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यूपी चुनाव: पीलीभीत की इस सीट पर जीजा-साले के बीच जमकर घमासान

यूपी चुनाव: पीलीभीत की इस सीट पर जीजा-साले के बीच जमकर घमासान

पीलीभीत शहर विधानसभा सीट (Pilibhit Assembly Seat) को लेकर पूर्व कैबनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद के बेटे शाने अली और उनके दामाद मोहमद आरिफ (बाएं) आमने-सामने आ गए.

पीलीभीत शहर विधानसभा सीट (Pilibhit Assembly Seat) को लेकर पूर्व कैबनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद के बेटे शाने अली और उनके दामाद मोहमद आरिफ (बाएं) आमने-सामने आ गए.

पीलीभीत शहर विधानसभा सीट (Pilibhit Assembly Seat) को लेकर पूर्व कैबनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद के बेटे शाने अली और उनके दामाद मोहमद आरिफ (बाएं) आमने-सामने आ गए. साले और बहनोई ने समाजवादी पार्टी से ही शहर विधानसभा से दावेदारी कर दी. सूत्रों की मानें तो यह विवाद इतना गहराया कि सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल के दौरे के दौरान दोनों के समर्थकों बीच काफी कहा सुनी हो गई. इसे वहां मौजूद एक पूर्व मंत्री ने जैसे-तैसे शांत करवाया.

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    क़याम रज़ा
    पीलीभीत.
    उत्तर प्रदेश के पीलीभीत शहर विधानसभा सीट (Pilibhit Assembly Seat) पर जीजा-साले के बीच जमकर घमासान मचा है. पूर्व कैबनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद (Haji Reyaz Ahmed) की बेटी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रुकैया आरिफ की कोरोना की दूसरी लहर में मौत के बाद रियाज की राजनीतिक विरासत को लेकर घमासान शुरू हो गया. शहर विधानसभा सीट को लेकर रियाज के बेटे शाने अली और उनके दामाद मोहमद आरिफ आमने-सामने आ गए. साले और बहनोई ने समाजवादी पार्टी से ही शहर विधानसभा से दावेदारी कर दी. सूत्रों की मानें तो यह विवाद इतना गहराया कि सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल के दौरे के दौरान दोनों के समर्थकों बीच काफी कहा सुनी हो गई. इसे वहां मौजूद एक पूर्व मंत्री ने जैसे-तैसे शांत करवाया.

    ससुराल में रहकर सीखी राजनीति
    रियाज अहमद के जीवन काल के दौरान मरहूम (दिवंगत) पूर्व मंत्री ने अपनी बेटी रुकैया आरिफ को जब जिला पंचायत का अध्यक्ष बनाया, तब आरिफ का रसूख बहुत तेजी से बढ़ा. आरिफ उस समय अपनी ही ससुराल में रहकर जिला पंचायत का काम देख रहे थे. इस दौरान आरिफ ने साल 2015 में जिला पंचायत का चुनाव भी लड़ा, जिसमें वह तीसरे नंबर पर रहे. इस कोरोना काल के दौरान 2021 में हुए पंचायत चुनाव में भी आरिफ ने पंचायत सदस्य के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन वह अपनी जमानत तक नहीं बचा सके. जानकार आरिफ की इन लगातार हार की वजह उनकी व्यवहार में घमंड को ही मानते हैं. वहीं आरिफ की मानें तो मरहूम पूर्व मंत्री और उनके ससुर ही राजनीतिक गुरु थे.

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    परिवार ने बेटे को ही माना असली हकदार
    मरहूम पूर्व मंत्री रियाज अहमद के बेटे शाने अली लखनऊ में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे. पूर्व मंत्री की मौत के बाद परिवार के कहने पर शाने अली ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. हाजी रियाज अहमद के करीबी व पार्टी के पूर्व जिला महामंत्री तस्लीम शान खा की मानें तो रियाज सहाब का असली उत्तराधिकारी शाने अली ही है. अपने जीवन काल के दौरान ही पूर्व मंत्री उन्हें राजनीति में लाना चाहते थे, लेकिन उस समय उनकी पढ़ाई पूरी नही हुई थी. अब पूरा परिवार और हाजी जी को मानने वाले सभी लोग शाने अली के साथ हैं.

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    जीजा-साले की इस दावेदारी के बीच समाजवादी पार्टी भी दो धड़ों में बंट गई है. कुछ लोग शाने अली को मजबूत दावेदार मानते हैं, जबकि कुछ संगठन के लोग आरिफ के साथ भी बताए जा रहे हैं. इन सबके बीच दावेदारी को लेकर अंतिम फैसला सपा मुखिया अखिलेश यादव को ही लेना है.

    परिवार की आपसी लड़ाई से शहर विधानसभा को बड़े नुकसान होने की भी संभावना है, क्योंकि साले बहनोई में से किसी एक को अगर समाजवादी पार्टी टिकट देती है तो दूसरा उसका जमकर विरोध करेगा, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा.

    Tags: Pilibhit news, UP chunav, UP Election 2022

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