पहले ही चुनाव में राजा भैया की पार्टी की डूबी लुटिया, जमानत तक न बचा सके दोनों प्रत्याशी
Kaushambi News in Hindi

पहले ही चुनाव में राजा भैया की पार्टी की डूबी लुटिया, जमानत तक न बचा सके दोनों प्रत्याशी
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया

लोकसभा चुनाव के कुछ समय पहले राजा भैया ने अपनी पार्टी इस उद्देश्य से बनाई थी कि वो अपनी राजनीतिक ताकत का अंदाजा दूसरी पार्टियों को लगवा सकेंगे.

  • Share this:
यूपी की राजनीति में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम चलता है. खासकर लखनऊ के आस-पास के जिलों और पूर्वांचल में सभी उनके नाम से खूब वाकिफ हैं. लोकसभा चुनाव के कुछ समय पहले राजा भैया ने अपनी पार्टी इस उद्देश्य से बनाई थी कि वो अपनी राजनीतिक ताकत का अंदाजा दूसरी पार्टियों को लगवा सकेंगे. लेकिन लोकसभा चुनावों के नतीजे बता रहे हैं कि उनकी पार्टी के दोनों उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है. राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने प्रतापगढ़ सीट पर अक्षय प्रताप सिंह को खड़ा किया था और बगल की कौशांबी सीट पर शैलेंद्र कुमार को. कौशांबी में शैलेंद्र कुमार थोड़ी-बहुत फाइट भी दे पाए लेकिन अक्षय प्रताप तो बेहद कम वोट हासिल कर सके.

प्रतापगढ़

प्रतापगढ़ सीट पर चुनाव लड़ रहे राजा भैया के रिश्तेदार अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल जी को महज 46963 वोट हासिल हुए जो कुल 914665 वोट का 5.13 फीसदी ही है. अक्षय प्रताप से ज्यादा वोट कांग्रेस की उम्मीदवार रानी रत्ना सिंह को मिले, जो इलाके में राजा भैया की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी मानी जाती हैं. हालांकि रत्ना सिंह भी अपनी जमानत नहीं बचा सकीं. उन्हें 76686 वोट मिले, जो कुल वोटों का 8.43 प्रतिशत ही हैं. प्रतापगढ़ सीट पर जीत बीजेपी के संगम लाल गुप्ता को मिली है, जिन्हें 436291 वोट मिले. वहीं दूसरे नंबर गठबंधन प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे अशोक त्रिपाठी को 318539 वोट मिले.



कौशांबी
राजा भैया की पार्टी ने दूसरा उम्मीदवार कौशांबी लोकसभा सीट पर उतारा था. यहां से पार्टी प्रत्याशी शैलेंद्र कुमार भी अपनी जमानत नहीं बचा सके. शैलेंद्र कुमार को 156406 मिले जो कुल पड़े वोटों का 16.05 प्रतिशत है. शैलेंद्र जमानत नहीं बचा पाए. इस सीट पर जीत बीजेपी के विनोद सोनकर को मिली जिन्हें 383009 वोट हासिल हुए. दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट इंद्रजीत सरोज रहे जिन्हें 344287 वोट हासिल हुए. इंद्रजीत सरोज किसी जमाने में बीएसपी पार्टी के कद्दावर नेता हुआ करते थे. मायावती के वे बेहद करीबी बताए जाते थे लेकिन फिर बाद में उन्होंने बीएसपी छोड़कर समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी.

ये भी पढ़ें:

'गठबंधन' भी नहीं बचा सका बड़े- छोटे चौधरी साहब की साख!

UP की 11 विधानसभा सीटों पर होंगे उपचुनाव, यह सीटें हुई खाली

गठबंधन के फ्लॉप शो में सपा को तगड़ा नुकसान, बसपा को फायदा

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पाससब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsAppअपडेट्स
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज