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Pilibhit Tiger Attack: पेड़ पर 8 घंटे बैठा रहा विकास, नीचे घूम रहे थे बाघ-बाघिन, पढ़िए हमले की पूरी कहानी

Pilibhit Tiger Attack: पेड़ पर 8 घंटे बैठा रहा विकास, नीचे घूम रहे थे बाघ-बाघिन, पढ़िए हमले की पूरी कहानी

पीलीभीत: बाघ के हमले में बचे विकास ने सुनाई आपबीती

पीलीभीत: बाघ के हमले में बचे विकास ने सुनाई आपबीती

Pilibhit News: विकास ने बताया कि जंगल घुसने से पहले वन कर्मियों ने उन्हें चेताया था और बाघ के आस-पास होने की बात की कही थी, लेकिन वे नहीं माने और गाड़ी आगे बढ़ा दी. विकास ने बताया कि जब वह जंगल में पहुंचे तो दो बाघ सड़क किनारे घात लगाए बैठे थे.

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पीलीभीत. उत्‍तर प्रदेश के पीलीभीत (Pilibhit) के पूरनपुर थाना क्षेत्र के दियूरिया रेंज की खरनौत नदी पुलिया के समीप बाघ-बाघिन के हमले (Tiger Attack) में दो लोगों की मौत की कहानी उस शख्स ने बयां की जिसने पूरी रात पेड़ पर रहकर अपनी जान बचाई. बाघ-बाघिन के इस हमले में बचे विकास ने अपने दोस्तों को उनका निवाला बनते खुद अपनी आंखों से देखा. इतना ही नहीं जब वह पेड़ पर चढ़ गया तो बाघ-बाघिन पूरी रात नीचे चलकदमी करते रहे और करीब साढ़े तीन बजे के करीब जंगल में वापस लौट गए. विकास ने बताया कि रात भर वह सो नहीं पाया और बाघ उसके सपनों में आता रहा.

विकास ने बताया कि जंगल घुसने से पहले वन कर्मियों ने उन्हें चेताया था और बाघ के आस-पास होने की बात की कही थी, लेकिन वे नहीं माने और गाड़ी आगे बढ़ा दी. विकास ने बताया कि जब वह जंगल में पहुंचे तो दो बाघ सड़क किनारे घात लगाए बैठे थे. बदहवास विकास ने बताया कि बाइक सोनू चला रहा था. बीच में कंधईलाल और सबसे पीछे वह बैठा था. तभी एक बाघ ने पीछे से हमला कर दिया. चूंकि विकास ने हेलमेट लगाया हुआ था, लिहाजा उसका पंजा हेलमेट पर लगा और बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई. इस बीच एक बाघ ने सोनू पर हमला कर दिया और उसे मौत के घाट उतार दिया. उधर, कंधई पेड़ पर चढ़ने लगा. वह करीब 6 फ़ीट चढ़ भी चुका था, लेकिन बाघ ने छलांग लगाकर उसे भी दबोच लिया और मार डाला.

आठ घंटे पेड़ पर गुजारे
विकास के मुताबिक दोनों को मौत के घाट उतारने के बाद दूसरे बाघ ने उस पर हमला करने का प्रयास किया, लेकिन जब तक बाघ हमला कर पाता वह पेड़ पर चढ़ चुका था. विकास ने बताया कि बाघ कंधई के शव को जंगल के अंदर खींचते हुए ले गए, जबकि सोनू का शव जिस पेड़ पर वह चढ़ा था उसके नीचे पड़ा रहा. जंगल के अंदर कंधई के शव को खाने के बाद दोनों बाघ फिर से उसी पेड़ के नीचे आ गए जिस पर वह बैठा था. पूरे आठ घंटे तक दोनों बाघ वहीं चहलकदमी करते रहे और तड़के साढ़े तीन बजे जंगल के अंदर गए.

Tags: Pilibhit news, Tiger attack, UP news

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