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दुधवा के बाघों पर अन्तर्राष्ट्रीय शिकारियों की नजर, केमिकल से 10 सालों में अब तक 15 शिकार

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 24, 2019, 2:47 PM IST
दुधवा के बाघों पर अन्तर्राष्ट्रीय शिकारियों की नजर, केमिकल से 10 सालों में अब तक 15 शिकार
दुधवा व पीलीभीत के बाघों पर अन्तर्राष्ट्रीय शिकारियों की निगाहें

बरेली के आईवीआरआई की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इन दिनों हो रही टाइगर की मौतों का कारण ऑर्गेनों फास्फेट जहर को बताया गया है. इसके बाद से वन विभाग में हड़कंप मच हुआ है.

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पीलीभीत. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के दुधवा (Dudhwa Tiger Reserve) और पीलीभीत टाइगर रिज़र्व (Pilibhit Tiger Reserve) के बाघों (Tigers) पर अन्तर्राष्ट्रीय शिकारियों (International Poachers) की काली निगाह पड़ चुकी है. शिकारी केमिकल का प्रयोग कर बाघों का शिकार कर रहे हैं. अब तक केमिकल के जरिए ये शिकारी 15 बाघों को मार चुके हैं. बरेली के आईवीआरआई की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इन दिनों हो रही टाइगर की मौतों का कारण ऑर्गेनों फास्फेट जहर को बताया गया है. इसके बाद से वन विभाग में हड़कंप मच हुआ है.

बाघिन के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

दरअसल, 10 जुलाई 2019 को गोला रेंज के बिजोरिया के पास नहर से एक बाघिन का शव मिला था. जिसे आईवीआरआई बरेली में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघिन के शरीर में ऑर्गेनों फास्फेट जहर होने की पुष्टि हुई है. ऑर्गेनो फॉस्फेट कहने को तो कीटनाशक है, लेकिन यह बेहद धीमा और खतरनाक जहर है. जिससे इन दोनों तराई में पिछले 10 सालों में 15 टाइगर व तेंदुए की जान जा चुकी है. ये जहर बाजार में पेस्टीसाईड की दुकानों पर आसानी से मिल जाता है.

tiger poaching in lakhimpur kheri and pilibhit
बाघिन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा


अन्तर्राष्ट्रीय शिकारी हैं सक्रिय

डीएफओ साउथ खीरी समीर कुमार के मुताबिक इन दिनों दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों पर अंतरराष्ट्रीय पोर्चस की काली निगाह पड़ गई है. पिछले एक दशक में टाइगर की जंगलों से बाहर निकलने की घटना काफी बढ़ गई थी. इसके चलते इन शिकारियों की बुरी नजर इन टाइगर ऊपर पड़ गई.

dudhwa tiger reserve
दुधवा टाइगर रिज़र्व के बाघों पर शिकारियों की काली नजर

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ग्रामीणों से मिलती है बाघों की लोकेशन

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट वीपी सिंह के मुताबिक एक दशक पूर्व शिकारी या तो टाइगर का शिकार बंदूक की गोली से करता था या फिर कुड़का लगाकर. लेकिन कुछ सालों से अन्तर्राष्ट्रीय तस्करों ने एक नया तरीका इजाद किया है. उन लोगों ने जंगलों के आसपास बसने वाले लोगों को धन का प्रलोभन देकर अपने साथ मिला लिया है. वे उनसे टाइगर की लोकेशन के बारे में जानकारियां लेते हैं. टाइगर की आदत होती है वह अपने किये गये शिकार को एक बार में नहीं खाता है. उसी का फायदा यह शिकारी उठाते हैं. टाइगर मारे गए शिकार में ऑर्गेनो फॉस्फेट ग्रुप का जहर मिला देते हैं. इस जहर को खाने के बाद टाइगर की नर्वस सिस्टम प्रणाली कमजोर होने लगती है और उसको पानी की प्यास बहुत अधिक लगती है. वह पानी के तालाब की तरफ दौड़ता है और पानी पीने के बाद टाइगर को पैरालाइसिस अटैक पड़ जाता है. इसके बाद शिकारी उस टाइगर को लोकेट करके उसकी खाल, मूंछ, हड्डियों और मांस को निकालकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ले जाकर ऊंची कीमतों पर बेचते हैं. जिन टाइगर को ये शिकारी लोकेट नहीं कर पाते वह नदी नाले में गिरकर बह जाते हैं.

international poachers
अन्तर्राष्ट्रीय शिकारी लंबू


अन्तर्राष्ट्रीय तस्कर लंबू हुआ है गिरफ्तार

अन्तर्राष्ट्रीय तस्कर लंबू की गिरफ्तारी के समय ही अगर अधिकारी अपनी नीद से जाग जाते तो कई टाइगर की मौत को बचाया जा सकता था. लंबू ने खुलासा किया था कि वह दुधवा टाइगर रिजर्व के अंदर से वो लगभग 15 टाइगर को ऑर्गेनों फास्फेट जहर देकर मार चुका है. हालांकि वन विभाग दावे करता है कि वह रेगुलर पेट्रोलिंग और ड्रोन कैमरा, डॉग स्क्वायड की मदद से तराई के जंगलों पर कड़ी निगरानी कर रहा है.

पिछले 10 साल में दुधवा टाइगर रिजर्व और कर्तनिया घाट मारे गए टाइगर

1-जनवरी 2015 में भीरा रेंज की किशनपुर रेंज में एक टाइगर का शव मिला था.

2- वर्ष 2016 में किशनपुर इलाके में एक टाइगर का कंकाल मिला था.

3- वर्ष 2017 में कर्तनिया घाट देव जन्म में एक बाघ का शव मिला था.

4- 18 अगस्त 2017 को कर्तनिया घाट गोंडा मैलानी रेलवे लाइन के किनारे टाइगर का शव मिला था.

5- 4 नवंबर 2018 को दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर रेंज के अंदर एक बाघिन को ग्रामीणों पीट-पीटकर मार डाला था.

6- 27 मार्च 2018 को दक्षिण खीरी की मोहम्मदी रेंज महेश के महेशपुर में शिकारियों के फंदे में फंस कर बाघ की मौत हुई थी.

7- 2010 में मैलानी रेंज श्री गुजरी ब्रांच लाइन नहर में बांकेगंज के पास एक बाघ का शव मिला था.

8- 2014 में मैलानी रेंज से गुजरी बड़ी नहर में एक टाइगर का शव मिला था.

9- 2013 में फरधान के पास एक बड़ी नहर से बाघ का शव मिला था.

10- 27 मार्च वर्ष दुधवा स्टेशन के पास एक टाइगर का शव मिला था.

11- 2014 में मैलानी नहर से टाइगर का शव मिला था.

12- 10 जुलाई 2019 को गोला रेंज बिजोरिया नहर से बाघिन का शव मिला था.

13- 2018 अगस्त महीने में संपूर्ण नगर रेंज के सुतिया नाले के पास एक तेंदुए का शव पानी से मिला था.

14- 28 जुलाई 2019 को शारदा बैराज से एक तेंदुए का शव मिला था.

15- 15 सितम्बर 2019 को पीलीभीत में बाघिन का शव हरदोई ब्रांच नहर में मिला था.

(रिपोर्ट: मनोज शर्मा)

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First published: September 24, 2019, 1:55 PM IST
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