बिना आरक्षण मेडिकल कॉलेजों में होगी प्रोफेसर की भर्ती, SC ने यूपी सरकार को दिया यह आदेश

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 29, 2019, 11:44 AM IST
बिना आरक्षण मेडिकल कॉलेजों में होगी प्रोफेसर की भर्ती, SC ने यूपी सरकार को दिया यह आदेश
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अब बिना आरक्षण मेडिकल कॉलेजों में होगी प्रोफेसर की भर्ती (फाइल फोटो)

साल 2015, दिसंबर में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने मेडिकल कॉलेज में एलोपैथ विभाग में प्रोफेसर की भर्ती के लिए 47 पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे. जिसमें ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के लोगों को आरक्षण की व्यवस्था के बिना ही यह विज्ञापन दिया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मेडिकल कॉलेज (Medical College) के संबंध में बुधवार को फैसला सुनाया है. कोर्ट ने यूपी सरकार (UP Government) को बिना आरक्षण (Reservation) मेडिकल कॉलेज में भर्ती करने की इजाजत दे दी है. साल 2015 में प्रोफेसर की सीधी भर्ती करने के लिए मंगाई गई आवेदन प्रक्रिया को कोर्ट ने सही ठहराते हुए यह फैसला सुनाया है.

कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश देते हुए ये भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द करने के लिए कहा है. जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने पाया कि साल 2015 से पहले तकरीबन 15 साल तक मेडिकल कॉलेज ऐसे प्रोफेसर्स के भरोसे चल रहे थे जोकि योग्य नहीं थे. वहीं पीठ ने अधिकतम आयुसीमा की बात करते हुए उसे 65 साल किए जाने के निर्णय को सही ठहराया.

कोर्ट ने माना मेडिकल कॉलेज की हालत गंभीर
अयोग्य प्रोफेसर्स के भरोसे मेडिकल कॉलेज चलने की बात पर पीठ ने कहा कि इससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि यूपी में मेडिकल की हालत क्या है. पीठ ने कहा कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ही राज्य ने आयुसीमा बढ़ाई है जोकि सरकार की तरफ से एक सकारात्मक कदम है. चूंकि यहां मामला कोर्ट में लम्बित रहा तो इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका. वहीं पीठ का यह भी कहना है कि नियम के मुताबिक आयुसीमा पर छूट 25 प्रतिशत से अधिक पद खाली होने वाले विभागों पर लागू होती है.

क्या था मामला
दरअसल साल 2015, दिसंबर में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने मेडिकल कॉलेज में एलोपैथ विभाग में प्रोफेसर की भर्ती के लिए 47 पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे. जिसमें ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के लोगों को आरक्षण की व्यवस्था के बिना ही यह विज्ञापन दिया गया था.

आयुसीमा 45 से बढ़ाकर 65 साल
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अभ्यथियों की आयुसीमा की बात करते हुए इस विज्ञापन में आधिकतम आयुसीमा 45 से बढ़ाकर 65 कर दी थी. बता दें कि इससे पहले तकरीबन 12 सालों तक राज्य में इस तरह की सीधी भर्ती नहीं हुई थी. जिस पर कुछ प्रोफेसर्स ने इलाहबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. जहां हाईकोर्ट से जब उन्हें राहत नहीं मिली तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की तरफ रुख किया. जिसमें कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया है.

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First published: August 29, 2019, 11:44 AM IST
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