प्रियंका गांधी आज रायबरेली में लेंगी हर प्रत्याशी से हार का 'हिसाब'

बैठक में पूर्वांचल और पश्चिम यूपी के जिलाध्यक्षों को बुलाया गया है. प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने-अपने क्षेत्र के पदाधिकारियों और प्रत्याशियों से हार की वजह जानने की कोशिश करेंगे.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 12, 2019, 1:51 PM IST
प्रियंका गांधी आज रायबरेली में लेंगी हर प्रत्याशी से हार का 'हिसाब'
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी की फाइल फोटो
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Updated: June 12, 2019, 1:51 PM IST
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पहली बार बुधवार को रायबरेली के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचीं. प्रियंका जहां लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में निराशाजनक प्रदर्शन की वजह तलाशेंगी, वहीं सोनिया रायबरेली सीट पर उन्हें जिताने वाले क्षेत्रीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताएंगी. यह पहली बार है जब कांग्रेस नेताओं की बड़ी बैठक रायबरेली में हो रही है.

प्रत्याशियों से लेंगी हार का हिसाब


इस बैठक में पूर्वांचल और पश्चिम यूपी के जिलाध्यक्षों को बुलाया गया है. प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने-अपने क्षेत्र के पदाधिकारियों और प्रत्याशियों से हार की वजह जानने की कोशिश करेंगे.

Sonia Gandhi arrives in Raebareli. This is her first visit to the constituency after retaining the seat in the Lok Sabha elections. Sonia Gandhi's daughter and Congress General Secretary of UP East Priyanka Gandhi Vadra is also accompanying her . pic.twitter.com/YaTTtTZVbz




दरअसल लोकसभा चुनाव के पहले प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी गई थी. स्थिति यह रही कि पार्टी केवल एक ही सीट प्रदेश में जीत सकी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी अपनी परंपरागत सीट अमेठी में हार झेलनी पड़ी. पार्टी को अमेठी सीट क्यों गंवानी पड़ी, इसकी वजह तलाशने के लिए कांग्रेस ने यह समीक्षा बैठक रखी है.
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बैठक को लेकर कार्यकर्ताओं में गुस्सा
बैठक से पहले ही कांग्रेस के तमाम जिला और शहर अध्यक्षों ने समीक्षा बैठक के इस प्रारूप पर तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है. जिला और शहर अध्यक्षों का कहना है कि पूरे चुनाव में उनकी भूमिका शून्य थी. न तो वे प्रत्याशियों के बारे में अपनी राय देने वालों में थे और न ही चुनाव के दौरान तय की जाने वाली रणनीति का हिस्सा. ऐसे में उनसे हार की वजह पूछना बेमानी है. इसमें तो उन लोगों से पूछताछ होनी चाहिए, जिन्होंने टिकट तय कराए, रणनीति बनाई और संगठन को कमजोर रखा.

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