यहां जिंदगी के सफर पर भारी पड़ रही ढाई घंटे की रफ्तार

बावजूद इसके न तो फर्राटा पर लगाम लगी और न ही एक्सीडेंट के आंकड़ों में कोई कमी आई है. हैरान करने वाली बात यह है कि एक्सप्रेसवे पर हवा से बात करते वाहन दूसरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं.

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 1:57 PM IST
यहां जिंदगी के सफर पर भारी पड़ रही ढाई घंटे की रफ्तार
फाइल फोटो- यमुना एक्सप्रेसवे पर सीआरआरआई की रिपोर्ट का पालन नहीं किया जा रहा है.
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Updated: August 6, 2019, 1:57 PM IST
जिस दिन इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ था तो कहा गया था “इस एक्सप्रेसवे का सफर आगरा से दिल्ली की दूरी को ढाई घंटे में पूरी कर देगा.” 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ था. तब से लेकर आजतक हर साल सैकड़ों जिंदगियां ढाई घंटे के सफर को नापने में थम गईं. दर्जनों लोगों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया और वो हमेशा के लिए बिस्तर पर पड़ गए. बावजूद इसके न तो फर्राटा पर लगाम लगी और न ही एक्सीडेंट के आंकड़ों में कोई कमी आई है. हैरान करने वाली बात यह है कि एक्सप्रेसवे पर हवा से बात करते वाहन दूसरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. 29 मौत वाले बस एक्सीडेंट को भी अभी तक भूले नहीं हैं.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट केसी जैन की एक एक आरटीआई के मुताबिक 2017 के सिर्फ 7 महीने में ही 18 लाख वाहनों ने एक्सप्रेस वे के लिए बने स्पीड लिमिट कानून को तोड़ा था.  जिसके बाद यमुना एक्सप्रेस वे सवालों के घेरे में आ गया था.

सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) भी अपनी रिपोर्ट में इन हादसों से बचने के लिए अहम सुझाव दे चुका है. कुछ ऐसे ही सुझावों के साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी जैन सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल कर चुके हैं.

फाइल फोटो- जुलाई में यूपी रोडवेज की यह बस एक्सप्रेसवे पर हादसे का शिकार हो गई थी.


एक्सप्रेस वे पर यहां हो रहे हैं सबसे ज्यादा हादसे

केसी जैन के अनुसार एक रिपोर्ट की मानें तो यमुना एक्सप्रेस वे पर सबसे ज्यादा साल के 50 प्रतिशत हादसे जेवर टोल प्लाजा के अंतर्गत आने वाले जीरो पाइंट से लेकिर 57 किमी के क्षेत्र में होते हैं. यहां दनकौर, दयानतपुर और फलैदा में सबसे ज्यादा वाहन आपस में टकराते हैं. अब अगर मथुरा की बात करें तो यहां 58 किमी से लेकर 110 किमी के क्षेत्र में 35 प्रतिशत हादसे होते हैं. नौहझील, मांट और सुरीर वो थाना क्षेत्र जहां ज्यादातर हादसे होते हैं. आखिर में 111 से लेकर 165 किमी का वो क्षेत्र जो आगरा टोल प्लाजा के अंतर्गत आता है. अगर इस क्षेत्र की बात करें तो यहां खंदौली थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं.

साल दर साल ऐसे बढ़ रहा है मौत और हादसों का आंकड़ा
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एक्सप्रेस वे का एक दर्दनाक सच यह भी है कि जब से यह चालू हुआ है तब से लेकर जनवरी 2017 तक इस पर करीब 4505 हादसे हुए, जिसमें करीब 626 लोगों की मौत हो चुकी है. साल दर साल यहां पर होने वाले हादसों में तेजी देखने को मिल रही है. 2015 की तुलना में एक्सप्रेस वे पर 2016 में 30 फीसद हादसे ज्यादा हुए थे. 2016 में एक्सप्रेसवे पर करीब 1193 एक्सीडेंट की घटनाएं हुईं थीं. इनमें करीब 128 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 2015 में यहां 919 हादसे हुए थे जिसमें 143 लोगों की मौत हो गई थी.

2013 की बात करें तो यहां 896 हादसे हुए जिसमें 118 लोगों की मौत हो गई थी. 2014 में इस एक्सप्रेस वे पर 771 हादसे हादसे हुए जिसमें 127 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. अगस्त 2012 में जब इस एक्सप्रेस को जनता के सुपुर्द किया गया था तब ही यहां दिसंबर 2012 तक करीब 294 हादसे हुए थे जिसमें 33 लोगों की जान चली गई थी.

एक अन्य आरटीआई के मुताबिक़ एक्सप्रेस वे पर अगस्त 2012 से लेकर जनवरी 2018 तक 5000 एक्सीडेंट हुए और 700 से ज़्यादा लोगों की हादसों में मौत हो गई. करीब 2000 लोग इन एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हुए.

फाइल फोटो- एक्सप्रेसवे से गिरकर नाले में गिरी बस के 29 यात्रियों की मौत हो गई थी.


एक्सप्रेसवे पर यहां सौ से ज्यादा स्पीड में दौड़ रहे वाहन

आरटीआई से मिली जानकारी की मानें तो वर्ष 2017 में जनवरी से जुलाई तक 18.15 लाख वाहनों ने 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार को पार किया था. इस संख्या में सभी तरह के वाहन शामिल थे. एक और चौंकाने वाली बात ये है कि 100 की स्पीड को भी पार करने वालों में सबसे ज्यादा वाहनों की संख्या जेवर टोल प्लाजा पर दर्ज की गई थी. यहां 11.11 हजार वाहनों ने 100 से अधिक की स्पीड पर फर्राटा भरा था.

एडवोकेट केसी जैन बोले ठंडे बस्ते में डाल दी सीआरआरआई की रिपोर्ट
आरटीआई कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट केसी जैन का कहना है कि जेपी इंफ्राटेक गलत जानकारी दे रही है कि वो ओवर स्पीड का कानून तोड़ने वाले वाहनों का टोल प्लाजा पर तुरंत ही चालान काट देते हैं. वहीं उन्होंने ये भी गलत जानकारी दी है कि वो ओवर स्पीड चलने वाले वाहनों का डाटा आगरा-मथुरा पुलिस को भेज देते हैं. उनका कहना है कि सीआरआरआई अपनी रिपोर्ट में सीसीटीवी कैमरों की संख्‍या बढ़ाने, रास्‍ते में जगह-जगह छोटे स्‍पीड़ ब्रेकर लगाने की बात कह चुका है. जिससे वाहन चलाने वाला चौकन्‍ना रहे ओर स्‍पीड को अधिक न रख सके.

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First published: August 6, 2019, 1:57 PM IST
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