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J&k-कश्मीरी पंडितों की जमीन वापस दिलाने के लिए लॉन्च वेबसाइट के बाद जानिए कश्मीरियों का मन

कश्मीरी

कश्मीरी पंडित क्या कश्मीर वापस लौटना चाहते है!

कश्मीरी पंडितों (Kashmiri pandit) के लिए यह एक अच्छी पहल मानी जा रही है लेकिन जो कश्मीर के आम नागरिक है वो क्या सोचता है सरकार के इस स्टेप के लेकर

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    नोएडा: साल 1989-1990 में भारत के अभिन्न अंग जम्मू कश्मीर (Jammu & kashmir) से लाखों कश्मीरी पंडितों को घाटी में बढ़ रहे आतंकवाद के कारण विस्थापित होना पड़ा था, उसके बाद वह अपना व्यापार और संपत्तियों को कश्मीर में ही छोड़ कर देश और विदेशों में के अलग अलग स्थानों पर रहने लगे. ठीक तीस साल बाद भारत सरकार ने जम्मू -कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बना देने के बाद कश्मीरी पंडितों के हित के लिए कुछ प्रयास करने शुरू किए है. कुछ दिनों पहले जम्मू कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने दो वेबसाइट को लॉन्च किया था. जिसके माध्यम से कश्मीर से विस्थापित लोग रजिस्टर कर अपनी जमीन वापस पा सकते हैं.
    कश्मीरी पंडितों (Kashmiri pandit) के लिए यह एक अच्छी पहल मानी जा रही है.लेकिन जो कश्मीर के आम नागरिक है वो क्या सोचते हैं सरकार के इस कदम को लेकर. यह जानने के लिए हमने नोएडा -ग्रेटर नोएडा में रहने वाले कश्मीरी नागरिकों से बात की.

    अंतिम सांस कश्मीर में लूं यही अच्छा रहेगा
    कुलदीप खासु 1990 में दवाइयों को अपना बहुत बड़ा व्यापार छोड़ कर पूरे परिवार के साथ नोएडा आ गए थे.यहां फिर से जीरो से शुरुआत की और फिर से अपना व्यापार जमाना शुरू किया. कुलदीप खासु हाथों में अपने घर के फोटो दिखाते हुए कहते हैं कि मेरा तीन मंजिला मकान था. उसे उन लोगों ने जला दिया.उनका कहना है कि हालात ठीक हो जाएंगे तो हम वापिस जा सकते हैं.कुलदीप बताते हैं कि पांच साल पहले मै कश्मीर गया था.मै अपने पुराने घर के पास घंटों बैठा रहा. जहां उन्होंने अपने यार दोस्तों के साथ बचपन बिताया था.अब तो अंतिम सांस अपने घर पर लूं ये बहुत अच्छा रहता.

    कश्मीर सबकुछ कैसे बर्दाश्त करले
    ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी के छात्र उमर बताते हैं कि जम्मू कश्मीर में लोग सब शांति से रहना चाहते हैं, ऐसे में सरकार का यह कदम सराहनीय है. लेकिन इस कदम से वहां रह रहे लोगों को कोई समस्या ना हो सरकार को यह देखना चाहिए. जब कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर छोड़ा था तो कई लोगों ने उनकी जमीन खरीदी थी, भले ही वो सस्ती जमीन हो लेकिन खरीदी थी. किसी से छीना नहीं था. अब जब वह जमीन हमसे ली जाएगी तो हमारे साथ अन्याय होगा कैसे ये कोई बर्दाश्त करले?
    क्या हमारी सुरक्षा की गारंटी है!
    नोएडा में 1989 में आए अनिल धर नोएडा में कश्मीरी पारंपरिक चीजों की दुकान चलाते हैं वो बताते हैं कि सरकार का कदम तो बढ़िया है.लेकिन क्या हमारी जान की कोई गारंटी है? हमें तो यह पहले जानना है कि हमें वहां से निकाला क्यों? हमारी क्या गलती थी? हमारे साथ जिसने गलत किया उन्हे कोई सजा भी नहीं मिली.

    सरकार बदल जाए तो क्या होगा?
    क्रिस्टी खासु दसवी क्लास में थे जब वो कश्मीर से नोएडा आ गए थे. वो बताते है हमारी जड़ें तो वहीं है, लेकिन डर है कि अगर सरकार बदल जाए तो क्या होगा? वैसे रूल्स बन जाए तो मानना लोगों को पड़ता है.लेकिन उस वक्त भी तो लोकतांत्रिक सरकार थी फिर भी हमें भागना पड़ा था. तो अगर बीजेपी (Bjp) हटती है तो फिर क्या रवैया होगा नई सरकार का? राजनीति में हमारी बलि न चढ़ जाए.

    लोग सब शांति चाहते हैं.
    21 वर्षीय फारुख अब्दुल्ला शारदा यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते है और यही हॉस्टल में रहते हैं. वो बताते हैं कि कश्मीर में लोग सब शांति से रहना चाहते हैं. शांति से ही विकास होगा और विकास होगा तो लोग सरकार का साथ देंगे. लेकिन जिस तरह से सरकार कर रही है बेशक वो कश्मीरी पंडितों के लिए सही कदम है.लेकिन जो लोग पहले से ही वहां रह रहे हैं उनकी भावनाओं को भी समझना होगा. पता नहीं है सरकार कैसे जमीन का लेनदेन करेंगी कई लोगों के पास तो अब जमीन से जुड़े पेपर तक नहीं है. ऐसे में कैसे जमीन का निपटारा किया जाएगा पता नहीं. जिसने भी जमीन खरीदी थी सबने वहां करोड़ों रुपए खर्च कर घर बना लिया है, क्या उनकी जमीन छीनी जाएगी इसका पता तो बाद में ही चलेगा.
    (रिपोर्ट -आदित्य कुमार)

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