किस्से: पंडित नेहरू ने ऐसा क्या मांग लिया था, जिससे हैरान रह गए थे डॉ. राम मनोहर लोहिया

राम मनोहर लोहिया के पिताजी कांग्रेसी थे, इस कारण फैजाबाद जाने पर पंडित जवाहर लाल नेहरू उनके घर रुका करते थे.

RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 4:51 PM IST
किस्से: पंडित नेहरू ने ऐसा क्या मांग लिया था, जिससे हैरान रह गए थे डॉ. राम मनोहर लोहिया
पसंद करने के बाद भी पंडित नेहरू के कटु आलोचक रहे डॉ रम मनोहर लोहिया
RajKumar Pandey
RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 4:51 PM IST
डॉक्टर राम मनोहर लोहिया को नेहरू विरोधी नेता के तौर पर जाना जाता है. जबकि हकीकत ये है कि डॉ. लोहिया अपनी नौजवानी के दिनों में जवाहरलाल नेहरू के बड़े फैन रहे. यहां तक कि पहली बार जब लोहिया नेहरू से मिले तो उन्होंने बाकायदा नेहरू के पैर छुए थे.

यह वाकया आजादी से पहले का है. पंडित नेहरू डॉक्टर लोहिया के घर गए हुए थे. यह वो दौर था जब नेता अक्सर अपने परिचितों के घर पर ही रुका करते थे. डॉक्टर लोहिया के पिता फैजाबाद में रहते थे. नेहरू जी रात में उनके घर पर ही रुके. लोहिया जी नेहरू को उनके भाषणों, किताबों और लेखों से जानते थे. ऐसे बड़े आदमी को अपने सामने पाकर खुद ही उनके हाथ नेहरू जी के पैरों की तरफ पहुंच गए. नेहरू को भी उन्होंने अपनी जानकारियों और बातचीत से प्रभावित किया.



डॉ. लोहिया के घर पर रुके थे पं नेहरू
पंडित नेहरू लोहिया जी के पिताजी के परिचित थे. वही नेहरू जी के मेजबान थे. खैर, लोग आते जाते रहे. नेहरू से मिलते रहे. रात को नेहरू जी वहीं रुके. सुबह नहाने के बाद जब नेहरू जी ने कंघा मांगा तो लोहिया जी को बड़ी हैरानी हुई. दरअसल, नेहरू जी उस वक्त भी गंजे थे. उनके सिर पर बाल नहीं थे. लोहिया जी ने मेहमाननवाजी का तकाजा मान कर कंघा दे तो दिया. लेकिन देर तक सोचते रहे आखिर नेहरू जी कंघे का क्या करेंगे?

पंडित नेहरू ने कंघा लेकर जो भी बाल बचे थे उन्हें सलीके से संवारा. लोहिया ने इसका जिक्र अपनी जीवनी में किया है. राम मनोहर लोहिया के पिता कांग्रेस में थे ही. अपनी राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दौर में ही लोहिया जी भी गहरे तक नेहरू से जुड़ गए.

कांग्रेस में रहे तब भी आलोचक थे 
ये अलग बात थी कि उस समय भी डॉक्टर लोहिया कांग्रेस की समाजवादी धारा के साथ जुड़े रहे. नेहरू खुद भी इस धारा का समर्थन करते थे, लेकिन लोहिया जैसे नेता उनके उस समर्थन भर से संतुष्ट नहीं होते थे. नीतियों को लेकर कांग्रेस के अधिवेशनों में विरोध साफ-साफ दिखने लगा था.
Loading...

उसी दौर में इलाहाबाद में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जिसमें तल्खी बहुत गहरी हो गई. तकरीबन उसके बाद से डॉक्टर लोहिया ने अपनी राह अलग कर ली. फिर भी दोनों में संवाद बना रहता था. लेकिन डॉक्टर लोहिया ने फूलपुर सीट से नेहरू जी के विरोध में चुनाव लड़कर अपनी मुखालफत और तेज कर दी.

फिर भी आनंद भवन जाते आते थे
इलाहाबाद के लोग याद करते है कि लोहिया जी ने शहर में लोगों से बात की थी. कहा था, “मुझे मालूम है कि मैं चट्टान से टकराने जा रहा हूं. चट्टान भले ही न टूटे लेकिन मैं उसमें दरार तो डाल ही दूंगा.” हुआ भी कुछ ऐसा ही. नेहरू जी को एक लाख दस हजार से कुछ ज्यादा वोट मिले तो लोहिया जी को भी 50 हजार से अधिक वोट हासिल हुए. ये अलग बात है कि आमने-सामने लड़ने के बाद दोनों ने एक दूसरे का इस कदर सम्मान किया कि लोहिया जी अक्सर चाय पीने नेहरू जी के घर आनंद भवन पहुंच जाते थे.

ये भी पढ़ें : लोहिया ने महिलाओं से रिश्ते रखे लेकिन ईमानदारी से

#Love Story: नेहरू की वह बहन जिसने पहली नज़र में प्यार होते ही कर ली शादी

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...