पीलीभीत डीएम का फरमान, सरकारी कार्यक्रम में बुके की बजाए भेंट करें बांसुरी

दरअसल पीलीभीत में बांसुरी कुटीर उद्योग सैकड़ों लोगों के रोजगार का साधन भी है. हालांकि छोटी लाइन के बंद होने से असम से आने वाला कच्चा माल बांसुरी के बांस आने में काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा था.

News18India
Updated: April 4, 2018, 6:56 PM IST
पीलीभीत डीएम का फरमान, सरकारी कार्यक्रम में बुके की बजाए भेंट करें बांसुरी
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Updated: April 4, 2018, 6:56 PM IST
पीलीभीत की धरती कृष्ण की पसंदीदा वादन बांसुरी के उत्पादन के लिए माना जाता है. इसलिए यहां लोग घर-घर में बांसुरी उत्पादन कर अपना व्यवसाय कर रहे हैं. जिलाधिकारी डाॅ.अखिलेश मिश्र ने भी पीलीभीत की बांसुरी को वरीयता देने का काम करते हुए एक नई पहल की है. जिलाधिकारी ने विधिवत एक आदेश जारी कर अनौपचारिक एवं औपचारिक भेंट और कार्यक्रम, उद्घाटन में बुके, पुष्पगुच्छ के स्थान पर बांसुरी भेंट किये जाएं. मंशा ये है कि बांसुरी निर्माण को बढ़ावा मिले.

दरअसल पीलीभीत में बांसुरी कुटीर उद्योग सैकड़ों लोगों के रोजगार का साधन भी है. हालांकि छोटी लाइन के बंद होने से असम से आने वाला कच्चा माल बांसुरी के बांस आने में काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा था. कच्चे माल मांगने पर उद्योगपतियों को लगभग 20 गुना अधिक व्यय होने लगा. मुनाफा कम और लागत अधिक होने की वजह से बांसुरी के कारोबार पर काफी असर पड़ा.

इस वजह से अब चौथाई परिवार ही इस कुटीर उद्योग में शामिल हैं. बांसुरी उद्योग के इस संकट स्थिति में प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उद्योग के तहत पीलीभीत को बांसुरी उत्पादन के लिए चुना है. इससे बांसुरी उद्योगपतियों को अब उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है.

जिलाधिकारी डाॅ.अखिलेश मिश्र ने इस बांसुरी उद्योग को पटरी पर लाने के लिए एक नयी पहल की है. उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रम और भेंट के अवसर पर दिये जाने वाले बुके के स्थान पर बांसुरी व पुस्तक उपहार देने की पहल की है. विधिवत इसके लिए जिलाधिकारी ने जारी आदेश में कहा है. जिसमें कहा गया है कि पीलीभीत में बनी बांसुरी भेंट में देने से यहां के बांसुरी व्यापार को उबारने में एक सार्थक पहल साबित होगी. माना जा रहा है कि जिलाधिकारी के ये निर्देश बांसुरी उद्योग के लिए संजीवनी साबित होगी.
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