होम /न्यूज /उत्तर प्रदेश /व्यापारी बदलेंगे पीलीभीत के एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय की तस्वीर, जानिए क्या है प्लान

व्यापारी बदलेंगे पीलीभीत के एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय की तस्वीर, जानिए क्या है प्लान

Businessmen of Pilibhit: पीलीभीत के व्यापारी अनूप अग्रवाल ने बताया कि उनके पूर्वजों ने संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट : सृजित अवस्थी

    पीलीभीत. सरकार भले ही संस्कृति और संस्कृत को लेकर जागरूकता की दुहाई देती है, लेकिन पीलीभीत के एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय की तस्वीर इसके एकदम उलट है. जिले का एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय बदहाली के आंसू रो रहा है. इस हाल से सरकार पर तो असर नहीं, पर पीलीभीत के व्यापारियों पर असर पड़ा और उन्होंने अब इस महाविद्यालय की तस्वीर बदलने की कवायद शुरू कर दी है. व्यापारी इस महाविद्यालय परिसर के रंग-रोगन से लेकर फर्नीचर तक की व्यवस्था में जुट गए हैं.

    दरअसल श्री दुग्धेश्वर संस्कृत महाविद्यालय पीलीभीत का एकमात्र संस्कृत इंटर कॉलेज व महाविद्यालय है. एकमात्र होने के साथ ही साथ यह परिसर अपने आप में काफी ऐतिहासिक भी है. इसके लिए 1945 में शहर के साहूकार किशन लाला ने अपनी जमीन दान दी थी.

    इस महाविद्यालय का अतीत अपने आप में इतना गौरवशाली है कि एक समय में यहां पर दूरदराज से छात्र संस्कृत की शिक्षा लेने आया करते थे. लेकिन आधुनिकता के दौर और अनदेखी ने इसे बदहाली की ओर ढकेल दिया है. बदहाली का आलम यह है कि महाविद्यालय परिसर में कई सालों से रंगाई पुताई का काम नहीं हुआ है और छात्रों के बैठने के लिए फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं है. इसको लेकर अब शहर के व्यापारियों ने कमर कस ली है.

    पीलीभीत के व्यापारी अनूप अग्रवाल ने news18 Local से बताया कि उनके पूर्वजों ने संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए अपनी जमीन दान दी थी, जिसपर यह महाविद्यालय बना. लेकिन लंबे समय उपेक्षित रहने की वजह से महाविद्यालय दिन-ब-दिन बदहाल होता जा रहा है. इस धरोहर को संजोने व संस्कृत को लेकर जागरूकता के लिहाज से अब शहर के व्यापारी इस महाविद्यालय में रंग-रोगन का कार्य कराएंगे. साथ ही छात्रों के बैठने के लिए नए फर्नीचर की व्यवस्था भी करेंगे.

    महाविद्यालय के उपप्राचार्य पंडित दीप्तिमान मिश्रा ने बताया कि लंबे समय से वह अपने स्तर से प्रयास करते आ रहे हैं. लेकिन अनदेखी और बजट के अभाव में परिसर की दशा-दिशा नहीं सुधर पा रही. व्यापारियों का यह कदम स्वागत योग्य है. उनकी ओर से किए जानेवाले सहयोग से संस्कृत की पढ़ाई को लेकर आम जनमानस में जागरूकता बढ़ेगी.

    Tags: Pilibhit news, Sanskrit language, UP news

    टॉप स्टोरीज
    अधिक पढ़ें