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प्रतापगढ़: राजा-रानी की जंग में कौन जीतेगा 'चुनावी शतरंज' की बाजी

News18Hindi
Updated: May 11, 2019, 2:43 PM IST
प्रतापगढ़: राजा-रानी की जंग में कौन जीतेगा 'चुनावी शतरंज' की बाजी
राजा भइया और कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह

राजा भइया ने अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) बनाकर फिर से कांग्रेस की राजकुमारी के सामने अपने उसी भाई को उतार दिया है जिन्होंने 2004 के चुनाव में राजकुमारी को मात दे दी थी.

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उत्तर प्रदेश की प्रतापगढ़ सीट राजे-रजवाड़ों की राजनीति के लिए जानी जाती रही है. यहीं से इंदिरा गांधी के करीबी और कांग्रेस की नरस‌िम्हा राव सरकार में विदेश मंत्री रहे राजा दिनेश सिंह जीत कर आते रहे हैं. राजा भइया की पूरी राजनीति यहीं से चलती हैं. बाद में इसी सीट पर राजा दिनेश सिंह की बेटी राजकुमारी रत्ना सिंह और राजा भइया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह की टक्कर हुई. इस सीट ने राजे-रजवाड़ों की टसल देखी उनकी जीत देखी और उनकी हार देखी.

भारतीय जनता पार्टी ने इसी राजसी टसल को देखते हुए आम चुनाव 2014 में यह सीट अपना दल को दे दी थी. बीजेपी को इसका फायदा भी मिला था अपना दल के प्रत्याशी कुंवर हरिबंश सिंह ने यह सीट जीत ली थी. लेकिन इस बार बीजेपी ने अपना दल से ये सीट वापस ले ली है और खुद अपना उम्मीदवार उतार दिया है. लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस की ये राजकुमारी पूरी ताकत के साथ वापसी को बेताब है.

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इलाहाबाद और लखनऊ के बीचोंबीच की प्रतापगढ़ लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस और भी ज्यादा रोचक इसलिए हो गई है कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया ने अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) बनाकर फिर से कांग्रेस की राजकुमारी रत्ना सिंह के सामने अपने उसी भाई अक्षय प्रताप सिंह को उतार दिया है जिन्होंने 2004 के चुनाव में राजकुमारी को मात दे दी थी. हालांकि इससे पहले राजकुमारी 1996 में, 1999 और 2009 के आम चुनावों में सांसद चुनी जा चुकी हैं.

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प्रतापगढ़ लोकसभा चुनाव 2019 में प्रमुख उम्मीदवार
अपने दुर्ग को वापस पाने के लिए बेताब कांग्रेस प्रतापगढ़ सीट पर अपनी सबसे भरोसेमंद प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह को फिर मैदान में उतारा है. अपना दल को पीछे ढकेल कर खुद फ्रंटफुट आई बीजेपी ने संगम लाल गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है. सपा-बसपा गठबंधन की ओर बसपा ने अशोक कुमार त्रिपाठी को अपना उम्मीदवार है. लेकिन लड़ाई में राजा भइया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह भी हैं.
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प्रतापगढ़ लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे
लोकसभा चुनाव 2014 में प्रतापगढ़ के रिजल्ट पर अपना दल के प्रत्याशी से ज्यादा बसपा उम्मीदवार सिफ निजामुद्दीन सिद्दीकी चर्चा में रहे थे. क्योंकि बसपा उम्मीदवार को 3,09,858 वोट मिले थे जबकि सीट जीतने वाले अपना दल प्रत्याशी कुंवर हरिबंश सिंह ने कुल 3,75,789 वोट जुटाए थे. इसे एनडीए की एक शातिर चुनावी बिसात बताई गई थी. तब कांग्रेस की राजकुमारी 1,38,620 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर फिसल गई थीं. वहीं, सपा उम्मीदवार प्रमोद कुमार पटेल ने भी 1,20,107 जुटा लिए थे.

akshay pratap singh

ऐसा कहा गया कि बड़ी शातिर अंदाज में वोट का बंटवारा कराया गया था. लेकिन इस बार बीएसपी और एसपी एक साथ हैं. हालांकि मुख्य टक्कर राजकुमारी और राजा भइया के चचेरे भाई के बीच मानी जा रही है. अक्षय प्रताप अभी तक सपा की ओर से एमएलसी हैं.

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट का समीकरण
प्रतापगढ़ खालिस तौर ग्रामीण लोगों पर रजवाड़ों के शासन वाला जिला है. इस सीट में रामपुर खास, विश्वनाथ गंज, प्रतापगढ़, पट्टी और रानीगंज विधानसभा सीटें आती हैं. 2017 चुनाव में इनमें से बीजेपी ने दो, अपना दल ने दो और कांग्रेस ने एक सीट जीती थी. 2017 की मतदाता सूची के अनुसार यहां 1682147 वोटर हैं.

बीजेपी उम्मीदवार संगम लाल गुप्ता जनसंपर्क के दौरान


प्रतापगढ़ लोकसभा सीट की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार कुल 23 लाख है. इनमें 94.18 फीसदी लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं. जबकि महज 5.82 फीसदी शहर में. इनमें 19.9 फीसदी अनुसूचित जाति के वोटर हैं जबकि 14 फीसदी मुसलमान हैं. हालांकि ब्राह्मण-कुर्मी-राजपूत वोटर यहां जीत-हार तय करते हैं.

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First published: May 3, 2019, 8:14 PM IST
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