रायबरेली MLA अदिति सिंह ने गांधी परिवार पर साधा निशाना, कमला नेहरू ट्रस्ट को लेकर EoW को लिखा पत्र

कांग्रेस की विधायक अदिति सिंह ने EOW के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय को भी जांच के लिए पत्र लिखा है (फाइल फोटो)
कांग्रेस की विधायक अदिति सिंह ने EOW के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय को भी जांच के लिए पत्र लिखा है (फाइल फोटो)

कमला नेहरू ट्रस्ट फर्जीवाड़ा: विधायक अदिति सिंह (Aditi Singh) ने इस मामले की जांच के लिए अपराध शाखा के डीआईजी को पत्र लिखा है और ट्वीट कर गांधी परिवार पर भी निशाना साधा है कि जो लोग पीएम केयर फंड पर सवाल उठा रहे है वो इस फर्जीवाड़े पर चुप हैं.

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रायबरेली. उत्तर प्रदेश में रायबरेली (Raebareli) सदर से विधायक अदिति सिंह (MLA Aditi Singh) ने गांधी परिवार (Gandhi Family) के नजदीकी विक्रम कौल की अध्यक्षता वाले कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी (Kamla Nehru Educational Society) की जमीन में कथित फर्ज़ीवाड़े के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EoW) को पत्र लिखकर जांच की मांग की है. इस मामले में अदिति सिंह सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से भी मदद मांग चुकीं हैं. अब उन्होंने इस मामले की जांच के लिए अपराध शाखा के डीआईजी को पत्र लिखा है और ट्वीट कर गांधी परिवार पर भी निशाना साधा है कि जो लोग पीएम केयर फंड पर सवाल उठा रहे हैं, वो इस फर्जीवाड़े पर चुप हैं.

ये है पूरा मामला
रायबरेली के प्रयागराज-लखनऊ एनच 232 पर सिविल लाइंस इलाक़े में 5 बीघा नजूल की ज़मीन है. इस जमीन पर दशकों से लगभग सवा सौ से अधिक स्थानीय लोगों की दुकानें हैं और कुछ लोग घर बना कर अपना और परिवार का जीवन यापन कर रहे है. 1969-70 में तत्कालीन जिला परिषद अध्यक्ष राम शंकर त्रिपाठी ने सांसद उमा शंकर त्रिपाठी, बैजनाथ कुरील यशपाल कपूर, एमएलसी शीला कौल, लखनऊ रिवर बैंक कालोनी निवासी बेगम सलमा हयात और गया प्रसाद शुक्ल के साथ मिलकर रायबरेली में कमला नेहरू एजुकेशन सोसाइटी गठित की थी. 1991 में सोसायटी के बोर्ड ऑफ मेंबर गांधी परिवार की रिश्तेदार शीला कौल के साथ उनके बेटे विक्रम कौल और सुनील देव सहित अन्य लोग भी शामिल हुए. सन् 2000 तक कमला नेहरू एजुकेशन सोसायटी शून्यावस्था में पड़ी रही और इस ज़मीन के साथ साथ जिले में कही भी कोई  भी शिक्षण गतिविधियां नहीं हुई और इस जमीन पर काबिज किसी शख्स को इस सोसाइटी के बारे में जानकारी नहीं हुई.

जमीन बेचने के लिए फ्री होल्ड कराया
साल 2000 में सोसायटी के सचिव सुनील देव ने सोसाइटी का रिन्यूअल कराया और फ्रीहोल्ड के लिए 2001 में आवेदन किया. 9 फरवरी 2002 को फ्री होल्ड के लिए आदेश पारित हो गया और 6 मार्च 2003 को डीड संपादित हो गई. 10 मार्च 2016 को कागजों पर चल रही कमला नेहरू सोसायटी के सचिव सुनील देव ने सपा सांसद बाल कुमार पटेल की पत्नी और बेटे के नाम एग्रीमेंट कर दिया. एग्रीमेंट के बाद जब ज़मीन पर कब्ज़ा लेने बालकुमार पटेल के लोग पहुंचे तब इसकी जानकारी वहां काबिज लोगों को हुई. उस वक्त विरोध की वजह से कब्ज़ा नहीं हो पाया और इसके खिलाफ दुकानदार हाईकोर्ट चले गए. 25 अगस्त 2017 को फैसला आया कि फ्रीहोल्ड गलत तरीके से हुआ है इस को खारिज करके जिलाधिकारी अवगत कराएं. लेकिन प्रशासनिक स्तर से इस पर अमल नहीं किया गया. तब कब्जेदारों ने  2018 में जिलाधिकारी के कंप्लायंस ना करने के खिलाफ फिर कोर्ट चले गए. जिसके बाद 23 मार्च 2019 को जिलाधिकारी रायबरेली ने फ्रीहोल्ड कैंसिलेशन का आदेश पारित कर दिया.



2018 में जमीन का एग्रीमेंट भी कर दिया
10 अक्टूबर 2018 को एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के भाई बृजेश प्रताप सिंह की फर्म डीपीएस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने 9 करोड़ 30 लाख रुपये में सोसायटी के अध्यक्ष विक्रम कौल ने एग्रीमेंट कर दिया और सोसायटी में नए सदस्य अभय केसरवानी को बनाया. जिसके गवाह बने शीला कौल के रिश्तेदार और सलमान खुर्शीद. इसके साथ ही सोसाइटी ने फ्री होल्ड कैंसिलेशन के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर दी. दावा था कि जिलाधिकारी ने गलत तरीके से फ्री होल्ड कैंसिल किया है. इसके बाद हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2020 को एक आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया कि 06 मार्च 2003 की डीड वैसे ही बनी रहेगी जब तक की इसे सिविल सूट के माध्यम से कैंसिलेशन ना कराया जाए. जिला प्रशासन ने 31 मार्च 2020 को मौके पर काबिज लोगों को नोटिस दी कि 7 दिन के अंदर सोसाइटी की जमीन से कब्जा हटा लें, लेकिन लॉकडाउन के चलते मामला शांत हो गया. फिर अनलॉक होने पर जिला प्रशासन को कोर्ट के आदेश की याद आयी और उसने दुकानदारों को नोटिस दी. जिसके बाद 9 अगस्त 2020 को सदर विधायक अदिति सिंह काबिज दुकानदारों के साथ सिविल लाइन पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं को लेकर खड़ी हो गई. अदिति सिंह के विरोध को देखते हुए कार्रवाई करने आए प्रशासनिक अधिकारियों को बैरंग वापस लौटना पड़ा. मामला मुख्यमंत्री तक भी पहुंचा और उस पर न्याय की बात भी कही गई.

कब्जेदारों को मिला है खाली करने का नोटिस
इस बीच जिला प्रशासन ने दीवानी न्यायालय में सिविल सूट 117/ 20 दायर किया. जिसकी एक सुनवाई 20 अक्टूबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन के यहां हो चुकी है और अगली सुनवाई 18 नवम्बर 2020 को होनी है. एमएलसी के भाई से मामला जुड़ा होने के चलते जिला प्रशासन ने पुनः कब्जेदारों को नोटिस दिया कि 11 नवंबर 2020 तक हर हालत में कब्जा हटा लें.

अदिति सिंह कब्जेदारों के साथ खड़ी
अब प्रशासन के आगे आने से एक बार फिर अदिति सिंह मौके पर मौजूद दुकानदारों के समर्थन में आगे आयी हैं और उन्होंने चिट्ठी लिखकर आर्थिक अपराध शाखा से जांच की मांग कर दी है. साथ ही गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि जो लोग पीएम केयर फंड पर पारदर्शिता की बात कर रहे है वो कमला नेहरू एजुकेशनल सोसायटी पर शांत है. बता दें कि कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी की विवादित जमीन पर कई साल से दुकानदार काबिज हैं और यह दुकानदार आरपार की लड़ाई के लिए तैयार है. दुकानदारों का दावा है कि कमला नेहरू एजुकेशनल सोसायटी ने इस जमीन के साथ साथ जिले में कहीं भी किसी शिक्षण कार्य नहीं किया. समिति के सदस्य केवल कागजों पर ही दावा करते है.
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