कांग्रेस के गढ़ में BJP पस्त, MLA अदिति सिंह की बगावत भी न दे सकी संजीवनी, बसपा शून्य

कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में सदर से कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह का लाभ भी बीजेपी को पंचायत चुनाव में नही मिल सका.  (File Photo)

कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में सदर से कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह का लाभ भी बीजेपी को पंचायत चुनाव में नही मिल सका. (File Photo)

Raebareli Panchayat Chunav: रायबरेली जिले में जिला पंचायत सदस्य की 52 सीटें हैं. कांग्रेस को 33 में से 10, सपा को 35 सीटों में से 14 पर कामयाबी मिली. भाजपा ने जिस जोर-शोर से इस चुनाव में ताकत लगाई, उसका असर नजर नहीं आया. सभी सीटों पर लड़ने के बावजूद वह 9 सीट पर सिमट गई.

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रायबरेली. यूपी के रायबरेली (Raebareli) में संपन्न हुए पंचायत चुनाव (Panchayat Chunav Results) में एमएलसी दिनेश सिंह (MLC Dinesh Singh) का कुनबा बीजेपी (BJP) को लाभ नहीं दिला सका. यही नहीं सदर विधायक अदिति सिंह (Sadar MLA Aditi Singh) की कांग्रेस से बगावत भी कोई नुकसान नहीं कर सकी, न ही बीजेपी को कोई फायदा पहुंचा सकी. बीजेपी की हालत तो ये हुई कि डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के प्रभार वाले इस जिले में पार्टी दहाई के अंक तक नहीं पहुंच पाई. यहीं पर कांग्रेस और सपा को 11-11 सीटें मिली हैं. अब जिला पंचायत अध्यक्ष चुनने के लिए 20 अन्य की निर्णायक भूमिका होगी. मजे की बात ये है़ कि बहुजन समाज पार्टी का यहां खाता तक नही खुला है़, हां अपना दल ने एक सीट जरूर हथिया ली है़.

बता दें कि जिले में जिला पंचायत सदस्य की 52 सीटें हैं. पहली बार प्रमुख राजनीतिक दलों ने समर्थित प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया. कांग्रेस पहले ही सभी सीटों पर प्रत्याशी नही उतार सकी थी. उसने महज 33 वार्डों में चुनाव लड़ाया, जिसमें 10 सीटों पर उसे जीत हासिल हुई. सपा ने 35 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, जिसमें से 14 पर वो कामयाब हुई. भाजपा ने जिस जोर-शोर से इस चुनाव में ताकत लगाई, उसका असर नजर नहीं आया. सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने के बावजूद वह 9 सीट पर ही सिमट कर गई.

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एकजुटता की कमी, निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तरजीह न देना बना कारण?
इसके पीछे कई तरह के कारण भीतरखाने चर्चा में हैं. बताते हैं कि एकजुटता का अभाव व निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तरजीह न दिए जाने के कारण पार्टी की यह दुर्गति हुई. आलम यह रहा कि पार्टी ने जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष सुमन सिंह को हरचंदपुर तृतीय सीट लड़ाया था, लेकिन वे भी हार गईं. महराजगंज प्रथम सीट से पूर्व विधायक राजाराम त्यागी भी चुनाव हार गए. इसी तरह कई सीटों पर पार्टी के अन्य नेता भी पराजित हुए.

ये हैं प्रमुख विजेता और हारने वाले

पूर्व सांसद अशोक सिंह के बेटे मनीष सिंह की पत्नी आरती सिंह ने अमावां द्वितीय से जीत हासिल की है. जगतपुर से कांग्रेस के राकेश सिंह राना ने अपना जलवा दिखाया है. राही ब्लाक की तीनों सीटों पर जहां सपा समर्थित प्रत्याशी ने जीत हासिल की है, वहीं महाराजगंज प्रथम से पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं सपा के पूर्व विधायक रामलाल अकेला के बेटे विक्रांत अकेला ने जीत हासिल की है. उन्होंने सपा से बागी प्रत्याशी को ही नहीं, बल्कि भाजपा के पूर्व विधायक राजाराम त्यागी को धूल चटाई है.



यही नहीं हरचंदपुर तृतीय से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की अनुज बधू सुमन सिंह चुनाव हार गई हैं. सुमन सिंह को सपा की शिवदेवी ने हराया है. भाजपा और बसपा के उम्मीदवार पिछड़े हुए हैं. हरचंदपुर प्रथम से जहां भाजपा समर्थित प्रत्याशी चुनाव हार गया है वहीं राघवेंद्र प्रताप सिंह निर्दलीय लड़कर चुनाव जीत गए हैं. यह अलग बात है कि राघवेंद्र सिंह एक वरिष्ठ भाजपा नेता के बेटे हैं.
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