लाइव टीवी

पीलीभीत: आदमखोर बाघों का आतंक, अब तक 20 लोगों की मौत

ARJDEV SINGH | News18India
Updated: October 26, 2017, 6:49 PM IST
पीलीभीत: आदमखोर बाघों का आतंक, अब तक 20 लोगों की मौत
सड़क के करीब से गुजरता बाघ फोटो- ईटीवी

आदमखोर बाघों के आतंक से अब जनपद वासियों का जंगल ही नही रिहायशी इलाको में भी रहना मुश्किल हो गया है. बता दें कि पिछले 1 वर्ष से अब तक मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओ में 20 मौत हो चुकी हैं.

  • News18India
  • Last Updated: October 26, 2017, 6:49 PM IST
  • Share this:
पीलीभीत टाइगर रिजर्व द्वारा घोषित बाघों की संख्या अब तक 45 है. मगर इन बाघों पर नियंत्रण रख पाना विभाग के लिए लोहे के चने चबाना जैसा साबित होता दिखाई दे रहा है.

आलम ये है ​कि आदमखोर बाघों के आतंक से अब जनपद वासियों का जंगल ही नही रिहायशी इलाको में भी रहना मुश्किल हो गया है. बता दें कि पिछले 1 वर्ष से अब तक मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओ में 20 मौत हो चुकी हैं.

वन्यजीव-मानव संघर्ष की घटनाओं के बाद कई बार विभागीय अधिकारी व वनकर्मियो को घटनस्थल पर पिटाई खाने की नौबत आ जाती है. हालांकि टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 72 हजार हेक्टेयर है, मगर कुछ बाघ इन जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों में अपना घर बना चुके हैं.

लगभग 8 कैट फैमिली (बाघ, तेंदुआ अन्य) जनपद के अमरिया तहसील इलाके में ड्यूनिडामजहा देवहा और कैलाश नदी अगल-बगल से निकली है. इनके लिए एक प्रकृतिवास बना हुआ है. एक तरफ जहां बाघ फसलों को नुकसान पहुंचने वाली नीलगायों से किसानो को निजात दिलाने का काम कर रहे हैं, वहीं किसानो के लिए भी एक दहशत का माहौल भी बना हुआ है.

विभाग के अधिकारियों ने मृतक आश्रितों को बतौर राहत राशि 5 लाख का चेक और डब्लूडब्लूएफ की ओर से लगभग 10 हजार रूपये दिए हैं. मगर विभाग की इस राहत से वो नाखुश हैं. कारण विभाग ने उनसे परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी दिलाने का जो वादा किया था वो पूरा नहीं किया है. वहीं किसानों की ज्यादातर फसल अब तक इसलिए नहीं कट पायी है, क्योंकि उनको बाघों से आज भी खतरा बना हुआ है.

इस पूरे मामले में डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया की वन्यजीव-मानव संघर्ष में अब तक 20 मौते हो चुकी हैं. इनमें 9 घटना जंगल के अंदर और 11 जंगल के बाहर हुई हैं. 19 घटनाएं टाइगर के द्वारा की गई है और 1 घटना भालू के हमले से इंसान के मौत की है.

राज्य सरकार के मानक के अनुसार उन लोगो को 5 लाख मुआवजा दिया गया है, जिनकी मौत जंगल से बाहर हुई है. डीएफओ ने बताया कि बाघों के जंगल से बाहर आने का बड़ा कारण जंगल से सटे गन्ने की खेती है इसलिए बाघ गन्ने के खेत को जंगल समझ कर जंगल से बाहर आ जाता है. अक्सर ठंड में वह गन्ने के खेत मे ही रहता है.
Loading...

बाघों के जंगल से बाहर न आने पर डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि सोलर फेंसिंग के लिए बजट की मांग की गई है. कुछ हिस्सों में फेंसिंग की जा चुकी है. वहीं जंगल से सीमावर्ती गांव व इलाको में रहने वाले ग्रामीणों को प्रचार वाहन से प्रचार किया जा रहा है.

खेतो में अकेले जाने से रोकने का काम किया जा रहा है. खेत खलिहानों में बाघ के पगमार्क मिलने पर विभाग को सूचित करने के लिए लोगो को प्रेरित करने का काम किया जा रहा है ताकि विभाग की ओर से बाघ को रेस्क्यू किया जा सके.

बाघ के हमले में मौत (अक्टूबर, 2016 से अक्टूबर 2017)

वर्ष 2016
24 अक्टूबर- बेनीराम (मरौरी)
28 नवम्बर- बाबूराम (पिपरिया संतोष)
11 दिसम्बर- अहमद खान (माधोटांडा)

वर्ष 2017
16 जनवरी- राजीव राठौर (पिपरिया संतोष)
5 फरवरी- धनीराम (कुंवरपुर)
7 फरवरी- नन्हेलाल (पिपरिया)
11 फरवरी- गंगाराम (कलीनगर)
16 फरवरी- कलावती (मेवातपुर)
5 मार्च- ब्रह्मस्वरूप (रामपुरा)
31 मार्च- श्यामबिहारी (जमुनिया)
9 मई- ताराचंद (अनवरगंज)
18 जून- केवलप्रसाद (मरौरी)
20 जून- मिहीलाल (शिवपुरिया)
1 जुलाई- ननकी देवी (मेथी सैदुल्लागंज)
7 अगस्त- तस्लीम अहमद (डांग)
8 अगस्त- शमशुल रहमान (सरैंदापट्टी)
10 अगस्त- कुंवरसेन (बेहरी)
18 अगस्त- रामचंद (पीलीभीत)
1 अक्टूबर- बबलू सरकार (खरगापुर)
बाघ के अलावा 20वीं मौत भालू के हमले में हुई है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पीलीभीत से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 26, 2017, 6:49 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...