UP Panchayat chunav: भाजपा के मास्टर प्लान ने राजा भैया की बढ़ाई टेंशन, सियासी दबदबे पर लगा विराम!

यूपी पंचायत चुनाव में इस बार राजा भैया का दबदबा कायम नहीं रह पाया है.

यूपी पंचायत चुनाव में इस बार राजा भैया का दबदबा कायम नहीं रह पाया है.

UP Panchayat Election: प्रतापगढ़ के पंचायत चुनाव में राजा भैया (Raja Bhaiya) की अच्छी खासी पैठ मानी जाती रही है. यही वजह है कि पांच में से चार बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर राजा भैया के समर्थकों का कब्‍जा रहा है. हालांकि इस बार भाजपा ने उनका खेल बिगाड़ दिया है.

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प्रतापगढ़. उत्‍तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election) का शोर अब पूरे शबाब पर है. 19 अप्रैल यानी दूसरे चरण में प्रतापगढ़ में वोटिंग होगी जिसकी तैयारियां जिला प्रशासन द्वारा की जा रही हैं, लेकिन पंचायत चुनाव के नामांकन प्रक्रिया के बाद से ही बड़ा सियासी उलटफेर जारी है. इसी बीच खबर है कि भाजपा (BJP) के पंचायत चुनाव के मास्टर प्लान ने राजा भैया (Raja Bhaiya) और उनकी पार्टी की मुश्किलों में काफी इजाफा कर दिया है. राजा भैया के गढ़ कुंडा और बाबागंज की दर्जनों सीटों पर भाजपा ने अपने मजबूत और युवा प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य की सीटों के लिए उतार दिए हैं जिसके चलते राजा भैया समर्थित प्रत्याशियों की मुश्किलों में इजाफा हो गया है. साफ है कि राजा भैया की पार्टी में अब चिंता की लकीरें खिंचती नजर आ रही हैं.

इससे पहले यूपी पंचायत चुनाव में राजा भैया का जिला पंचायत के चुनावों में जादू चलता था. पिछले पंचायत चुनाव में राजा भैया ने 13 जिला पंचायत सदस्य को निर्विरोध निर्वाचित कराकर सबको चौंका दिया था. कुंडा और बाबागंज के 13 निर्विरोध निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य पूरे सूबे में सुर्खिया में छा गए थे जिसके चलते जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में राजा भैया समर्थित प्रत्याशी ने एक तरफा जीत हासिल कर ली थी. हालांकि इस बार भाजपा कुंडा और बाबागंज इलाके की दर्जनों जिला पंचायत सदस्य सीटों पर बेहद अच्छी टक्कर देने की स्थिति में आ गयी है. कई सीटों पर कांटे की टक्कर होने के आसार भी दिखाई पड़ने लगे हैं. प्रतापगढ़ की भाजपा इस बार राजा भैया के पार्टी के उम्मीदवारों को जरा से भी रियायत देने के मूड में नहीं है जिसके चलते ये माना जा रहा था राजा भैया की टीम भी चुनावी नैया पार लगाने और अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए नए समीकरण को अंदर खाने से सेट करने में लगी है. वहीं, जिला पंचायत सदस्यों की अच्छी संख्या ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर किसका कब्जा होगा ये सुनिश्चित कर देती है. इसी के चलते भाजपा और राजा भैया की पार्टी ने जिला पंचायत के सदस्यों को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.

राजा भैया का था दबदबा

कुंडा और बाबागंज विधानसभा में राजा भैया का विशेष राजनीतिक प्रभाव माना जाता है. हर पंचायत चुनाव में राजा भैया समर्थित प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो जाते थे. पिछले पंचायत चुनाव में 13 जिला पंचायत सदस्य को निर्विरोध निर्वाचित करा सभी पार्टियों को करारा झटका दिया था. चुनावी के शुरुआती दौर में विपक्षियों को चित्‍त कर दिया था, लेकिन इस बार राजा भैया की पार्टी एक भी जिला पंचायत सदस्य की सीट निर्विरोध निर्वाचित नहीं करा सकी है और जिसके पीछे भाजपा का सख्त होना बताया जा रहा है. फिर भी राजा भैया के गढ़ को भेद पाना किसी भी पार्टी के लिए कतई आसान नहीं होगा.
चार बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर राजा भैया समर्थित ने किया है कब्जा

1995 में हुए जिला पंचायत के चुनाव में राजा भैया समर्थित अमरावती ने जीत का परचम लहराया था. 2000 में राजा भैया समर्थित विन्देश्वरी पटेल ने जीत हासिल की थी. जबकि 2005 में राजा भैया समर्थित प्रत्याशी कमला देवी विजयी हुई थीं. वहीं, 2011 में बसपा के प्रमोद मौर्य ने राजा भैया के जीत का रथ रोकते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा कर लिया था, लेकिन 2016 में राजा भैया समर्थित प्रत्याशी उमा शकर यादव जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा करते हुए अपना परचम लहरा दिया था.
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