेब और सब्जी वाले वाहनों को छूट रहेगी.
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर ऑपरेटर्स की मांग पूरी करवाने को लेकर हिमाचल प्रदेश की कोई भी यूनियन माल ढुलाई नहीं करेगी और न ही शुक्रवार की कोई बुकिंग ली जाएगी. हिमाचल ट्रक ऑपरेटरर्स फेडरेशन के चेयरमैन एवं ट्रक यूनियन नालागढ़ के प्रधान चौधरी विद्यारतन ने कहा कि शुक्रवार को देशव्यापी चक्का जाम हो रहा है, जिसमें हिमाचल इकाई भी पूर्ण रूप से समर्थन कर रही है. उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के 80 हजार के करीब ट्रक ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं.

इस देशव्यापी हड़ताल में रांची की सभी यूनियनों ने शामिल होने का ऐलान कर दिया है. रांची में बसों और ट्रकों के साथ ही ऑटो नहीं चल रहे हैं. हड़ताल को सफल बनाने के लिए गुरुवार को झारखंड के विभिन्न संगठनों से जुड़े ट्रांसपोर्टर्स ने अलग-अलग बैठकें कर रणनीति बनाई. झारखंड मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष ललित ओझा और झारखंड बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण बुधिया ने कहा कि वे सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. इससे प्रदेश में रोजाना 30 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा. कोयला और अन्य खनिजों के उत्पादन और ढुलाई पर भी व्यापक असर पड़ेगा.

पश्चिम बंगाल में करीब डेढ़ लाख ट्रक ऑपरेटर्स ने हड़ताल को समर्थन दिया है. ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ऑफ बंगाल के उपाध्यक्ष तपन भादुड़ी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल एक कंज्यूमिंग स्टेट है यानी कई खाद्यानों व अन्य जरूरी सामानों के लिये इसे दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है. हड़ताल की वजह से बीते चार-पांच दिन से देश के कई हिस्सों में ट्रक ऑपरेटर्स के एक बड़े हिस्से ने बुकिंग बंद कर दी है. इस हालात में बंगाल में इसका काफी प्रभाव पड़ सकता है. मछली, दाल और अन्य खाद्यानों के दाम में इजाफा होने के आसार है. भादुड़ी ने कहा कि राज्य में हड़ताल की मांगों में ओवरलोडिंग बंद किये जाने की मांग को भी जोड़ा गया है.

वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हड़ताल का कम असर देखने को मिला. ओखला, आजादपुर, गाजीपुर जैसे मंडियों में सब्जियों, फल वगैरह की आवक और डेयरियों में दूध भी समय पर पहुंचा. वहीं व्यापक असर का आकलन सोमवार को हो सकेगा. हड़ताल करने वाले संगठन ने इस चक्का जाम में आवश्यक वस्तुओं को दूर रखा है. उसका कहना है कि वह आम जन के लिए समस्याएं पैदा नहीं करना चाहते हैं.

ये हैं ट्रांसपोर्ट्स की मांगें

प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने मांग की कि डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए या फिर मौजूदा समय में इनपर केन्द्रीय और राज्यों की तरफ से लगने वाले टैक्स को कम किया जाए.

टोल कलेक्शन सिस्टम को भी बदला जाए क्योंकि टोल प्लाजा पर र्इंधन और समय के नुकसान से सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है.

थर्ड पार्टी बीमा प्रिमियम पर जीएसटी की छूट मिले और इससे एजेंट्स को मिलने वाले अतिरिक्त कमिशन को भी खत्म किया जाए.

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44AE में प्रिजेंप्टिव इनकम के तहत लगने वाले टीडीएस को बंद किया जाए और र्इ-वे बिल में संशोधन हो.

बसों और पर्यटन वाहनों के लिए नेशनल परमिट दिए जाएं.

देश की 19 बंदरगाहों पर कंजेक्शन चार्ज खत्म हो.

(एजेंसी इनपुट के साथ)
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