किसानों द्वारा समस्या बताने पर भड़की मेनका, बोलीं- क्यों बोते हो गन्ना

दरअसल, मंगलवार को मेनका गांधी पीलीभीत पहुंची थीं. इस दौरान एक किसान के समस्या बताने पर वह भड़क उठी और किसान को डांटने लगीं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 16, 2018, 1:33 PM IST
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एक तरफ यूपी की योगी सरकार किसानों की आय दोगनी करने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटी हुई है, दूसरी तरफ केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री ने किसानों को गन्ना नहीं बोने की नसीहत दे रही हैं. जी हां, एक वायरल वीडियो में मेनका गांधी ने किसानों से कहा है कि वो गन्ना क्यों बोते हैं, जब देश को चीनी की जरूरत नहीं है.

दरअसल, मंगलवार को मेनका गांधी पीलीभीत पहुंची थीं. इस दौरान एक गन्ना किसान ने किसानी से जुड़ी समस्या बताने लगा तो वो भड़क उठी और किसान को डांटने लगीं. किसान ने जनसभा के दौरान गन्ना भुगतान की गंभीर समस्या को उनके सामने रखा था. मेनका गांधी ने कहा, तुम लोग गन्ना क्यो बोते हो. देश को चीनी की कोई जरूरत नही है. मैंने कितनी बार मना किया है. फिर भी तुम लोग गन्ना क्यों उगाते हो.

किसानों पर केंद्रीय मंत्री के झिड़कने का यह वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है. राजनीतिक हलकों में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है और इस पर सियासी बहस भी छिड़ गया है. मेनका गांधी के इस वीडियो पर पूर्व मंत्री ने कहा कि जिले की चार में से दो चीनी मिल किसानों के खेत में गन्ना खड़ा होने के बाद भी बंद हो गई, जिससे किसान परेशान है और जब किसान अपनी समस्या जनप्रतिनिधियों को सुनाता है तो उसे झिड़क दिया जाता है.

उल्लेखनीय है पीलीभीत जिला उत्तराखंड व नेपाल सीमा पर स्थित है. उत्तराखंड से आने वाली शारदा व देवहा नदी के साथ-साथ दर्जनों नहरें जनपद के बीचों बीच से बहती हैं. इन नदियों की वजह से तराई क्षेत्र गेंहू, धान व गन्ना बाहुल्य माना जाता है. अच्छी फसल उगाकर किसान जनपद ही नहीं, बल्कि प्रदेश का नाम रोशन करने का काम कर रहे हैं. पीलीभीत जिला किसान बाहुल्य जनपद है. जिसमें गन्ना मुख्य फसल है.

बता दें, योगी सरकार द्वारा पिछले साल गन्ना किसानों के करीब 24 हजार करोड़ से अधिक के बकाये का भुगतान का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया. लेकिन गन्ना माफियाओं और चीनी मिलों की सांठ-गांठ को तोड़ने में सरकार विफल साबित हो रही है. प्रदेश में फर्जी सट्टों, पर्चियों के मनमाने वितरण और घटतौली जैसे भ्रष्टाचार का खुला खेल जारी है.

इस गोरखधंधे में गन्ना विभाग ने भी घुटने टेक दिए हैं, जिससे गन्ना किसानों को रोजाना करोड़ों का नुकसान हो रहा है. बताया जाता है मार्च का पूरा महीना बीत गया है, लेकिन अभी तक गन्ना विभाग द्वारा लाखों गन्ना किसानों को पर्चियां मुहैया नहीं कराई जा सकीं.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही खुद योगी आदित्यनाथ ने यह साफ कर दिया था कि उनकी प्राथमिकता कृषि प्रधान राज्य यूपी के गांव, गरीब और किसान हैं. योगी सरकार कृषि को ही प्रदेश के विकास का आधार बनाएगी और किसान, खेतीहर मजदूरों के विकास के लिये हर संभव प्रयास करेगी.

इस समय उत्तर प्रदेश में 169 गन्ना समितियों में 48.84 लाख गन्ना किसान पंजीकृत हैं. इस वर्ष गन्ने के क्षेत्रफल में 2.45 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी से गन्ने का कुल क्षेत्रफल 22.99 लाख हेक्टेयर पहुंचने का दावा किया गया है, लेकिन सीएम योगी और गन्ना मंत्री सुरेश राणा के प्रयासों पर गन्ना विभाग के अधिकारियों की नाकामी भारी पड़ती दिख रही है. यही कारण है कि चीनी मिल और गन्ना माफियाओं की मिलीभगत से दशकों से चल रहे हजारों करोड़ के काले कारोबार को योगी सरकार भी रोकने में पूरी तरह से फेल हो गई.

पर्चियों के खेल में पिस रहा किसान
पता चला है कि चीनी मिल, गन्ना विभाग और गन्ना विभाग की मिलीभगत से यह सरकार को ये चपत लगाई जा रही है. किसानों के नाम पर गन्ने के कुल क्षेत्रफल से कई गुना अधिक गन्ना दिखाकर गन्ना पर्चियां बनवाई जा रही हैं. यही नहीं, एक ही किसान के नाम पर दो-दो गन्ना कैलेन्डर भी जारी हो रहे हैं. इस फर्जीवाड़े को सूबे में गन्ने की बुआई के कागजी आकंड़े में घालमेल कर रिकार्डतोड़ वृद्धि दिखाई जा रही है.

दूसरी तरफ, आम गन्ना किसान को एक अदद पर्ची के लिए मजबूर कर दिया गया है. पर्ची के अभाव का फायदा गन्ना माफिया खुलेआम उठा रहे हैं. वे गरीब गन्ना किसानों को औने-पौने दाम पर गन्ना बेचने के लिये मजबूर कर रहे हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि ये गोरखधंधा इस साल भी बड़े स्तर पर जारी है.

सुनिए कहानी किसानों की जुबानी
कुशीनगर के गन्ना किसान अजय कुमार और मोतीलाल कहते हैं कि अभी तक पर्ची नहीं मिली है. इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर वजन हो रहा है, वजन कितना है, ये भी देखने को नहीं मिल पाता है. अधिकारी भी समय से गन्ना कांटे पर नहीं आते हैं.

वहीं, शामली के किसान अरविंद कहते हैं कि मंत्री जी का घर होने के बाद भी न तो पर्ची आ रही है, न ही भुगतान हो रहा है. 14 दिन का वादा इन्होंने किया था, तीन महीने बीत गए, भुगतान का कुछ पता नहीं है. सारी सरकारें ऐसी ही हैं. दोबारा बुआई करनी है, पता नहीं कैसे करेंगे. बागपत के किसान रामवीर कहते हैं कि बार-बार कहने के बाद भी किसान को पर्ची नहीं मिल पा रही है. वह कहते हैं कि खुलेआम घटतौली 2 प्रतिशत चल रही है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि सरकार बिलकुल चुप बैठी है, लेकिन कार्रवाई जमीनी स्तर पर बेहद कमजोर ही दिख रही है. कारण यह है कि पूरे प्रदेश में अब तक सिर्फ 24 गन्ना माफियाओं के खिलाफ ही कार्रवाई हो सकी है. जबकि इनकी संख्या हजारों में है.

अधिकारियों का ये है पक्ष
उधर, घटतौली को लेकर गन्ना विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त संजय भूसरेड्डी कहते हैं कि घटतौली रोकने के लिए शासन और गन्ना विभाग के अधिकारियों ने सूबे के चीनी मिल सहित कुल 7121 क्रय केन्द्रों पर 17674 छापे मारकर 138 बड़ी और 1670 सामान्य अनियमितता पकड़ी गई. 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई है. 24 के खिलाफ वाद दायर कर 150 तौल लिपिकों के लाईसेंस निरस्त कर उन्हें तत्काल हटा दिया गया है. वहीं 1144 लोगों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर घटतौली रोकने का एक सार्थक प्रयास किया गया है.

वैसे, खुद प्रमुख सचिव गन्ना संजय भूसरेड्डी ने बीते 1 फरवरी को कहा था कि मौजूदा पेराई सत्र में चीनी मिल और गन्ना समितियों में समन्वय के अभाव का अनुचित लाभ अराजक तत्व ले रहे हैं. वे फर्जी सट्टों के जरिए पर्चियां निकलवाकर गन्ने की अवैध खरीद फरोख्त कर रहे हैं. प्रमुख सचिव इस दुर्दशा के लिए पहले के नियमों को ताक रखने को कारण मानते हैं. उनके अनुसार इसके तहत चीनी मिलों को पर्ची वितरण की व्यवस्था सौंप दी गई थी, जिसके चलते ये समस्याएं सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा कि जल्द ही पर्ची वितरण का कार्य समितियों को सौंपा जाएगा.

(इनपुट: अर्जदेव सिंह)
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