1000 बसों की सियासत: अपनी ही पार्टी पर बिफरीं MLA अदिति सिंह, जानिए कब-कब पकड़ी कांग्रेस से अलग राह
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1000 बसों की सियासत: अपनी ही पार्टी पर बिफरीं MLA अदिति सिंह, जानिए कब-कब पकड़ी कांग्रेस से अलग राह
रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह (फाइल फोटो)

योगी सरकार (Yogi Government) और कांग्रेस के बीच प्रवासी मजदूरों (Migrant Laborers) को उनके घर भेजने के लिए 1000 बसें मुहैया कराने को लेकर जमकर घमासान मचा हुआ है. जबकि इस दौरान रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह (Congress MLA Aditi Singh) ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर बयान दिया है.

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रायबरेली. कोरोना वायरस की महामारी के कारण देशभर में लॉकडाउन चल रहा है. जबकि इस दौरान उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) और कांग्रेस के बीच प्रवासी मजदूरों (Migrant Laborers) को उनके घर भेजने के लिए 1000 बसें मुहैया कराने को लेकर जमकर घमासान मचा हुआ है. हालांकि इस बीच रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह (Congress MLA Aditi Singh) ने अपनी ही पार्टी को पूरे मसले में कठघरे में खड़ा कर दिया है.अदिति ने न सिर्फ इसे निम्न सियासत करार दिया है, बल्कि उन्होंने राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र में बसें नहीं लगाने पर सवाल किया है?

अदिति सिंह ने ट्वीट किया है, 'आपदा के वक्त ऐसी निम्न सियासत की क्या जरूरत? एक हजार बसों की सूची भेजी. उसमें भी आधी से ज्यादा बसों का फर्जीवाड़ा. 297 कबाड़ बसें, 98 आटो रिक्शा व एबुंलेंस जैसी गाड़ियां और 68 वाहन बिना कागजात के...ये कैसा क्रूर मजाक है. अगर बसें थीं तो राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र में क्‍यों नहीं लगाई?'

इसके अलावा उन्‍होंने एक और ट्वीट में लिखा, 'कोटा में जब यूपी के हजारों बच्चे फंसे थे तब कहां थीं ये तथाकथित बसें, तब कांग्रेस सरकार इन बच्चों को घर तक तो छोड़िए, बॉर्डर तक ना छोड़ पाई, तब योगी आदित्यनाथ ने रातों रात बसें लगाकर इन बच्चों को घर पहुंचाया, खुद राजस्थान के सीएम ने भी इसकी तारीफ की थी.'



पहले भी पार्टी लाइन से हटकर दे चुकी हैं बयान



यह पहली बार नहीं है जब विधायक अदिति सिंह पार्टी लाइन से अलग जाकर बयान दिया है. इससे पहले भी एक दिन के विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान एक तरफ प्रियंका गांधी लखनऊ में प्रदर्शन कर रही थीं. वहीं अदिति सिंह सत्र में पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर विधानसभा में उपस्थित थीं. उस समय पार्टी की तरफ से उन्हें नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा था.

विशेष विधानसभा सत्र में भाग लेने के तुरंत बाद यूपी सरकार ने अदिति सिंह की सुरक्षा बढ़ा दी थी. इसके बाद उन्‍होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात जो कि कांग्रेस के भीतर हडकंप मचाने के लिए काफी थी. हालांकि उनकी भाजपा में जाने की चर्चा थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. यही नहीं, अदिति सिंह पिछले साल 22 से 24 अक्टूबर के बीच रायबरेली में आयोजित पार्टी के प्रशिक्षण सत्र से गायब थीं और पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया.

सांसद गांधी परिवार से होने के बावजूद हनक 'विधायक जी' की ही थी
रायबरेली में छह विधानसभा सीटें बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली सदर, सरेनी, ऊंचाहार और सलोन हैं. लेकिन, कांग्रेस का गढ़ होने के बावजूद वर्ष 2017 तक रायबरेली सदर सीट पर कांग्रेस (Congress) का कब्ज़ा नहीं रहा. वजह थी ‘विधायक जी’ के नाम से मशहूर अखिलेश सिंह. बाहुबली अखिलेश सिंह क्रिमिनल बैकग्राउंड होने के बावजूद यहां की जमीन पर पकड़ रखते थे. अखिलेश सिंह का दबदबा और हनक इस सीट पर देखने को मिलती रही है. वर्ष 2017 के चुनाव में अपनी गिरती सेहत और सियासी विरासत को संजोए रखने के लिए अखिलेश ने अपनी बेटी को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाकर विधानसभा भेजा. कहा जाता है कि जिले के हर ठेके-पट्टे पर उनका कमीशन तय होता है. किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए उनके आदमी को काम देना भी जरूरी है. अखिलेश सिंह का सिक्का आज भी यहां बोलता है.

अब बेटी अदिति सियासी वर्चस्व को दे रहीं नई दिशा
शायद इसे ही पॉलिटिक्स कहते हैं. जो कभी खिलाफ थे, आज कांग्रेस के साथ हैं. दरअसल, इसके पीछे की वजह है एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की ताकत बढ़ना और अखिलेश का गिरता स्वास्थ्य. समय के साथ परिस्थितियां भी बदलीं. अखिलेश के खिलाफ कांग्रेस ने दिनेश प्रताप सिंह को ताकत देनी शुरू की. एक समय यह भी आया कि कभी सत्ता का केंद्र रहा 'विधायक जी' का निवास एमएलसी निवास पंचवटी (दिनेश प्रताप सिंह का घर) की तरफ शिफ्ट होने लगा. दिनेश सिंह का बढ़ता रसूख और अखिलेश सिंह का गिरता स्वास्थ्य कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हुआ. वर्ष 2017 में अदिति सिंह कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से जीतीं. कांग्रेस के साथ आने से अखिलेश का पर्सनल वोट बैंक कांग्रेस के नाम हुआ.

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