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लोकसभा चुनाव 2019: यूपी की इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं सिर्फ चार प्रत्याशी

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 4, 2019, 4:52 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: यूपी की इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं सिर्फ चार प्रत्याशी
गोरखपुर जिले की इस सीट पर दिलचस्प है चुनावी जंग!

योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर जिले में आने वाली बांसगांव लोकसभा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी का रहा है दबदबा, इस बार सिर्फ चार पार्टियों के उम्मीदवार मैदान में

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पीएम नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में 102 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे. जिसमें से सिर्फ 26 वैध पाए गए. जबकि तेलंगाना की निजामाबाद सीट पर 178 किसानों सहित 185 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा. किसी एक लोकसभा सीट पर यह सर्वाधिक है. दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की एक सीट पर सिर्फ चार उम्मीदवार ही मैदान में बचे हुए हैं. यह सीट यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर जिले में पड़ती है.

इस सीट का नाम है बांसगांव. यहां बीजेपी की ओर से मौजूदा सांसद कमलेश पासवान, बसपा-सपा गठबंधन से यूपी के पूर्व मंत्री रहे सदल प्रसाद, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से सुरेंद्र प्रसाद और नेशलिस्ट जनशक्ति पार्टी से लालचंद्र प्रसाद मैदान में हैं. एक तरह से अब यहां सिर्फ दो बड़ी पार्टियों बीजेपी और बसपा-समाजवादी पार्टी गठबंधन उम्मीदवार ही यहां लड़ाई में दिख रहे हैं.

यह 1962 में सीट बनने के बाद से ही सुरक्षित है. इस सीट पर अब तक 14 बार हुए चुनाव में 6 बार कांग्रेस और पांच बार बीजेपी ने बाजी मारी है. यहां से कांग्रेस के जाने माने दलित नेता महावीर प्रसाद चार बार सांसद बने. वो केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के राज्यपाल रहे थे. (ये भी पढ़ें: तेज बहादुर यादव बोले, अब सिर्फ वाराणसी नहीं, दूसरी सीटों पर भी करूंगा मोदी-बीजेपी के खिलाफ प्रचार)

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2019 के चुनाव में यहां सबसे कम सिर्फ चार पत्याशी इसलिए रह गए हैं क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी कुश सौरभ का नामांकन खारिज हो गया है. उन्होंने इसके खिलाफ कोर्ट जाने का एलान किया है. उन्होंने कहा है कि जो भाजपा को हराएगा उसे समर्थन दूंगा. हालांकि सपा-बसपा गठबंधन को समर्थन देने के लिए स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा. इस सीट पर मतदाताओं को अपना नेता चुनने में ज्यादा सोचना नहीं पड़ेगा. क्योंकि एक तरह से सिर्फ दो प्रमुख प्रत्याशी ही आमने-सामने बचे हैं.

गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार राजीव दत्त पांडे कहते हैं कि इस सीट पर भी चुनाव लड़ने के लिए नामांकन करने वाले कम नहीं थे. लेकिन पर्चे खारिज होने की वजह से सिर्फ चार बचे. अब इस सीट पर प्रत्याशियों के लिए चुनौती बढ़ गई है. यहां सातवें चरण में 19 मई को वोटिंग होगी.

निजामाबाद में इतने अधिक उम्मीदवार क्यों?तेलंगाना की सभी 17 सीटों पर 11 अप्रैल को वोटिंग हुई थी. यहां 54.20 फीसदी मतदान हुआ है. सीएम के. चंद्रशेखर राव की बेटी और मौजूदा सांसद कलवकुंतला कविता की सियासी किस्मत यहां पर ईवीएम में बंद है. दरअसल, यह रिकॉर्ड बना तेलंगाना सरकार के खिलाफ किसानों की नाराजगी से. कलवकुंतला ने किसानों से अपील की थी कि वे वाराणसी में पीएम नरेंद्र मोदी और अमेठी में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पर्चा दाखिल करें, ताकि उन दोनों को किसानों की दुर्दशा का पता चल सके. लेकिन किसानों ने वाराणसी के साथ ही उनके खिलाफ भी पर्चा दाखिल करके उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं.

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इस सीट पर चुनाव करवाने के लिए आयोग को 26 हजार ईवीएम लगानी पड़ी थी. हर पोलिंग बूथ में एक कंट्रोल यूनिट, 12 बैलेट यूनिट और एक वीवीपैट मशीन लगाई गई थी. एक ही सीट पर मतदान में करीब 35 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया.

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First published: May 4, 2019, 4:46 PM IST
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