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बड़ा सवाल: रायबरेली में 'शून्य' की ओर बढ़ रही कांग्रेस क्या 2024 में सोनिया के गढ़ को बचा पाएगी?

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 28, 2019, 12:16 PM IST
बड़ा सवाल: रायबरेली में 'शून्य' की ओर बढ़ रही कांग्रेस क्या 2024 में सोनिया के गढ़ को बचा पाएगी?
सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में बढ़ रही है कांग्रेस की मुश्किलें

दरअसल, रायबरेली सदर (Raebareli Sadar) से विधायक अदिति सिंह (Aditi Singh) के खिलाफ याचिका से कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि अदिति के पिता अखिलेश सिंह व दादा धुन्नी सिंह का क्षेत्र में आज भी प्रभाव देखने को मिलता है.

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रायबरेली. 2019 के लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2019) में अपने एक मजबूत किले अमेठी (Amethi) को गंवा चुकी कांग्रेस (Congress) के ऊपर अब आखिरी किले को भी खोने का खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, 2019 में अमेठी में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को बीजेपी (BJP) की स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने हराकर कांग्रेस के एक किले को ढहा दिया. अब जिस आखिरी किले पर बीजेपी की नजर है, वह है सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) का संसदीय क्षेत्र रायबरेली (Raebareli). रायबरेली से कांग्रेस के दो बागी विधायक बीजेपी की तरफ अपना रुझान दिखा रहे हैं. बता दें रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें हैं. जिनमें से दो-दो पर कांग्रेस व बीजेपी और एक पर समाजवादी पार्टी का कब्ज़ा है. लेकिन अब कांग्रेस ने अपने ही दोनों विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के सामने याचिका डाल दी है.

कांग्रेस ने रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह (Aditi Singh) को पार्टी व्हिप के खिलाफ जाने की वजह से सदस्यता ख़त्म करने की मांग की है. अदिति सिंह 2 अक्टूबर को सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र में शामिल हुई थीं, जबकि पार्टी ने लिखित में व्हिप जारी करते हुए अपने विधायकों को जाने से मना किया था. उधर  हरचंदपुर सीट से कांग्रेस के दूसरे विधायक राकेश सिंह (Rakesh Singh) हैं, जो कांग्रेस के बागी एमएलसी दिनेश सिंह के भाई हैं, दिनेश सिंह लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं. राकेश सिंह भी लगातार बगावती सुर में कांग्रेस को कोस रहे हैं. जिसके बाद कांग्रेस ने इन तीनों ही सदस्यों की सदस्यता रद्द करने के लिए याचिका दे रखी है, जिस पर फैसला होना बाकी है. सूत्रों के मुताबिक दिनेश सिंह के बाद अब अदिति सिंह और राकेश सिंह का रुझान भी बीजेपी की तरफ है. अगर ऐसा होता है तो 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की मुश्किल बढ़ सकती है.

अदिति के क्षेत्र से ही सोनिया को मिले थे सबसे ज्यादा वोट

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी करीब डेढ़ लाख मतों से जीती थीं. यही एक सीट थी, जिस पर कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी. इसमें भी सबसे दिलचस्प बात ये है कि अदिति सिंह के विधानसभा क्षेत्र से ही सोनिया गांधी को सबसे ज्यादा वोट हासिल हुए थे. अब माना जा रहा है कि अदिति सिंह के पार्टी से बाहर होने पर कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं होगी. बीजेपी की इस घेराबंदी की वजह से आने वाले दिनों में देश की सबसे पुरानी पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ जाएगी.

अदिति के पिता व दादा का क्षेत्र में है रसूख

दरअसल, अदिति सिंह के खिलाफ याचिका से कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि अदिति के पिता अखिलेश सिंह व दादा धुन्नी सिंह का क्षेत्र में आज भी प्रभाव देखने को मिलता है. हालांकि अखिलेश सिंह का गांधी परिवार से 36 का आंकड़ा रहा, लेकिन उनके दादा धुन्नी सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ राजनीति करते थे और उनके खास थे. अदिति सिंह के बागी होने से कांग्रेस को सदर सीट से नुकसान होना तय माना जा रहा है.

Aditi Singh
अदिति के बागी होने से कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है नुकसान

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कांग्रेस के लिए रायबरेली बचाना होगा मुश्किल

दो विधायकों का बीजेपी की तरफ रुझान और उनके खिलाफ कांग्रेस की याचिका से साफ़ है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की घेराबंदी काफी मजबूत होगी और कांग्रेस के लिए यह किला बचाना मुश्किल होगा. हालांकि कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि रायबरेली की जनता का गांधी परिवार से भावनात्मक लगाव रहा हैं. यही लगाव कांग्रेस के लिए काम करता आ रहा है. अदिति के पिता अखिलेश सिंह ने भी पार्टी से बगावत की, लेकिन बावजूद उसके इस संसदीय सीट पर कांग्रेस का ही कब्ज़ा रहा. कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी कहते हैं गांधी परिवार और रायबरेली के बीच का रिश्ता सियासी नहीं है. यह शुद्ध रूप से भावनात्मक है और इंदिरा गांधी के जमाने से आज तक बरकरार है. लिहाजा मुझे नहीं लगता कि अगर कोई स्थानीय नेता पार्टी बदल लेता है तो इसका असर पार्टी पर पड़ेगा.

बीजेपी ने पार्टी नेतृत्व पर उठाए सवाल

उधर बीजेपी का कहना है कि अगर कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो टॉप नेतृत्व के ऊपर सवाल उठना लाजमी है. बीजेपी के मीडिया प्रभारी राकेश त्रिपाठी का कहना है कि एक के बाद एक कांग्रेस के नेता पार्टी को छोड़ रहे हैं. इससे सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठता है. पार्टी के नेता इस नेतृत्व के साथ काम नहीं करना चाहते और वे पार्टी छोड़ रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल कहते हैं 2017 से ही कांग्रेस यहां अपना जमीन खोने लगी. इसकी वजह थी पार्टी नेतृत्व और स्थानीय लोगों के बीच बनी दूरी. रायबरेली की जनता और पार्टी में एक परिवार सा संबंध रहा है लेकिन यह रिश्ता कमजोर हुआ. खासकर 2019 के लोकसभा चुनाव में इसमें और गिरावट देखने को मिली. यह स्थानीय नेता ही थे जो गांधी परिवार की मौजदगी में भी लोगों को पार्टी के साथ जोड़कर रखते थे. अगर वे पार्टी में नहीं रहेंगे तो आगे की राह आसान नहीं होगी. संजय सिंह बीजेपी में जा चुके हैं, अखिलेश सिंह रहे नहीं और अब अदिति सिंह का जाना एक बड़ा नुकसान है.

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First published: November 28, 2019, 12:11 PM IST
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